- अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू किया, लेकिन अब उनके समर्थक ही उनके खिलाफ नजर आ रहे हैं
- ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस ने ट्रंप और नेतन्याहू से कहा है कि नागरिक बुनियादी ढांचे को नुकसान न पहुंचाएं
- अमेरिका में युद्ध को लेकर जनता में चिंता बढ़ी है और ट्रंप की अपनी पार्टी में भी उनके खिलाफ फूट दिखाई दे रही है
US Israel War Against Iran: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जिन लोगों के नाम पर ईरान के खिलाफ जंग शुरू की थी, अब वे लोग ही उनके खिलाफ नजर आने लगे हैं. 28 फरवरी को जंग शुरू करने से पहले ट्रंप ने बार-बार खुद को ईरान की विद्रोही जनता का मसीहा दिखाया था, एक तानाशाही शासन से आजादी का सपना दिखाया था. लेकिन जंग के 23 दिन बीत जाने के बाद ट्रंप और उनकी सेना ईरान में बिना किसी भेद सैनिक और जनता पर बमबारी कर रही है. जंग के पहले ही दिन तेहरान में लड़कियों के स्कूल पर मिसाइल अटैक करने वाली अमेरिकी सेना को ट्रंप ने एक और काम दिया है. ट्रंप ने ईरान को धमकी दी है कि अगर वह 48 घंटे के अंदर होर्मुज का रास्ता नहीं खोलता है तो अमेरिकी सेना ईरान के सभी पावर प्लांट यानी बिजली संयंत्रों को तबाह कर देगी.
ईरान की जनता डरी हुई है कि ट्रंप ईरानी शासन नहीं पूरे ईरान को ही अपना दुश्मन मान बैठे हैं, आम लोगों की मूल जरूरतों को पूरा करने वाले इन्फ्रास्ट्रक्चर को ही निशाना बनाने की तैयारी है. जंग से पहले बार बार ट्रंप से हमले की गुजारिश करने वाले ईरानी क्राउन प्रिंस भी ट्रंप को अब बता रहे हैं कि आपकी लड़ाई ईरान से नहीं, वहां के इस्लामिक शासन से हैं.
रेजा पहलवनी ने ट्रंप को दिलाया याद
ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने कहा है कि ईरान और वहां का इस्लामिक शासन एक नहीं है और यहां की मौजूदा व्यवस्था (रेजिम) को खत्म किया जाना चाहिए. पहलवी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से अपील की कि वे रेजिम और उसके दमन करने वाले तंत्र को निशाना बनाते रहें, लेकिन नागरिक बुनियादी ढांचे को नुकसान न पहुंचाएं.
Iran is not the Islamic Republic.
— Reza Pahlavi (@PahlaviReza) March 22, 2026
Iran's civilian infrastructure belongs to the Iranian people and to the future of a free Iran. The Islamic Republic's infrastructure is the machinery of repression and terror used to keep that future from becoming reality.
Iran must be…
उन्होंने आगे कहा, “मैं राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नेतन्याहू से अनुरोध करता हूं कि वे रेजिम और उसके दमन के तंत्र को निशाना बनाते रहें, लेकिन नागरिक बुनियादी ढांचे को बचाएं, क्योंकि ईरानियों को अपने देश का पुनर्निर्माण करने के लिए इसकी जरूरत होगी. अमेरिका और इजरायल के समर्थन से, और सबसे बढ़कर ईरानी देशभक्तों के बलिदान से, ईरान की आजादी का समय करीब है. ईरान अमर रहे!”
जंग के पहले ही दिन ईरानी जनता को ट्रंप ने दिया जख्म
इजरायल-अमेरिका की बमबारी के पहले ही दिन (28 फरवरी) ईरान में लड़कियों के एक स्कूल पर टॉमहॉक मिसाइल हमले में कम से कम 175 लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर बच्चियां थी. खुद अमेरिकी जांचकर्ताओं का मानना है कि इसके लिए अमेरिकी बल जिम्मेदार हो सकते हैं. तमाम अखबारों की एनालिसिस में भी यही बात साबित हुई है. ठीक उसी दिन ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित लामेर्द में एक खेल भवन पर हुए हमले में 20 लोग मारे गए, जिनमें वॉलीबॉल खेल रही लड़कियां भी शामिल थीं.
अगले दिन तेहरान के गांधी अस्पताल को हमलों में भारी नुकसान पहुंचा. इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने “बहुत चिंताजनक” घटना बताया. इस युद्ध में मरने वालों की संख्या ईरान में 1500 से ज्यादा, लेबनान में 1000 से ज्यादा, इजराइल में 15 और अमेरिका के 13 सैनिकों तक पहुंच गई है. इसके अलावा खाड़ी क्षेत्र में जमीन और समुद्र में भी कई नागरिक मारे गए हैं. लेबनान और ईरान में लाखों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं.
अमेरिकी लोगों में चिंता, टीम ट्रंप में भी फूट
अमेरिका में लोगों के बीच यह चिंता बढ़ रही है कि ईरान के साथ चल रहा युद्ध अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है. कई अमेरिकी मानते हैं कि इससे पेट्रोल की कीमतें बढ़ेंगी और अर्थव्यवस्था कमजोर हो सकती है. सीबीएस न्यूज के एक हालिया सर्वे के अनुसार, अमेरिकी लोगों का मानना है कि यह युद्ध पहले से ही तेल-गैस की कीमतों को प्रभावित कर रहा है और आगे भी ऐसा करता रहेगा. सरकार द्वारा धैर्य रखने की अपील के बावजूद लोगों का आर्थिक सुधार पर भरोसा कम है. सर्वे में ज्यादातर लोगों का मानना है कि यह संघर्ष कम से कम निकट भविष्य में अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर डालेगा.
आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि संभावित मंदी का डर फिर से बढ़ रहा है. साथ ही, अमेरिकी लोगों की नजर में वर्तमान आर्थिक स्थिति की छवि भी खराब हो रही है. यह सब उस समय हो रहा है जब कई अमेरिकी जरूरी सामानों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी महसूस कर रहे हैं, जिससे आर्थिक चिंता और बढ़ गई है.
ट्रंप के लिए परेशानी यह भी है कि सिर्फ उनकी पार्टी- रिपब्लिकन में ही उनका विरोध नहीं हो रहा है, खुद उनकी टीम में भी फूट दिखाई देने लगी है. ट्रंप सरकार में आतंकनिरोधी दस्ता के चीफ जो केंट ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है और अब खुलकर तमाम मीडिया प्लेटफॉर्म पर आकर ट्रंप का विरोध कर रहे हैं. साथ ही केंट ट्रंप के वोट बैंक- मेक अमेरिका ग्रेट अगेन आंदोलन में लोगों को ट्रंप के जंग के फैसले के खिलाफ लामबंद करने में जुट गए हैं.
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