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LPG का विकल्प खुद बनाएगा भारत, मोदी कैबिनेट ने कोल गैसिफिकेशन प्रोजेक्ट को दी मंजूरी, 3 लाख करोड़ का निवेश

केंद्रीय कैबिनेट ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और कोयले के स्वच्छ उपयोग को बढ़ावा देने के लिए 37,500 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है.

LPG का विकल्प खुद बनाएगा भारत, मोदी कैबिनेट ने कोल गैसिफिकेशन प्रोजेक्ट को दी मंजूरी, 3 लाख करोड़ का निवेश

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को बताया कि केंद्रीय कैबिनेट ने कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण प्रोजेक्ट को बढ़ावा देने के लिए 37,500 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दे दी है. उन्होंने इस पहल को स्वच्छ कोयला उपयोग, ऊर्जा सुरक्षा और आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम बताया.

इस योजना का उद्देश्य कोयला और लिग्नाइट को सिंथेसिस गैस, या 'सिनगैस' (syngas) में बदलने की प्रक्रिया को तेज करना है. इस गैस का उपयोग बिजली उत्पादन, उर्वरक, रसायन और अन्य संबंधित औद्योगिक उत्पादों के लिए किया जा सकता है. इस योजना का लक्ष्य लगभग 75 मिलियन टन कोयला और लिग्नाइट का गैसीकरण करना है. सरकार को इस पूरी वैल्यू चैन में लगभग 3 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित होने की उम्मीद है.

अश्विणी वैष्णव ने कहा कि भारत के पास दुनिया के सबसे बड़े कोयला और लिग्नाइट भंडार में से एक है और सरकार इनके उपयोग को पारंपरिक थर्मल बिजली उत्पादन से आगे बढ़ाकर विविध क्षेत्रों में फैलाना चाहती है. भारत के पास करीब 401 अरब टन कोयला भंडार और लगभग 47 अरब टन लिग्नाइट भंडार है, जबकि फिलहाल देश की कुल ऊर्जा खपत में कोयले का योगदान 55 प्रतिशत से भी अधिक है.

क्या है कोयला गैसीकरण?

यह एक ऐसी तकनीक है जिसमें कोयले को उच्च तापमान और दबाव पर ऑक्सीजन और पानी के साथ प्रतिक्रिया कराई जाती है. इससे कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन से युक्त 'सिनगैस' प्राप्त होती है, जिसे औद्योगिक उपयोग के लिए संसाधित किया जा सकता है. यह पहल भारत की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत प्राकृतिक गैस, उर्वरक और रसायनों के आयात पर निर्भरता को कम कर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाना है. इस योजना के तहत प्रोजेक्ट का चयन एक पारदर्शी बोली प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा.

सरकार देगी प्रोत्साहन

सरकार संयंत्र और मशीनरी की लागत का 20 प्रतिशत तक वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करेगी. यह सहायता चार समान किस्तों में परियोजना के विभिन्न चरणों के पूरा होने पर दी जाएगी. प्रति प्रोजेक्ट अधिकतम 5,000 करोड़ रुपये की सहायता दी जाएगी. वहीं प्रति उत्पाद श्रेणी (SNG और यूरिया छोड़कर) अधिकतम 9,000 करोड़ रुपये की राशि दी जाएगी. सभी प्रोजेक्ट को मिलाकर प्रति इकाई या समूह 12,000 करोड़ रुपये तक की प्रोत्साहन मदद मिलेगी.

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