- मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पर अभी तक चुनाव आयोग ने कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है और विचार-विमर्श जारी है.
- कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिला और उन्होंने नामांकन रद्द करने को बिना ठोस आधार वाला बताया है.
- कांग्रेस का कहना है कि रिटर्निंग ऑफिसर का फैसला गलत और इसे चुनौती देने के लिए पार्टी न्यायालय का रुख कर सकती.
मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पर अब तक अंतिम फैसला नहीं हो सका है, जिससे सियासी हलकों में लगातार अटकलें जारी हैं. इस बीच कांग्रेस के शीर्ष नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल बुधवार को चुनाव आयोग से मिला, जहां करीब 35 मिनट तक इस मुद्दे पर चर्चा हुई. बैठक में केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश, मीनाक्षी नटराजन, भूपेश बघेल, अभिषेक मनु सिंघवी और विवेक तनखा समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे.
बैठक के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य दोनों चुनाव आयुक्तों के बीच भी अहम विचार-विमर्श हुआ. लेकिन चुनाव आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि इस मामले में अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर न्यायालय का रुख करती है या आयोग संवैधानिक प्रावधानों के तहत कोई फैसला करता है.
'नामांकन रद्द करने का फैसला बिना किसी आधार के किया गया'
आयोग ने स्पष्ट किया है कि मीनाक्षी नटराजन के नामांकन मामले पर अभी विचार-विमर्श जारी है और अंतिम फैसला नहीं लिया गया है. कांग्रेस का आरोप है कि रिटर्निंग ऑफिसर ने गलत तरीके से उनका नामांकन खारिज किया और इसे वापस लिया जाना चाहिए. पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने आयोग के सामने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि नामांकन रद्द करने का फैसला बिना किसी ठोस आधार के किया गया है और किसी मामले का सही खुलासा नहीं किया गया.
'तो पार्टी कोर्ट का रुख करेगी...'
कांग्रेस नेताओं ने बताया कि नियमों के अनुसार केवल उन मामलों का खुलासा जरूरी होता है, जिनमें आरोप तय हो चुके हों, लेकिन यहां ऐसा कोई मामला नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि एक बार रिटर्निंग ऑफिसर का फैसला हो जाने के बाद चुनाव याचिका ही कानूनी रास्ता बचता है, जिसके जरिए इस फैसले को चुनौती दी जा सकती है. ऐसे में अगर चुनाव आयोग कांग्रेस के पक्ष में निर्णय नहीं देता है, तो पार्टी कोर्ट का रुख करेगी.
आयोग रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को पलट सकता है : अभिषेक मनु सिंघवी
हालांकि, कांग्रेस ने पहले आयोग से ही समाधान की कोशिश इसीलिए की, ताकि कानूनी प्रक्रिया में समय न लगे, क्योंकि तब तक चुनाव प्रक्रिया पूरी हो सकती है. इस बीच अभिषेक मनु सिंघवी ने सुझाव दिया कि चुनाव आयोग संविधान के अनुच्छेद 324 का इस्तेमाल करते हुए रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को पलट सकता है. उन्होंने कहा कि आयोग के पास यह अधिकार है, हालांकि इसका इस्तेमाल बहुत कम किया जाता है.
कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक अनुच्छेद 324 का उपयोग आमतौर पर उन परिस्थितियों में किया जाता है, जहां चुनावी कानून में स्पष्ट प्रावधान न हो. हालांकि इस मामले में स्थिति अलग मानी जा रही है. गौरतलब है कि 2017 के गुजरात राज्यसभा चुनाव में आयोग ने इसी अधिकार का इस्तेमाल कर रिटर्निंग ऑफिसर का निर्णय पलट दिया था, जिससे कांग्रेस के उम्मीदवार अहमद पटेल की जीत सुनिश्चित हुई थी.
ये भी पढ़ें : जानिए क्यों अपनी पार्टी में एक पहेली की तरह हैं मीनाक्षी नटराजन ? रात में प्लेन छोड़ ट्रेन से गईं दिल्ली
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं