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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ बयानबाजी के चलते ममता कुलकर्णी पर गिरी गाज, किन्नर अखाड़े से निकाली गईं

प्रयागराज माघ मेले में कथित अपमान के बाद धरने पर बैठे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर टिप्पणी करने वाली बॉलीवुड एक्ट्रेस ममता कुलकर्णी को किन्नर अखाड़े से निकाल दिया गया है. उन्होंने बीते दिनों शंकराचार्य पर टिप्पणी की थी.

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ बयानबाजी के चलते ममता कुलकर्णी पर गिरी गाज, किन्नर अखाड़े से निकाली गईं
ममता कुलकर्णी.
  • स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ बयानों के कारण किन्नर अखाड़ा ने ममता कुलकर्णी को निष्कासित कर दिया है.
  • किन्नर अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी प्रोफेसर डॉक्टर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने यह कार्रवाई की.
  • ममता कुलकर्णी को महाकुंभ में किन्नर अखाड़े ने नया नाम देकर महामंडलेश्वर बनाया था.
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प्रयागराज:

Mamta Kulkarni  Kinnar Akhara: प्रयागराज माघ मेले में शंकारचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के अनशन से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ बयानबाजी के चलते पूर्व बॉलीवुड एक्ट्रेस ममता कुलकर्णी पर गाज गिरी है. ममता कुलकर्णी को किन्नर अखाड़े से निष्कासित कर दिया गया है. किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी प्रो डॉ लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने यह कार्रवाई की है. मालूम हो कि ममता कुलकर्णी ने बीते दिनों शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर टिप्पणी की थी. जिसके बाद किन्नर अखाड़ा ने ममता बनर्जी उर्फ यामाई ममता नंद गिरी पर कार्रवाई की है.    

2024 के महाकुंभ में किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर बनी थी ममता कुलकर्णी

मालूम हो कि महाकुंभ में 24 जनवरी 2025 को ममता कुलकर्णी को किन्नर अखाड़े ने नया नाम देकर महामंडलेश्वर बनाया था. आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी प्रोफेसर डॉक्टर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने ममता कुलकर्णी के बयानों से खुद को अलग किया. उन्होंने कहा है कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को लेकर जो बयान ममता कुलकर्णी ने दिया है वह उनका व्यक्तिगत बयान है. इस मुद्दे पर उन्होंने किन्नर अखाड़े से कोई विचार विमर्श नहीं किया है‌.

शंकराचार्य से जुड़े बातों पर हमें कोई टिप्पणी नहीं करनी हैः किन्नर अखाड़ा

उन्होंने कहा है कि हमारे गुरु श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के संरक्षक और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरि गिरी महाराज है. हमने दीक्षा शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती से ली है. उन्होंने कहा है कि हमारे गुरु स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती और ब्रह्मलीन स्वामी स्वरुपानंद सरस्वती के बीच कोर्ट में विवाद भी चल रहा था. उन्होंने कहा है कि लेकिन उन बातों पर हमें कोई टिप्पणी नहीं करनी है.

शंकराचार्य विवाद पर किन्नर अखाड़ा ने कहा- हम इसे न तो सही ना गलत कह रहे

उन्होंने कहा कि किन्नर अखाड़ा इन सभी विवादों से पूरी तरह से दूर है. उन्होंने कहा है कि न मैं शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को सही कह रही हूं और ना गलत कह रही हूं. लेकिन चिंता की बात यह है कि प्रशासन को जिस तरह से हैंडल करना चाहिए था नहीं किया गया. उन्होंने कहा है कि सनातन की खिल्ली नहीं उड़नी चाहिए थी. हालांकि इस बात का दुख है कि बटुक ब्राह्मणों की शिखा पड़कर खींचा गया और मारा पीटा गया.

बटुकों के साथ जो कुछ हुआ, इस पर हमें भी नाराजगीः लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी

आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने कहा कि बटुकों के साथ जो कुछ हुआ इस पर हमें भी नाराजगी है. लेकिन कोई अगर किसी परंपरा पर उंगली उठाए तो हमें दुख होता है. इसलिए किन्नर अखाड़े ने यामाई ममता नंद गिरी उर्फ़ ममता कुलकर्णी से दूरी बना ली है. अब वह किन्नर अखाड़े की सदस्य भी नहीं है. किन्नर अखाड़े ने यह निर्णय लिया है कि कई बार कई विषयों पर टिप्पणी करके उन्होंने असहज स्थिति उत्पन्न की.

किन्नर अखाड़ा किसी तरह का विवाद नहीं चाहता

उन्होंने कहा है कि किन्नर अखाड़ा किसी तरह का विवाद नहीं चाहता है. आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी प्रोफेसर डॉक्टर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने कहा है कि हमारे अखाड़े में किन्नर, महिला और पुरुष सब शामिल है. हम चाहते हैं कि सब मिलकर चलें और विवादों में न पड़ें. उन्होंने कहा है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जो अपने आप को शंकराचार्य कहते हैं वह अपना काम जानें. उनके खिलाफ किन्नर अखाड़े की ओर से किसी तरफ की कोई टिप्पणी नहीं की गई है.

ममता कुलकर्णी ने कहा था- शंकराचार्य में काफी अहंकार

उन्होंने कहा है कि किन्नर अखाड़े से कोई टिप्पणी नहीं की गई है और इसी वजह से ममता कुलकर्णी से किन्नर अखाड़े ने दूरी बना ली है. दो दिन पूर्व ही ममता कुलकर्णी ने माघ मेले में अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को लेकर बयान दिया था. कहा था कानून सबके लिए समान है चाहे वह राजा हो या रंक, गुरु हो या शिष्य. केवल चार वेद कंठस्थ कर लेने से कोई शंकराचार्य नहीं बन जाता है, उनमें काफी अहंकार है और आत्मज्ञान शून्य है.

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