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This Article is From Jan 27, 2026

'योगी विरोधी खुशफहमी ना पालें'... अविमुक्तेश्वरानंद मामले पर उमा भारती के एक बयान से दो निशाने

उमा भारती अक्सर पार्टी लाइन से हटकर धर्म और नैतिकता के मुद्दों पर अपनी बात रखती रही हैं. अब उन्होंने दो पोस्ट में अविमुक्तेश्वरानंद मामले पर सधे अंदाज में अपनी बात रख दी है.

'योगी विरोधी खुशफहमी ना पालें'... अविमुक्तेश्वरानंद मामले पर उमा भारती के एक बयान से दो निशाने
  • बीजेपी नेता उमा भारती ने अविमुक्तेश्वरानंद विवाद में प्रशासनिक अधिकारियों पर मर्यादा तोड़ने का आरोप लगाया
  • उमा ने बाद में कहा कि उनका बयान मुख्यमंत्री योगी के खिलाफ नहीं है. उनके प्रति वो सम्मान और स्नेह रखती हैं
  • उमा भारती ने कहा कि शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगना शंकराचार्यों या विद्वत परिषद का अधिकार है

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के विवाद में अब मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी की वरिष्ठ नेता उमा भारती भी उतर आई हैं. पहले उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों पर शंकराचार्य होने का सबूत मांग कर मर्यादा के उल्लंघन का आरोप लगाया. हालांकि इस पर विवाद हुआ तो उन्होंने कहा कि योगी विरोधी खुशफहमी न पालें, मेरा बयान मुख्यमंत्री योगी के खिलाफ नहीं है. 

सीएम योगी से स्नेह, प्रशासन को आईना

उमा भारती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में लिखा, "योगी विरोधी खुशफहमी ना पालें, मेरा कथन योगी जी के विरुद्ध नहीं है, मैं उनके प्रति सम्मान, स्नेह एवं शुभकामना का भाव रखती हूं किंतु मैं इस बात पर कायम हूं कि प्रशासन कानून-व्यवस्था पर सख्ती से नियंत्रण करे लेकिन किसी के शंकराचार्य होने का सबूत मांगना मर्यादा का उल्लंघन है, यह सिर्फ शंकराचार्य या विद्वत परिषद कर सकते हैं." 

प्रशासन पर लगाया मर्यादा तोड़ने का आरोप 

इससे पहले उमा भारती ने पोस्ट में कहा था, "मुझे विश्वास है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज एवं उत्तर प्रदेश सरकार के बीच कोई सकारात्मक समाधान निकल आएगा किंतु प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा शंकराचार्य होने का सबूत मांगना, ऐसा करके प्रशासन ने अपनी मर्यादाओं एवं अधिकारों का उल्लंघन किया है. यह अधिकार तो सिर्फ शंकराचार्यों का और विद्वत परिषद का है."

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उमा भारती के बयान के क्या मायने?

उमा भारती अक्सर पार्टी लाइन से हटकर धर्म और नैतिकता के मुद्दों पर अपनी बात रखती रही हैं. अब उन्होंने अपनी दो पोस्ट में बहुत ही सधे अंदाज में अपनी बात रख दी है. एक तरफ उन्होंने अपनी पार्टी बीजेपी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विरोध की अटकलों को खारिज कर दिया है, तो दूसरी तरफ धर्म और मर्यादा के सवाल पर प्रशासन को कटघरे में भी खड़ा किया है. 

अविमुक्तेश्वरानंद बोले, धरना जारी रहेगा

गौरतलब है कि पिछले 10 दिनों से प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का धरना जारी है. उन्होंने कहा है कि उनका विरोध लगातार जारी रहेगा. माघ मेला पूरा होने पर वह वापस जाएंगे और अगली बार फिर से प्रयागराज में धरने पर बैठेंगे. उनका शिविर प्रवेश तभी होगा, जब ससम्मान संगम स्नान करने दिया जाएगा.

17 जनवरी को मौनी अमावस्या पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती प्रयागराज मेघा मेला में संगम घाट पर स्नान करने पहुंचे थे. लाव-लश्कर के साथ वह अपनी पालकी पर आए थे, लेकिन प्रशासन ने उन्हें बिना रथ के आगे बढ़ने को कहा. इसी बात पर विवाद हो गया. बाद में अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि उनके साथ जानबूझकर यह बर्ताव किया गया. विवाद उस समय बढ़ गया, जब वह माघ मेले में ही धरने पर बैठ गए.

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