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भारत और अमेरिका Vs यूरोपियन यूनियन का व्यापार, आंकड़ों से समझिए क्यों इतना अहम है India EU Trade Deal?

भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत ने एक बड़ी छलांग लगाई है. हालांकि भारत के इस डील से अमेरिका नाराज बताया जा रहा है. ऐसे में यह देखना अहम हैं कि भारत का अमेरिका और यूरोपीय संघ से कारोबार कैसा है?

भारत और अमेरिका Vs यूरोपियन यूनियन का व्यापार, आंकड़ों से समझिए क्यों इतना अहम है India EU Trade Deal?
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के साथ पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप.
  • भारत और EU के बीच मुक्त व्यापार समझौता हुआ है, जिसे 'मदर ऑफ ऑल डील्स' कहा जा रहा है, यह 27 देशों को जोड़ता है.
  • इस डील से भारत का वैश्विक बाजार 200 करोड़ लोगों तक पहुंचेगा और यह दुनिया की 25 प्रतिशत GDP को कवर करेगी.
  • अमेरिका ने भारत-EU डील को लेकर चिंता जताई है और कहा कि इससे रूस-यूक्रेन युद्ध को अप्रत्यक्ष फंडिंग मिलेगी.
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नई दिल्ली:

भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील (India US Trade Deal) पर लंबे समय से बातचीत का दौर जारी है. लेकिन यह डील अभी भी बातचीत तक ही सीमित है. इस बीच मंगलवार को भारत ने यूरोपीय संघ (India EU Trade Deal) के साथ FTA डील कर बड़ी वैश्विक साझेदारी तय कर दिया है. भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए इस डील को 'मदर ऑफ ऑल डील्स' कहा जा रहा है. क्योंकि इस डील से भारत 27 देशों से जुड़ेगा, इससे भारत में निवेश के बड़े अवसर खुलेंगे. EU दुनिया का सबसे बड़ा ट्रेड ब्लॉक है और भारत एक बड़ी अर्थव्यवस्था है. दोनों साथ आएंगे तो 200 करोड़ लोगों का बाजार बनेगा और यह डील दुनिया की 25% GDP को कवर करेगी. मौजूद वैश्विक व्यवस्था में दुनिया अमेरिका और चीन के विकल्प ढूंढ रही है. ऐसे में यह डील भारत को चीन की जगह बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब बना सकती है और यूरोप के साथ व्यापार तेजी से बढ़ेगा.

भारत और यूरोपीए संघ के बीच हुए डील से अमेरिका को लगी मिर्ची

भारत और यूरोपीए संघ के बीच हुए इस डील से अमेरिका का मिर्ची लगी है. डील होने से पहले ही अमेरिका ने चेतावनी देते हुए कहा कि भारत के साथ FTA पर हस्ताक्षर करके यूरोप अपने ही खिलाफ रूसी जंग को फंडिंग दे रहा है. अमेरिकी ट्रेजरी सचिव (वित्त मंत्री) स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यूरोप ने भले रूस के साथ अपने तेल खरीद को महत्वपूर्ण रूप से समाप्त कर दिया है, लेकिन अब वो भारत में रिफाइन हो रहे रूसी तेल उत्पादों को खरीदने की तैयारी में है और इस तरह अप्रत्यक्ष रूप से रूस-यूक्रेन युद्ध को वित्त पोषित (फंडिंग) कर रहे हैं. 

जाहिर है अमेरिका भारत के यूरोपीय संघ के साथ हुए इस डील से नाराज है. इस नाराजगी के बीच यह देखना मौजूं है कि भारत का अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच कितना कारोबार होता है? 
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भारत और अमेरिका के बीच कारोबार

  • वित्त वर्ष 2025 में भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार 132.2 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया. यह दोनों देशों के बीच हुए अब तक के व्यापार का अधिकतम आंकड़ा है. 
  • वित्त वर्ष 2024 में दोनों देशों के बीच यह व्यापार आंकड़ा 119.71 अरब अमेरिकी डॉलर था।
  • वित्त वर्ष 2025 में भारत का अमेरिका के साथ व्यापार अधिशेष (आयात की तुलना में अधिक निर्यात) 40.82 अरब अमेरिकी डॉलर रहा.
  • अमेरिका भारत में तीसरा सबसे बड़ा निवेशक है, जिसने अप्रैल 2000 से मार्च 2025 तक कुल 70.65 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) किया है.

भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग द्वारा 1996 में स्थापित ट्रस्ट इंडिया ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन (IBEF) ने भारत और अमेरिका के बीच हुए कारोबार पर इन आंकड़ों की जानकारी दी है. 

भारत से अमेरिका को होने वाले प्रमुख निर्यात

  • वित्त वर्ष 2024 में भारत का अमेरिका को निर्यात 77.51 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 86.51 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया.
  • वित्त वर्ष 2025 में भारत ने अमेरिका को 7,174 वस्तुओं का निर्यात किया.
  • वित्त वर्ष 2025 में भारत से अमेरिका को निर्यात की गई प्रमुख वस्तुओं में इलेक्ट्रिकल मशीनरी, उपकरण और पुर्जे (15.89 अरब अमेरिकी डॉलर), प्राकृतिक या संवर्धित मोती, कीमती या अर्ध-कीमती पत्थर, प्री-मेटल, प्री-मेटल से लेपित वस्तुएं और अन्य वस्तुएं (9.97 अरब अमेरिकी डॉलर), फार्मास्युटिकल उत्पाद (9.78 अरब अमेरिकी डॉलर), परमाणु रिएक्टर, बॉयलर, मशीनरी और यांत्रिक उपकरण (6.69 अरब अमेरिकी डॉलर), खनिज ईंधन, खनिज तेल और उनके आसवन उत्पाद (4.20 अरब अमेरिकी डॉलर), और लोहे या इस्पात की वस्तुएं (3.11 अरब अमेरिकी डॉलर) शामिल हैं.

भारत द्वारा अमेरिका से किए गए प्रमुख आयात

वित्त वर्ष 2025 में अमेरिका से भारत का आयात बढ़कर 45.69 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया, जो वित्त वर्ष 2024 में 42.19 अरब अमेरिकी डॉलर था.
भारत ने वित्त वर्ष 2025 में अमेरिका से 5,695 वस्तुओं का आयात किया.

वित्त वर्ष 2025 में अमेरिका से भारत के आयात में खनिज ईंधन, खनिज तेल और उनके आसवन उत्पाद (14.34 अरब अमेरिकी डॉलर); प्राकृतिक या संवर्धित मोती, कीमती या अर्ध-कीमती पत्थर, धातु से लेपित धातुएँ और वस्तुएँ (5.31 अरब अमेरिकी डॉलर), परमाणु रिएक्टर, बॉयलर, मशीनरी और यांत्रिक उपकरण (4.42 अरब अमेरिकी डॉलर), विद्युत मशीनरी और उपकरण और पुर्जे (3.38 अरब अमेरिकी डॉलर), आदि शामिल हैं.

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भारत और यूरोपीए संघ के बीच का कारोबार

  • यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है. 
  • वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार 136.53 अरब अमेरिकी डॉलर रहा. 
  • इसमें भारत का निर्यात 75.85 अरब अमेरिकी डॉलर और आयात 60.68 अरब अमेरिकी डॉलर था.
  • इसके अलावा, यूरोपीय संघ भारत में एक बड़ा निवेशक भी है, जिसका अप्रैल 2000 से सितंबर 2024 तक संचयी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) 117.4 अरब अमेरिकी डॉलर रहा है.

यूरोपीय संघ को उम्मीद है कि इस समझौते से 2032 तक भारत को यूरोपीय संघ का निर्यात दोगुना हो जाएगा और शुल्क में सालाना 4 अरब यूरो तक की बचत होगी. मशीनरी पर अभी में 44% तक, रसायनों पर 22% तक और दवाओं पर लगभग 11% तक शुल्क लगता है, उनमें से अधिकांश शुल्क समाप्त कर दिए जाएंगे.

भारत और यूरोपीय संघ की ताकत

  • 25 फीसदी ट्रेड दुनिया का भारत और ईयू में
  • 200 करोड़ आबादी दोनों की
  • 8 लाख भारतीय यूरोपीय संघ में 
  • 100 बिलियन यूरो का व्यापार दोनों देशों में 

ट्रेड डील में खास क्या-क्या?

  • यूरोपीय संघ के सर्जिकल उपकरणों से टैरिफ हटेगा
  • शराब पर टैक्स 150 फीसदी से घटकर 20 फीसदी आएगा
  • 97 फीसदी सामानों पर शुल्क खत्म होगा
  • घटकर 10%  तक आएगा कारों पर टैक्स
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सस्ती होंगी प्रीमियम कारें, शराब सहित अन्य चीजें

भारत और यूरोपीय संघ के बीच ट्रेड डील में ऑटोमोबाइल सेक्टर की बात करें तो भारत धीरे-धीरे यूरोपीय कारों पर टैरिफ घटाकर 10 फीसदी पर लाएगा.इस बदलाव के दौरान सालाना ढाई लाख वाहनों का कोटा लागू रहेगा. यूरोपीय संघ का कहना है कि इससे भारत के प्रीमियम कार बाजार में नई जान आएगी. साथ ही प्रीमियर शराब सहित कई अन्य चीजें भी सस्ती होंगी. 

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