- सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केंद्र सरकार ने क्वीर जोड़ों के अधिकारों की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय समिति बनाई थी
- कैबिनेट सेक्रेटरी की अध्यक्षता वाली समिति की अब तक केवल दो बैठकें हुईं, जिसकी रिपोर्ट अभी तक पेश नहीं हुई
- समिति का मकसद भेदभाव रोकना, स्वास्थ्य सेवा सुधारना और क्वीर समुदाय के कल्याणकारी लाभों को सुनिश्चित करना है
सुप्रीम कोर्ट के साल 2023 में समलैंगिक विवाह पर आए फैसले के बाद, क्वीर जोड़ों से जुड़े भेदभाव, कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंच, स्वास्थ्य सेवा और अन्य अधिकारों की समीक्षा के लिए कैबिनेट सेक्रेटरी की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई थी.लोकसभा में मंगलवार को केंद्र सरकार ने बताया कि क्वीर जोड़ों के अधिकारों और सुविधाओं की समीक्षा के लिए बनाई गई उच्च-स्तरीय सरकारी कमेटी की बैठक अब तक सिर्फ दो बार ही हुई है, जबकि कमेटी को बने दो साल से ज्यादा समय हो गया है. कैबिनेट सेक्रेटरी की अध्यक्षता वाले इस पैनल ने अपनी रिपोर्ट अभी तक नहीं सौंपी है. सरकार ने इसके लिए कोई संभावित तारीख भी नहीं बताई है.
आखिरी रिकॉर्ड की गई बैठक करीब दो साल पहले हुई
कांग्रेस सांसद शशि थरूर को दिए एक लिखित जवाब में सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा ने बताया कि कमेटी की बैठकें 21 मई और 22 अगस्त, 2024 को हुई थीं.4 अगस्त, 2026 के जवाब में पूरी कमेटी की बाद में किसी भी बैठक का जिक्र नहीं है.मतलब यह कि आखिरी रिकॉर्ड की गई बैठक करीब दो साल पहले हुई थी.
दरअसल शशि थरूर ने पैनल के काम, उसकी स्थिति, बैठकों की संख्या, देरी की वजहों और उसकी रिपोर्ट के लिए संभावित समय-सीमा के बारे में जानकारी मांगी थी. इस पर केंद्र ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने समिति बनाने का निर्देश देने के समय कोई खास समय-सीमा तय नहीं की थी. जवाब में दूसरी बैठक के बाद के अंतराल के बारे में अलग से कोई जानकारी नहीं दी गई और न ही यह बताया गया कि पैनल अगली बैठक कब करेगा.
क्यों बनाई गई थी समिति?
इस पैनल का काम सिर्फ समलैंगिक विवाहों को कानूनी मान्यता देने के सवाल तक ही सीमित नहीं है.उम्मीद जताई गई कि यह ऐसे कदमों की सिफारिश करेगा जिन्हें केंद्र और राज्य सरकारें उठा सकती हैं. ताकि यह पक्का हो सके कि क्वीर समुदाय के लोगों को सामान और सेवाएं लेते समय कोई भेदभाव न झेलना पड़े.
ये समिति हिंसा, उत्पीड़न और जबरदस्ती के खिलाफ सुरक्षा उपायों की भी जांच करेगी. साथ ही क्वीर लोगों को बिना उनकी मर्जी के मेडिकल इलाज या सर्जरी से रोकने के उपायों पर भी विचार करेगी. बिना भेदभाव के मानसिक स्वास्थ्य देखभाल और सामाजिक-कल्याण लाभ और अधिकारों उन तक पहुंचें, ये भी समिति के काम का हिस्सा है. पैनल क अगर जरूरी लगता है तो वह अन्य संबंधित मामले पर भी विचार कर सकता है. इस समिति का गठन औपचारिक रूप से 16 अप्रैल, 2024 को किया गया था, जो समलैंगिक विवाहों को कानूनी मान्यता देने की याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट के अक्टूबर 2023 के फैसले के बाद बनी थी.
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की संविधान पीठ ने स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत समलैंगिक विवाह को शामिल करने से इनकार कर दिया था. हालांकि, कोर्ट ने सरकार के इस आश्वासन को दर्ज किया कि कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली समिति क्वीर जोड़ों को मिलने वाले अधिकारों और सुविधाओं के दायरे की जांच करेगी. इस पैनल में कैबिनेट सचिव अध्यक्ष हैं. वहीं गृह, महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य, विधायी मामलों और सामाजिक न्याय विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी इसमें शामिल हैं.
राशन कार्ड और संयुक्त बैंक खाते
हालांकि रिपोर्ट अभी लंबित है. केंद्र ने अलग-अलग विभागों द्वारा उठाए गए कई अंतरिम कदमों की लिस्ट दी है. राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सलाह दी गई है कि राशन कार्ड के मकसद से क्वीर रिश्ते में रहने वाले कपल को एक ही परिवार का सदस्य माना जा सकता है. ये भी सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि राशन कार्ड जारी करते समय क्वीर पार्टनर के साथ भेदभाव न हो.
बैंकिंग के मामले में, डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज ने साफ किया है कि क्वीर समुदाय के सदस्यों के जॉइंट बैंक अकाउंट खोलने पर कोई रोक नहीं है. संसदीय जवाब में कहा गया है कि अकाउंट होल्डर अपनी मौत के बाद अकाउंट में बची रकम पाने के लिए अपने क्वीर पार्टनर को नॉमिनी भी बना सकता है.
हेल्थकेयर, कन्वर्जन थेरेपी और मानसिक सेहत
केंद्र की तरफ से बताए गए अंतरिम कदमों का एक बड़ा हिस्सा हेल्थकेयर से जुड़ा है.स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और दूसरे संबंधित पक्षों से कहा है कि वे LGBTQIA+ लोगों के हेल्थकेयर अधिकारों की सुरक्षा के लिए कदम उठाएं.इनमें जागरूकता कार्यक्रम, कन्वर्जन थेरेपी पर रोक, सरकारी दस्तावेज में जिसे "सेक्स रीअसाइनमेंट सर्जरी" कहा गया है उसकी उपलब्धता, मेडिकल और एजुकेशनल सिलेबस में बदलाव, टेली-कंसल्टेशन सेवाएं और हेल्थकेयर वर्करों को संवेदनशील बनाना और ट्रेनिंग देना शामिल है.
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज ने राज्य के हेल्थ डिपार्टमेंट्स से अलग से कहा है कि वे हेल्थकेयर तक पहुंच बेहतर बनाएं और इस समुदाय के साथ भेदभाव कम करें.मंत्रालय ने ऐसे प्रावधान भी मांगे हैं जिनसे किसी क्वीर पार्टनर को उस व्यक्ति का शव लेने का अधिकार मिल सके जिसकी मौत हो गई है, वो भी ऐसी स्थिति में जब उसके करीबी रिश्तेदार या परिवार का सदस्य वहां मौजूद न हो.
दो बैठकें, अलग-अलग बातचीत
कमेटी ने मई 2024 में अपनी पहली बैठक में राशन कार्ड, जॉइंट बैंक अकाउंट, नॉमिनेशन की सुविधा और जेंडर आइडेंटिटी या सेक्सुअल ओरिएंटेशन से जुड़े उत्पीड़न पर चर्चा की.होम सेक्रेटरी की अध्यक्षता वाली एक सब-कमेटी ने 31 मई 2024 को कल्याणकारी लाभों, हेल्थकेयर, सार्वजनिक सेवाओं, पुलिस की कार्रवाई, जेल में मिलने के अधिकार और हिंसा से सुरक्षा पर चर्चा करने के लिए अलग से बैठक की.
25 जुलाई को LGBTQIA+ समुदाय, केंद्रीय मंत्रालयों और राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों के साथ स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन (हितधारकों के साथ बातचीत) हुई. पूरी कमेटी की दूसरी बैठक 22 अगस्त को हुई, जिसमें उसने मंत्रालयों द्वारा की गई कार्रवाई की समीक्षा की और उन्हें क्वीर समुदाय से जुड़ी एडवाइज़री जारी करने का निर्देश दिया. सब-कमेटी की बैठक और स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन, हाल ही में संसद में दिए गए जवाब में दर्ज पूरी कमेटी की दो बैठकों से अलग थे.
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