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This Article is From Apr 07, 2026

केरल के थाने Vs झारखंड के थाने, सुप्रीम कोर्ट क्यों कह रहा दक्षिण के इस राज्य से सीखो

सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस थानों में CCTV की कमी पर केंद्र सरकार को फटकार लगाई और केरल के मॉडल को बेंचमार्क माना. झारखंड के 606 थानों में CCTV कैमरे लगाने का काम अभी शुरू नहीं हुआ है, सुप्रीम कोर्ट ने इसे गंभीर कमी बताया है.

केरल के थाने Vs झारखंड के थाने, सुप्रीम कोर्ट क्यों कह रहा दक्षिण के इस राज्य से सीखो
  • झारखंड के 606 पुलिस थानों में लगभग 8854 सीसीटीवी कैमरे लगाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है
  • सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड जैसे राज्यों में थानों में CCTV कैमरों की कमी को गंभीर माना और केंद्र को फटकार लगाई
  • केरल ने सभी पुलिस थानों में लाइव वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग के साथ उच्च तकनीक सीसीटीवी नेटवर्क विकसित किया है

देशभर के पुलिस स्‍टेशनों को सीसीटीवी से लैस करने की योजना को लाए हुए काफी समय हो चुका है. हालांकि, देश के कई राज्‍य हैं, जहां के थानों में अभी तक सीसीटीवी लगाने का काम शुरू भी नहीं हुआ है. थानों में सीसीटीवी कैमरों की खराब स्थिति और निगरानी में ढिलाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया और केंद्र सरकार को फटकार लगाई. झारखंड सरकार की सुस्‍ती का आलम तो ये है कि यहां अधिकतर थानों में सीसीटीवी लगाने का काम अभी शुरू भी नहीं हुआ है. हालांकि, अदालत ने केरल के पुलिस थानों में एडवांस सीसीटीवी कैमरों की तारीफ की और जस्टिस नाथ ने सवाल उठाया- अगर केरल का सिस्टम इतना अच्छा है, तो बाकी राज्य इसे क्यों नहीं अपना रहे? 

झारखंड के थानों में क्‍यों नहीं CCTV?

मामले की सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि झारखंड में तो अभी तक CCTV लगाने का काम शुरू भी नहीं हुआ है, जिसे कोर्ट ने गंभीर कमी माना है. बताया जा रहा है कि झारखंड के थानों को CCTV कैमरों से लैस करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है. राज्‍य के 606 पुलिस थानों में लगभग 8854 CCTV कैमरे लगाए जाने हैं. ये कैमरे थानों के प्रवेश, निकास, लॉकअप, गलियारे और पूछताछ कक्ष में लगाए जा रहे हैं. थानों में लगाए जा रहे कैमरों में नाइट विजन और ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की सुविधा है. झारखंड के थानों में 2 फेज में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने हैं. पहले फेज में 334 थानों में 5268 कैमरे लगाए जाने का प्रस्‍ताव है. झारखंड हाई कोर्ट ने पिछले साल राज्य के थानों में आम जनता से दुर्व्यवहार, मानवाधिकार हनन आदि की शिकायतों के बाद थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की अनिवार्यता को आवश्यक बताते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि सभी थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाएं. लेकिन इसके बावजूद अभी तक थानों में सीसीटीवी क्‍यों नहीं लगे, इसका जवाब अधिकारी टालते हुए नजर आते हैं.

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CCTV को लेकर ये सुस्‍ती क्‍यों? 

सुप्रीम कोर्ट ने केरल के थानों को देश के लिए 'बेंचमार्क' माना है और झारखंड जैसे राज्‍यों में थानों में सीसीटीवी को लेकर बरती जा रही सुस्‍ती को गंभीर बताया है. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने नाराजगी जताते हुए केंद्र सरकार के गृह सचिव (Home Secretary) को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में तलब किया है. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सख्‍त लहजे में कहा- कल होम सेक्रेटरी को कोर्ट लेकर आइए.' 

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सुप्रीम कोर्ट ने केरल को 'बेंचमार्क' क्यों माना? 

केरल ने अपने सभी 500 से अधिक पुलिस स्टेशनों में एक ऐसा नेटवर्क तैयार किया है, जो केवल रिकॉर्डिंग तक सीमित नहीं है. केरल में जिला पुलिस प्रमुख (SP) और वरिष्ठ अधिकारी अपने स्मार्टफोन पर एक सुरक्षित ऐप के जरिए किसी भी थाने के CCTV फुटेज को लाइव (LIVE) देख सकते हैं. राज्य स्तर पर एक मुख्य डैशबोर्ड बनाया गया है, जहां से तिरुवनंतपुरम में बैठा उच्च अधिकारी राज्य के किसी भी कोने के थाने की गतिविधियों पर नजर रख सकता है. केरल के सिस्टम में केवल वीडियो ही नहीं, बल्कि हाई-क्वालिटी ऑडियो रिकॉर्डिंग की भी सुविधा है, जिससे पुलिस और जनता के बीच होने वाली बातचीत को स्पष्ट सुना जा सकता है. देश का शायद ही कोई दूसरा राज्‍य है, जहां के पुलिस स्‍टेशनों का 'रियल-टाइम' मॉनिटरिंग सिस्टम इतना हाईटैक है. इसीलिए सुप्रीम कोर्ट ने केरल के थानों को बेंचमार्क माना है.

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