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This Article is From Jun 07, 2025

अंतरिक्ष जा रहा भारत का लाल, एक्सिओम-4 के ग्रुप कैप्टन को लेकर चीफ एस्ट्रोनॉट ने किया बड़ा दावा

भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला और तीन अन्य 10 जून को फ्लोरिडा स्थित नासा के कैनेडी अंतरिक्ष केंद्र से एक्सिओम स्पेस की चौथी मानव अंतरिक्ष उड़ान पर रवाना होंगे और लगभग 28 घंटे की यात्रा के बाद 11 जून को भारतीय समयानुसार रात लगभग 10 बजे अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर पहुंचने की संभावना है.

अंतरिक्ष जा रहा भारत का लाल, एक्सिओम-4 के ग्रुप कैप्टन को लेकर चीफ एस्ट्रोनॉट ने किया बड़ा दावा

एक्सिओम-4 मिशन 10 जून को निर्धारित है. इसके प्रक्षेपण में अब कुछ ही दिन बचे हैं. चार दशकों से अधिक समय के बाद ये किसी भारतीय को अंतरिक्ष में ले जाएगा, इसलिए उत्साह स्पष्ट है. भारतीय वायुसेना के सम्मानित पायलट ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला स्पेसएक्स के फाल्कन 9 क्रू ड्रैगन पर मिशन पायलट के रूप में उड़ान भरने के लिए तैयार हैं. उन्हें अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पहुंचना है. इस स्पेशल यात्रा के लिए उनका उत्साहवर्धन करने वाले कोई और नहीं बल्कि एक्सिओम स्पेस के चीफ एस्ट्रोनॉट और चार अंतरिक्ष उड़ानों के अनुभवी माइकल लोपेज़-एलेग्रिया हैं. 

लोपेज़-एलेग्रिया ने शुक्ला के कॉल साइन का उपयोग करते हुए गर्मजोशी और आत्मविश्वास से भरे संदेश में कहा, "शक्स, आपको और बाकी क्रू को शुभकामनाएं. इसका आनंद लें." 

शुभांशु शुक्ला को लेकर क्या बोले 

शुक्ला ने लोपेज़-एलेग्रिया के मार्गदर्शन में एक्सिओम स्पेस में लगभग एक साल का प्रशिक्षण लिया है, जिसमें कठोर सिमुलेशन, आपातकालीन अभ्यास और मिशन रिहर्सल शामिल हैं. नासा के पूर्व अंतरिक्ष यात्री लोपेज़-एलेग्रिया ने अंतरिक्ष में 257 दिनों से अधिक समय बिताया है. उन्होंने शुक्ला को करीब से देखा है और उनका आकलन स्पष्ट है. उन्होंने कहा, "उन्हें थोड़ा दबाव महसूस होगा. गति के साथ बने रहने के लिए उन्हें बहुत तनाव होगा, क्योंकि यह बहुत तेज़ है, लेकिन वह बहुत अच्छी तरह से प्रशिक्षित हैं. वह बहुत अच्छा करेंगे."

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एक्सिओम-4 मिशन भारत की मानव अंतरिक्ष उड़ान महत्वाकांक्षाओं के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है. विंग कमांडर राकेश शर्मा 1984 में सोवियत सोयुज पर सवार होकर अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय बने. शुक्ला दूसरे होंगे. उनका मिशन आईएसएस के लिए कॉमर्शियल चालक दल की उड़ान में भारत की पहली भागीदारी है. इसे भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित किया जाता है, जो अंतरिक्ष में सरकार समर्थित अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के एक नए युग का संकेत देता है.

NDTV ने लोपेज़ एलेग्रिया से पूछा कि क्या शुक्ला एक बेहतरीन अंतरिक्ष यात्री साबित होंगे? उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के जवाब दिया, "मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि वे बेहतरीन प्रदर्शन करेंगे."

शुभांशु शुक्ला के साथ और कौन जाएगा

मिशन पायलट के रूप में, शुक्ला क्रू ड्रैगन अंतरिक्ष यान पर महत्वपूर्ण संचालन के लिए जिम्मेदार होंगे और ISS पर वैज्ञानिक प्रयोगों में सहायता करेंगे. उनके साथियों में हंगरी, पोलैंड और संयुक्त राज्य अमेरिका के अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं, जो इसे वास्तव में एक वैश्विक मिशन बनाते हैं.

NDTV ने पूछा, "क्या उनके लिए सुखद लैंडिंग होगी?" लोपेज़-एलेग्रिया ने मुस्कुराते हुए कहा, "हैप्पी स्प्लैशडाउन." वो 14-दिवसीय मिशन के अंत में चालक दल की प्रतीक्षा कर रहे समुद्र में उतरने का जिक्र कर रहे थे.

फ्लोरिडा में नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से होने वाले प्रक्षेपण पर न केवल भारत के अंतरिक्ष समुदाय की बल्कि लाखों भारतीयों की भी नज़र रहेगी, जो  शुक्ला को राष्ट्रीय गौरव और आकांक्षा का प्रतीक मानते हैं.

लोपेज़-एलेग्रिया ने खुशी से कहा, "गो फाल्कन 9. गो क्रू ड्रैगन. गो ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला." 

जैसे-जैसे भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम गति पकड़ रहा है - गगनयान, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और क्षितिज पर चंद्रमा की लैंडिंग के साथ शुक्ला का मिशन सिर्फ़ एक उड़ान से कहीं ज़्यादा है. यह एक स्टेटमेंट है: भारत सितारों के बीच अपनी जगह बनाने के लिए तैयार है.

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