- इसरो ने नेविगेशन सैटेलाइट एनवीएस-03 को सफलतापूर्वक लॉन्च किया है जिससे नाविक सिस्टम मजबूत होगा
- भारतीय सेनाओं को अब अमेरिकी और रूसी नेविगेशन सिस्टम की बजाय स्वदेशी जीपीएस सुविधा उपलब्ध होगी
- इसरो इस वित्तीय वर्ष में पांच और मिशन लॉन्च करेगा, जिसमें गगनयान मिशन और कई छोटे उपग्रह भी शामिल हैं
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शुक्रवार को अपने नेविगेशन सैटेलाइट ‘एनवीएस-03' की सफल लॉन्चिंग की. इसमें स्वदेशी और बाहर से खरीदी गई परमाणु घड़ियां लगी हैं. इससे देश की अपनी सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम ‘नाविक' को मजबूती मिलेगी. ‘नाविक' जीपीएस का इंडियन वर्जन है, जो देश और उसके आसपास 1,500 किलोमीटर के दायरे तक फैला है. इससे भारतीय सेनाओं को भी फायदा मिलेगा. उन्हें देसी जीपीएस सिस्टम मिल जाएगा.
अभी तक नेविगेशन सिस्टम के लिए सेनाएं अमेरिकी जीपीएस और मिसाइल नेविगेशन के लिए रूसी GLONASS पर निर्भर थी. 1999 के कारगिल युद्ध में भारतीय सेनाओं को नेविगेशन सिस्टम की कमी महसूस हुई थी. ये देश की सीमाओं से 1500 किलोमीटर दूर से नेविगेशन में मदद कर सकता है.
अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा, “ये उपग्रह आयातित परमाणु घड़ियों के साथ-साथ स्वदेश में विकसित परमाणु घड़ी से भी लैस है. इसमें मौजूदा एल5/एस संकेतों के अलावा एल1 संकेत भी शामिल हैं. इससे भारतीय भूभाग और देश की भू-राजनीतिक सीमा से 1,500 किलोमीटर तक फैले क्षेत्र में नौवहन सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी.”
पहले से ही तीन उपग्रह सफलतापूर्वक काम कर रहे थे. अब ‘एनवीएस-03' के शामिल होने से पोजिशनिंग, नेविगेशन और टाइमिंग सर्विस फिर से बहाल हो गई हैं. ‘नाविक' उपग्रह समूह एक सामरिक राष्ट्रीय संपत्ति है जो स्थिति निर्धारण, नौवहन और समय संबंधी सेवाओं तक स्वतंत्र पहुंच उपलब्ध कराता है.

50 मीटर लंबे जीएसएलवी-एफ18 रॉकेट ने 24 घंटे की उलटी गिनती पूरी होने के बाद निर्धारित समय के अनुसार रात 11 बजकर 51 मिनट सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे प्रक्षेपण स्थल से आसमान की ओर उड़ान भरी. ये 420 टन वजन वाला तीन चरणों का रॉकेट लगभग 2,232 किलोग्राम वजनी एनवीएस-03 उपग्रह को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर आर्बिट में स्थापित करने के अभियान पर है.
इसरो के अनुसार, ‘एनवीएस-03' अगली पीढ़ी की नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम का तीसरा उपग्रह है. इसे आईआरएनएसएस सीरीज के तहत दी जाने वाली नेविगेशन सर्विस की निरंतरता बनाए रखने के लिए तैयार किया गया है.
हालांकि, निरंतर सेवा और सटीक पोजिशनिंग सुनिश्चित करने के लिए, कक्षा में कुल सात उपग्रह स्थापित करने होंगे. दो और उपग्रह अभी तैयार होने के अंतिम चरण में हैं, और एक उपग्रह को मंजूरी मिलने की प्रक्रिया चल रही है. इसके साथ ही, भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जिनके पास अपना खुद का नेविगेशन सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन (उपग्रह समूह) है.
'गगनयान' एक बहुत ही प्रतिष्ठित और महत्वपूर्ण, तकनीक-प्रधान कार्यक्रम है. इसका उद्देश्य हमारे अपने लॉन्च व्हीकल का उपयोग करके हमारे अपने अंतरिक्ष यात्रियों (गगन यात्रियों) को अंतरिक्ष में भेजना है. अब तक हम 8,000 से अधिक परीक्षण पूरे कर चुके हैं. वास्तविक मानव को अंतरिक्ष में भेजने से पहले, तीन ऐसे मिशन पूरे करने हैं जिनमें कोई इंसान नहीं होगा. इसके लिए एलपीएस के डायरेक्टर ने कई सिस्टम तैयार किए हैं. कई सिमुलेशन टेस्ट किए जा रहे हैं.
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