पिछले कई हफ्तों से पूर्वी उत्तर प्रदेश की सड़कों पर 308 पहियों वाला एक विशाल ट्रक लोगों के लिए कौतूहल बना हुआ है. ट्रक पर करीब 164 टन की भारी मशीन लदी है और इसकी रफ्तार इतनी कम है कि कई बार यह पूरे दिन में सिर्फ 10 से 20 किलोमीटर ही आगे बढ़ पाता है.लेकिन जितना खास यह ट्रक है, उतनी ही दिलचस्प वह जगह है जहां इसे पहुंचना है. यह विशाल मशीन लखीमपुर खीरी के कुंभी में बन रहे उस प्लांट के लिए जा रही है, जहां गन्ने और चीनी से प्लास्टिक बनाने की तैयारी है. बलरामपुर चीनी मिल्स का कहना है कि यह देश में अपनी तरह का पहला बड़ा प्लांट होगा. इस प्रोजेक्ट पर चरणबद्ध तरीके से करीब 3,080 करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है और यहां हर साल करीब 75 हजार टन उत्पादन की क्षमता होगी.
आखिर कहां जा रहा 308 पहियों वाला 'महाबली'?
इस विशाल वाहन की मंजिल लखीमपुर खीरी का कुंभी है. यहां बलरामपुर चीनी मिल्स अपने मौजूदा चीनी कारखाने के पास एक नया प्लांट बना रही है.खास बात यह है कि यहां गन्ने और चीनी से मिलने वाले कच्चे माल से ऐसा पदार्थ बनाया जाएगा, जिससे प्लास्टिक के कई सामान तैयार हो सकेंगे.

308 Wheels Truck India: यही है वो बाहुबली ट्रक है जो विशाल रिएक्टर लेकर लखीमपुर खीरी स्थित बलरामपुर चीनी मिल ज रहा है.
कंपनी इसे देश का पहला औद्योगिक स्तर का PLA प्लांट बता रही है.308 पहियों वाले वाहन पर लदा विशाल रिएक्टर इसी प्लांट में लगाया जाना है. यानी सड़कों पर लोगों का ध्यान खींच रहा यह महाबली एक ऐसे प्रोजेक्ट की मशीन लेकर जा रहा है, जहां गन्ने का इस्तेमाल सिर्फ चीनी या एथेनॉल बनाने के लिए नहीं होगा.
गन्ने से आखिर कैसे बनेगा प्लास्टिक?
सवाल उठता है कि गन्ने से प्लास्टिक कैसे बनाया जाएगा? दरअसल इस प्लांट में चीनी और उससे मिलने वाले कच्चे माल का इस्तेमाल किया जाएगा. इसे कई चरणों में प्रोसेस करके पॉलीलैक्टिक एसिड यानी PLA तैयार किया जाएगा. आसान भाषा में कहें तो PLA एक ऐसी सामग्री है, जिसका इस्तेमाल प्लास्टिक के कई सामान बनाने में किया जा सकता है. कंपनी इसे आम प्लास्टिक के विकल्प के तौर पर पेश कर रही है. प्रोसेसिंग पूरी होने के बाद प्लास्टिक जैसे छोटे-छोटे दाने तैयार होंगे. इन्हीं दानों से अलग-अलग चीजें बनाई जा सकेंगी.
इस प्लास्टिक प्लांट की खासियत क्या होगी?
सड़कर मिट्टी में मिल जाएगी बोतल: पारंपरिक प्लास्टिक जहां हजारों सालों तक धरती को प्रदूषित करती है, वहीं इस प्लांट में गन्ने से बनने वाले कैरी बैग, कप, बोतलें और प्लेट्स इस्तेमाल के बाद फेंकने पर महज 3 से 6 महीनों के भीतर प्राकृतिक रूप से मिट्टी में गलकर खत्म हो जाएंगी .
पूरी तरह से रिन्यूएबल एनर्जी से चलेगा प्लांट: पर्यावरण को समर्पित यह देश का पहला ऐसा इंडस्ट्रियल प्लांट होगा जो अपनी पूरी उत्पादन प्रक्रिया के लिए 100% क्लीन एनर्जी का उपयोग करेगा .
जीरो लिक्विड डिस्चार्ज तकनीक: इस प्लांट से निकलने वाले किसी भी कचरे या पानी को बाहर नहीं बहाया जाएगा, जिससे आसपास के जल स्रोत पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे
अब गन्ने से सिर्फ चीनी और एथेनॉल ही नहीं
उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में है. अभी गन्ने का नाम आते ही सबसे पहले चीनी, गुड़, शीरा और एथेनॉल जैसी चीजें दिमाग में आती हैं. लखीमपुर खीरी में बन रहा यह प्लांट गन्ने के इस्तेमाल में एक नया रास्ता खोल सकता है. यहां गन्ने और चीनी उद्योग से मिलने वाले कच्चे माल का इस्तेमाल प्लास्टिक का विकल्प तैयार करने में किया जाएगा.यानी खेत में पैदा होने वाला गन्ना चीनी मिल तक पहुंचेगा और उसी से मिलने वाले कच्चे माल का इस्तेमाल आगे ऐसे उत्पाद बनाने में हो सकेगा, जिनका इस्तेमाल रोजमर्रा के प्लास्टिक के सामान की जगह किया जा सकता है.
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3,080 करोड़ का प्रोजेक्ट, हर साल 75 हजार टन उत्पादन
इस प्लांट का आकार भी काफी बड़ा है. बलरामपुर चीनी मिल्स के मुताबिक इस नए कारोबार में अलग-अलग चरणों में करीब 3,080 करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है.प्लांट की सालाना उत्पादन क्षमता करीब 75 हजार टन होगी. इसे कंपनी के मौजूदा चीनी कारखाने के पास बनाया जा रहा है. इससे वहां पहले से मौजूद कुछ सुविधाओं का भी इस्तेमाल किया जा सकेगा.
इससे क्या-क्या बनाया जा सकेगा?
यहां बनने वाले PLA से रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक के कई सामान के विकल्प तैयार किए जा सकते हैं. इनमें स्ट्रॉ, कटलरी,खाने की ट्रे और बोतलों जैसे उत्पाद शामिल हैं.आम प्लास्टिक को बनाने में बड़े पैमाने पर पेट्रोलियम से मिलने वाले कच्चे माल का इस्तेमाल होता है. इसके उलट यहां तैयार होने वाले PLA के लिए गन्ने और चीनी उद्योग से मिलने वाले कच्चे माल का इस्तेमाल किया जाएगा.यही बात इस पूरे प्रोजेक्ट को खास बनाती है. कोशिश ऐसी सामग्री तैयार करने की है, जो रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक की कई चीजों की जगह ले सके. इसलिए असली कहानी 308 पहिए वाला ट्रक नहीं बल्कि उसकी मंजिल है. इस पर लदा रिएक्टर लखीमपुर खीरी में बन रहे उस प्लांट का हिस्सा बनेगा, जहां गन्ने और चीनी से प्लास्टिक का विकल्प तैयार करने की योजना है. यानी जिस गन्ने को अब तक लोग मुख्य रूप से चीनी, गुड़ और एथेनॉल से जोड़कर देखते आए हैं, उसी गन्ने का इस्तेमाल अब प्लास्टिक बनाने की दिशा में भी होने जा रहा है.
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