308 पहियों वाला विशालकाय 'बाहुबली ट्रक'अब उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले को पार करके गोंडा और अयोध्या के रास्ते अपनी अंतिम मंजिल लखीमपुर खीरी की ओर बढ़ रहा है. लेकिन तीन मंजिला मकान जितनी ऊंचाई वाले इस ट्रक को सुरक्षित निकालने के लिए बस्ती में 7 पावर सब स्टेशनों से बिजली बंद करनी पड़ी, जिससे कई इलाकों में घंटों बिजली गुल रही. रास्ते में आ रहे बिजली के तार काटने पड़े, जबकि कई जगह पेड़ भी हटाए गए. भारी-भरकम ट्रक के गुजरने के दौरान ट्रैफिक भी प्रभावित हुआ और इसे देखने के लिए सड़कों के किनारे लोगों की भीड़ जमा हो गई. 200 टन की भारी मशीन को लेकर चल रहे इस महाबली ट्रक को बस्ती की सीमा पार कने में 24 घंटे से ज्यादा का वक्त लगा.
7 पावर स्टेशनों की बिजली करनी पड़ी बंद
'बाहुबली' ट्रक की सबसे बड़ी चुनौती इसकी ऊंचाई है. ट्रक और उस पर रखी मशीन की जमीन से कुल ऊंचाई करीब 8 मीटर है. यानी मोटे तौर पर तीन मंजिला मकान जितनी. ऐसे में बस्ती से गुजरने के दौरान ऊपर से गुजर रहे बिजली के तार इसके रास्ते में आ गए.ट्रक को सुरक्षित निकालने के लिए बिजली विभाग को कई जगह तार काटने पड़े. सुरक्षा को देखते हुए इलाके के 7 पावर सब स्टेशनों से सप्लाई बंद कर दी गई, जिससे बड़े इलाके में घंटों बिजली नहीं रही. ट्रक के निकलने के दौरान बिजली विभाग, NHAI और पुलिस की टीमें भी मौके पर मौजूद रहीं.

308 Wheels Truck: 8 मीटर ऊंचा और 41 मीटर लंबा ये ट्रक जहां से भी गुजर रहा है वहां लोगों की भीड़ जुट रही है.
Photo Credit: सतीश श्रीवास्तव
एक चौराहा पार करने में लग गए साढ़े 3 घंटे
308 पहियों वाले इस ट्रक के लिए बस्ती से निकलना आसान नहीं था. इसकी विशाल ऊंचाई और चौड़ाई के कारण कहीं बिजली के तार रास्ते में आए तो कहीं पेड़ बाधा बने. रिपोर्ट के मुताबिक ट्रक के लिए रास्ता साफ करने के दौरान पेड़ काटे गए और ट्रैफिक भी रोका गया. हालत यह है कि इस भारी-भरकम वाहन के लिए कई जगह अलग से रास्ते तक तैयार करने पड़े हैं. टोल प्लाजा से गुजरने के लिए भी बाईपास या कच्चे रास्तों का सहारा लेना पड़ा.
बस्ती के पॉलीटेक्निक चौराहे पर ही इस ट्रक को निकालने में करीब साढ़े तीन घंटे लग गए. यहां तारों को व्यवस्थित करने और रास्ता सुरक्षित बनाने के बाद काफिले को आगे रवाना किया जा सका. किसी तकनीकी परेशानी से निपटने के लिए दो बड़ी क्रेन भी इसके साथ चल रही हैं.इस पूरे ऑपरेशन में बिजली विभाग के दो SDO, करीब आधा दर्जन जूनियर इंजीनियर, NHAI के कर्मचारी और स्थानीय पुलिस जुटी रही.
308 पहिए, 41 मीटर लंबाई और रफ्तार सिर्फ 5-8 किमी
इस ट्रक के आंकड़े ही इसकी विशालता बताने के लिए काफी हैं. इसमें कुल 308 पहिए हैं. इसकी लंबाई करीब 41 मीटर और चौड़ाई करीब 7 मीटर है. जमीन से इसकी ऊंचाई लगभग 8 मीटर है. इतने बड़े काफिले की रफ्तार भी सिर्फ 5 से 8 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है.करीब 50 लोगों की विशेष टीम इस ट्रक के साथ चल रही है. टीम का काम रास्ते में आने वाली तकनीकी और सुरक्षा से जुड़ी परेशानियों को संभालना है. दो बड़ी क्रेन भी काफिले का हिस्सा हैं.
ये भी पढ़ें: पहले IPS, फिर DGP और अब पार्षद... आर श्रीलेखा क्यों बोलीं- कांस्टेबल जैसी हो गई हालत
आखिर 308 पहियों पर जा क्या रहा है?
इस विशाल ट्रेलर पर बेल्जियम से भारत लाई गई करीब 200 टन की भारी मशीनरी रखी है. इसे समुद्री रास्ते से ओडिशा के पारादीप बंदरगाह लाया गया और वहां से 308 पहियों वाले खास हाइड्रोलिक ट्रेलर पर लादकर सड़क के रास्ते उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी के लिए रवाना किया गया. इसे बलरामपुर चीनी मिल के नए बायोप्लास्टिक प्लांट तक पहुंचाया जाना है. यह ट्रक काफी समय से सफर पर है.15 मई 2026 को यह पारादीप बंदरगाह से रवाना हुआ था. उत्तर प्रदेश में पहुंचने के बाद यह चंदौली, वाराणसी, गाजीपुर, मऊ, गोरखपुर और संतकबीरनगर होते हुए बस्ती पहुंचा.अब यह बस्ती को पार कर चुका है और गोंडा व अयोध्या के रास्ते लखीमपुर खीरी की ओर बढ़ रहा है.
ये भी पढ़ें: एक था जंतर-मंतर... वक्त नापने के लिए बना, फिर बताने लगा देश की नब्ज…अब यहां धरना मना है !
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं