- वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने छात्र आंदोलन को हर पीढ़ी की विरासत बताते हुए उसकी भावना का सम्मान किया
- उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रदर्शन को रोकने की बजाय अनुमति दी और समय पर जवाबदेही निभाई है
- री-एग्जाम समय पर कराए गए ताकि छात्रों का शैक्षणिक वर्ष प्रभावित न हो, इसके बाद शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा दिया
एनडीटीवी प्रॉफिट बिजनेस लीडरशिप अवार्ड्स 2026 में शामिल होने पहुंचीं केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने छात्रों के प्रदर्शन सहित कई मुद्दों पर खुलकर बात की. एनडीटीवी के एडिटर इन चीफ राहुल कंवल से बात करते हुए वित्त मंत्री ने छात्र आंदोलन पर कहा कि मुझे लगता है कि इसने हमें महसूस कराया कि हमें जवाब देना था और हमने अपने युवाओं की आवाज का जवाब दिया, जो एक जिम्मेदार सरकार के लिए उचित है. इसलिए हमारी प्रतिक्रिया सही थी.
आंदोलन को लेकर निर्मला सीतारमण ने कहा कि हर पीढ़ी जब युवा होती है, तो प्रदर्शन में शामिल होती है. मैं पिछले कुछ हफ्तों को कम नहीं आंक रही. जब मैं JNU में थी, और मुझे यकीन है कि मुझसे पहले और बाद की पीढ़ियां भी ऐसा करेंगी. युवा उन चीजों से बहुत प्रभावित होते हैं, जो आदर्श नहीं हैं. वे अच्छी प्रतिक्रिया, सही कदम और समय पर उपाय चाहते हैं, और ये सही है. इसलिए वे प्रदर्शन करते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि वे बदलाव ला सकते हैं.
आंदोलन हर पीढ़ी की विरासत है- निर्मला सीतारमण
वित्त मंत्री ने कहा कि मैं इसके लिए खुश हूं, क्योंकि ये युवाओं की भावना है. इस पर मेरी कोई दूसरी राय नहीं है, लेकिन अंतर ये है कि आप ये समझने के लिए तैयार हैं कि वे कहां से आए हैं और इसके अनुसार जवाब देते हैं. इसलिए मैं कहना चाहूंगी कि ये हर पीढ़ी की विरासत है, और ये हर देश में होता है. हमें अपने कान जमीन पर रखने होंगे, ताकि समय रहते सुन सकें और समझ सकें कि क्या हो रहा है.

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उन्होंने कहा कि हम प्रदर्शन का सम्मान करते हैं. हमने उन्हें प्रदर्शन करने से नहीं रोका. जब वे आए तो अनुमति दी गई. जो व्यक्ति आया था, उसे उतरते ही अनुमति दे दी गई. हमने किसी भी समय प्रदर्शन को रोकने की कोशिश नहीं की. इसलिए, जब पहली बार परीक्षा हुई और पेपर लीक हुआ, तो सरकार ने दोषियों को गिरफ्तार किया.
Gen-Z की भाषा में कम्युनिकेशन करना होगा- वित्त मंत्री
वहीं राहुल कंवल के Gen-Z को Instagram Reel और Meme के जरिए विरोध की भाषा का सरकार किस तरह जवाब देगी? क्या तैयारी है? इस सवाल पर निर्मला सीतारमण ने कहा कि उनकी भाषा में कम्युनिकेशन करना होगा, उनकी भाषा मतलब ऐसी भाषा जो उनके लिए आसान हो, बहुत अधिक नौकरशाही वाली भाषा न हो. इसलिए सरकार के लिए ये महत्वपूर्ण है कि वो किस हद तक उस भाषा में संवाद कर सकती है, क्योंकि जब सरकार बोलती है, तो उसकी भाषा हर कानूनी जांच के अधीन होती है.

उन्होंने कहा कि आप कुछ ऐसा नहीं कह सकते जो अस्पष्ट या हल्का-फुल्का लगे, क्योंकि अदालतें इसकी व्याख्या कर सकती हैं. सरकार की अपनी सीमाएं हैं. आपकी भाषा वो होनी चाहिए जो अदालतों में परखी जाए. इसलिए आप अपनी भाषा के साथ बहुत लापरवाह नहीं हो सकते और खुद को मुश्किल में नहीं डाल सकते.
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