वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने NDTV के मंच पर कहा कि सरकार ने कभी भी छात्रों के विरोध-प्रदर्शन को रोकने की कोशिश नहीं की. उन्होंने ये भी कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दोबारा परीक्षा के नतीजों के बाद इस्तीफे की पेशकश करके समझदारी भरा फैसला लिया. NDTV प्रॉफिट बिजनेस लीडरशिप अवार्ड्स 2026 को संबोधित करने के क्रम में वित्त मंत्री ने ये बातें कहीं.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने छात्रों के विरोध-प्रदर्शन से निपटने के सरकार के तरीके का बचाव किया और कहा, 'हमने किसी भी समय विरोध-प्रदर्शन को रोकने की कोशिश नहीं की.' उन्होंने कहा कि हर पीढ़ी युवावस्था में विरोध-प्रदर्शन करती है और साथ ही कहा कि सरकार की जिम्मेदारी ये सुनिश्चित करना था कि दोबारा परीक्षा समय पर हो ताकि छात्रों का एक एकेडमिक साल बर्बाद न हो.
उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने NEET के री-एग्जाम के नतीजे आने के बाद इस्तीफे की पेशकश करके समझदारी भरा फैसला लिया.
'सरकार को Gen-Z की भाषा में बात करनी चाहिए'
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का मानना है कि सरकार को Gen-Z की भाषा में बात करनी चाहिए. NDTV प्रॉफिट बिजनेस लीडरशिप अवार्ड्स 2026 के मंच पर उन्होंने कहा कि सरकारी संदेश बहुत अनौपचारिक नहीं हो सकते क्योंकि सरकार के हर बयान को अदालत में परखा जा सकता है. उन्होंने कहा कि बयानों में स्पष्टता के साथ-साथ कानूनी नजरिये से सटीकता का भी ध्यान रखना चाहिए और कानूनी दायरे में रहना चाहिए.

देश में मेडिकल कॉलेज बढ़े, MBBS और PG की सीटें भी बढ़ीं
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आगे बताया कि देश में विश्वविद्यालयों की संख्या 2014 में 723 से बढ़कर 1,340 हो गई है, जबकि कॉलेजों की संख्या 36,600 से बढ़कर 52,000 हो गई है. उन्होंने कहा कि देश में अब 2,100 से ज्यादा मेडिकल कॉलेज हैं, जिनमें 1.3 लाख MBBS सीटें और 85,000 पोस्ट-ग्रेजुएट मेडिकल सीटें जोड़ी गई हैं. उन्होंने यह भी कहा कि पिछले 12 वर्षों में AIIMS की संख्या आठ से बढ़कर 23 हो गई है. उन्होंने इंडस्ट्रीज से युवा टैलेंट में खुलकर निवेश करने का आग्रह किया.
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