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भारत मना रहा आजादी का जश्न, लेकिन दुनिया के ये 17 हिस्से आज भी हैं गुलाम, देखें List

दुनिया में आज संयुक्त राष्ट्र से मान्यता प्राप्त कुल 195 आजाद देश हैं. अब कोई भी बड़ा देश किसी का गुलाम नहीं है. हालांकि, कई छोटे इलाके या द्वीप ऐसे हैं, जिन पर अब भी दूसरे देशों का कब्जा या नियंत्रण है.

भारत मना रहा आजादी का जश्न, लेकिन दुनिया के ये 17 हिस्से आज भी हैं गुलाम, देखें List
दुनिया के ये 17 भू-भाग आज भी आजाद नहीं हुए. देखें पूरी लिस्ट.
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  • UN के अनुसार दुनिया के 17 भू-भाग आज भी गैर-स्वशासित क्षेत्र हैं जिनमें से अधिकांश ब्रिटेन के नियंत्रण में हैं.
  • ब्रिटेन के पास 10 ऐसे क्षेत्र हैं, जिनमें बरमूडा, केमैन आइलैंड्स, फॉकलैंड आइलैंड्स और जिब्राल्टर शामिल हैं.
  • अमेरिका के तीन क्षेत्र गुआम, अमेरिकी समोआ और यूएस वर्जिन आइलैंड्स हैं, इन पर US सैन्य और प्रशासनिक नियंत्रण है
नई दिल्ली:

भारत आज आजादी का जश्न मना रहा है. लेकिन क्या आपको पता है कि आज भी दुनिया के 17 ऐसे भू-भाग हैं, जहां आज तक आजादी की एक सुबह नहीं हुई. ये भू-भाग हैं- बरमूडा, फोकलैंड आइलैंड्स, जिब्राल्टर, केमैन आइलैंड्स, पिटकेर्न, ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स, अँग्विला, मोंटसेराट, तुर्क एंड कैकोस, सेंट हेलेना, गुआम, अमेरिकन समोआ, यूएस वर्जिन आइलैंड्स, न्यू कैलेडोनिया, फ्रेंच पोलिनेशिया, टोकेलाऊ और वेस्टर्न सहारा. ये दुनिया के वो 17 हिस्से हैं, जिनके नसीब में आज तक आजादी की कोई सुबह नहीं आई. संयुक्त राष्ट्र (UN) की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया की इन 17 टेरिटरी को Non-Self-Governing Territories यानी गैर-स्वशासित क्षेत्र माना जाता है. UN की लिस्ट के मुताबिक, इन क्षेत्रों को मुख्य रूप से 4 बड़े देश संभालते हैं, जबकि एक क्षेत्र लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय विवाद में फंसा है.

यूनाइटेड किंगडम में नियंत्रण में 10 इलाके

इतिहास में दुनिया के एक बड़े हिस्से पर राज करने वाले ब्रिटेन (UK) के पास आज भी सबसे ज्यादा ऐसे क्षेत्र हैं, जो पूरी तरह आजाद नहीं हैं. आइए एक नजर में जानते हैं इन सभी क्षेत्रों के बारे में...

UN की वेबसाइट पर दुनिया के वो 17 भू-भाग जो आज तक नहीं हुए आजाद.

UN की वेबसाइट पर दुनिया के वो 17 भू-भाग जो आज तक नहीं हुए आजाद.
Photo Credit: UN

बरमूडा (Bermuda): 

यह अटलांटिक महासागर में स्थित एक बहुत ही खूबसूरत और अमीर द्वीप है. यहां की अपनी सरकार तो है, लेकिन रक्षा और विदेशी मामलों के लिए यह आज भी ब्रिटेन पर निर्भर है. यहां के लोगों के पास ब्रिटिश नागरिकता होती है.

केमैन आइलैंड्स (Cayman Islands):

कैरिबियन सागर में स्थित यह द्वीप समूह पूरी दुनिया में अपने कड़े टैक्स-फ्री नियमों और बैंकिंग सिस्टम के लिए जाना जाता है. यहां दुनिया भर के अमीर अपना पैसा जमा करते हैं, लेकिन कानूनी रूप से इसकी कमान आज भी ब्रिटिश राजशाही के हाथ में है.

फॉकलैंड आइलैंड्स (Falkland Islands):

दक्षिण अटलांटिक महासागर में स्थित इस द्वीप पर कब्जे को लेकर 1982 में ब्रिटेन और अर्जेंटीना के बीच एक भीषण युद्ध भी हो चुका है. ब्रिटेन ने यह युद्ध जीता था. यहां के लोग खुद को ब्रिटिश कहलाना पसंद करते हैं और अर्जेंटीना के दावों का विरोध करते हैं.

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जिब्राल्टर (Gibraltar):

यह स्पेन के ठीक नीचे कोने पर स्थित एक छोटा सा लेकिन बेहद रणनीतिक पहाड़ी इलाका है. स्पेन हमेशा से इस पर अपना दावा ठोकता आया है, लेकिन यहां की जनता ने जनमत संग्रह में ब्रिटेन के साथ रहने का फैसला किया.

ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स (British Virgin Islands):

कैरिबियन सागर में लगभग 60 छोटे-छोटे द्वीपों का यह समूह अपनी प्राकृतिक सुंदरता और टूरिज्म के लिए मशहूर है. यहां की अर्थव्यवस्था बहुत मजबूत है, लेकिन इसका अंतिम नियंत्रण लंदन (UK) से ही होता है.

तुर्क एंड कैकोस (Turks and Caicos Islands):

बहामास के पास स्थित यह द्वीप समूह पूरी तरह टूरिज्म और विदेशी निवेश पर चलता है. यहां की सरकार को चलाने के लिए ब्रिटेन एक गवर्नर नियुक्त करता है, जिसके पास अंतिम फैसले लेने की शक्ति होती है.

अँग्विला (Anguilla):

यह कैरिबियन का एक और छोटा सा कोरल द्वीप है. 1960 के दशक में यहां के लोगों ने विद्रोह करके खुद को ब्रिटेन के नियंत्रण में वापस सौंप दिया था, क्योंकि वे अपने पड़ोसी द्वीपों के साथ मिलकर नहीं रहना चाहते थे.

मोंटसेराट (Montserrat):

यह कैरिबियन का एक पहाड़ी द्वीप है. 1995 में यहां एक बहुत बड़ा ज्वालामुखी फटा था, जिससे इसकी आधी से ज्यादा आबादी को पलायन करना पड़ा. इसके पुनर्निर्माण और आर्थिक मदद के लिए यह पूरी तरह ब्रिटेन पर निर्भर है.

सेंट हेलेना (Saint Helena):

यह दक्षिण अटलांटिक महासागर के बिल्कुल बीच में स्थित एक बेहद दूरदराज का द्वीप है. इतिहास में फ्रांस के सम्राट नेपोलियन बोनापार्ट को यहीं कैद करके रखा गया था और यहीं उनकी मौत हुई थी. भौगोलिक रूप से अलग-थलग होने के कारण यह आज भी स्वतंत्र नहीं हो पाया है.

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पिटकेर्न (Pitcairn):

यह प्रशांत महासागर में स्थित दुनिया का सबसे छोटा और सबसे कम आबादी वाला क्षेत्र है. यहाँ केवल 40 से 50 लोग रहते हैं, जो एक पुराने ब्रिटिश जहाज (HMS Bounty) के बागियों के वंशज हैं. इतने छोटे आकार के कारण इसका स्वतंत्र देश बनना व्यावहारिक नहीं है.

अमेरिका (USA) के नियंत्रण में 3 क्षेत्र

दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका भी प्रशांत महासागर और कैरिबियन में कुछ क्षेत्रों को संभालता है:-

गुआम (Guam):

पश्चिमी प्रशांत महासागर में स्थित यह द्वीप अमेरिका के लिए मिलिट्री के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है. यहाँ अमेरिका का एक बहुत बड़ा नौसैनिक और हवाई सैन्य बेस (Military Base) है. यहाँ के लोग अमेरिकी नागरिक तो हैं, लेकिन उन्हें अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में वोट देने का अधिकार नहीं है.

अमेरिकन समोआ (American Samoa):

दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित इस द्वीप समूह के लोग तकनीकी रूप से अमेरिकी नागरिक नहीं, बल्कि 'अमेरिकी नागरिक के दर्जे वाले राष्ट्रीय' (U.S. Nationals) कहलाते हैं. यहाँ की अपनी संस्कृति और कानून हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे 
अमेरिका का हिस्सा माना जाता.

यूएस वर्जिन आइलैंड्स (US Virgin Islands):

कैरिबियन सागर में स्थित इस खूबसूरत हिस्से को अमेरिका ने 1917 में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान डेनमार्क से पैसे देकर खरीदा था ताकि वे अपनी समुद्री सीमाओं की रक्षा कर सकें. तब से यह अमेरिका के ही अधीन है.

फ्रांस (France) के नियंत्रण में 2 क्षेत्र

प्रशांत महासागर में फ्रांस के पास भी दो बड़े और महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं:-

न्यू कैलेडोनिया (New Caledonia):

यह द्वीप अपने बड़े निकेल (Nickel) के भंडारों के लिए जाना जाता है. यहाँ के मूल निवासी (कनक लोग) लंबे समय से आज़ादी की मांग कर रहे हैं और यहाँ कई बार हिंसक प्रदर्शन भी हुए हैं. हालांकि, फ्रांस द्वारा कराए गए तीन जनमत संग्रहों में आज़ादी के प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया.

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फ्रेंच पोलिनेशिया (French Polynesia):

ताहिती और बोरा-बोरा जैसे 100 से भी अधिक खूबसूरत और मशहूर द्वीपों से मिलकर बना यह क्षेत्र फ्रांस का एक बड़ा समुद्रपारीय हिस्सा है. यहाँ की स्थानीय सरकार को काफी अधिकार मिले हुए हैं, लेकिन संप्रभुता फ्रांस के पास ही है.

न्यूजीलैंड (New Zealand) के पास 1 क्षेत्र

टोकेलाऊ (Tokelau):

दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित यह केवल तीन छोटे कोरल द्वीपों (Atolls) का समूह है. यहाँ की कुल आबादी लगभग 1,500 
लोगों की है. आर्थिक रूप से कमजोर और बहुत छोटा होने के कारण यह अपनी सुरक्षा और बजट के लिए पूरी तरह न्यूजीलैंड पर निर्भर है.

1 विवादित क्षेत्र जो जंग के बीच फंसा है

पश्चिमी सहारा (Western Sahara):

यह उत्तर-पश्चिम अफ्रीका का एक बहुत बड़ा रेगिस्तानी इलाका है और इस लिस्ट का सबसे विवादित क्षेत्र है. 1975 तक यहाँ स्पेन का राज था. स्पेन के जाने के बाद इसके लगभग 80% हिस्से पर पड़ोसी देश मोरक्को ने सैन्य बल से कब्ज़ा कर लिया. यहाँ के मूल निवासी 'पोलिसारियो फ्रंट' नाम के संगठन के तहत अपनी आज़ादी के लिए आज भी मोरक्को के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष कर रहे हैं.

आखिर ये क्षेत्र अब तक आजाद क्यों नहीं हुए?

सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन इन क्षेत्रों के आजाद न होने के पीछे सबसे बड़ी वजह वहां के लोगों की अपनी मर्जी है.
पश्चिमी सहारा को छोड़कर, इनमें से अधिकतर द्वीप बहुत छोटे हैं. इनके पास इतनी बड़ी सेना या संसाधन नहीं हैं कि ये खुद की रक्षा कर सकें या अपनी अर्थव्यवस्था अकेले चला सकें.

ब्रिटेन, अमेरिका और फ्रांस जैसे देश इन क्षेत्रों को हर साल अरबों डॉलर की आर्थिक मदद देते हैं. यहाँ के लोगों को बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा और बुनियादी ढांचा मिलता है, जो आज़ाद होने पर शायद वे खुद न जुटा पाएं.

इन क्षेत्रों के नागरिकों को सीधे अमेरिका या ब्रिटेन के पासपोर्ट मिलते हैं. इससे उन्हें दुनिया भर में बिना किसी वीज़ा रुकावट के यात्रा करने, पढ़ाई करने और व्यापार करने की आज़ादी मिलती है.

UN की डेकोलोनाइजेशन समिति ने कई बार इन क्षेत्रों में वोटिंग कराई है कि क्या वे आजाद होना चाहते हैं. लेकिन हर बार बरमूडा, जिब्राल्टर और न्यू कैलेडोनिया जैसी जगहों की जनता ने खुद भारी बहुमत से आजाद देश बनने के खिलाफ और अपने वर्तमान देश के साथ ही जुड़े रहने के पक्ष में वोट दिया है.

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