- रांची में परीक्षा रिजल्ट में धांधली के खिलाफ छात्र 13 दिनों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं
- छात्रों की मांग है कि परीक्षा रद्द कराकर फिर कराई जाए और धांधली की जांच सीबीआई से कराई जाए
- आरोप हैं कि परीक्षा में सीटों की बिक्री हुई है और झारखंड के बाहर के अभ्यर्थियों को भारी रकम लेकर सीटें दी गईं
झारखंड की राजधानी रांची में पिछले कई दिनों से छात्रों का प्रदर्शन चल रहा है. 14वीं जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षा के रिजल्ट में हुई धांधली को लेकर छात्र राजधानी के जयपाल सिंह स्टेडियम में पिछले 13 दिनों से प्रदर्शन कर रहें हैं. इस प्रदर्शन की खास बात यह है कि ये दिल्ली में हुए छात्र आंदोलन से बिल्कुल अलग है. सवाल यह है कि दोनों जगह ही छात्रों के मुद्दे हैं, तो फिर विरोध-प्रदर्शन इतना अलग कैसे. इसके पीछे की वजह भी जान लें.
क्या हैं छात्रों की मांग?
रांची में छात्र बिल्कुल शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को रख रहें हैं, छात्र चाहते कि इस परीक्षा को रद्द करके फिर से कराया जाए. इस पूरी धांधली की जांच सीबीआई से कराई जाए. बता दें कि परीक्षा के रिजल्ट में धांधली के आरोप हैं, सीआईडी इसकी जांच कर रहीं है. आरोप यह भी है पैसे लेकर इस परीक्षा में अभ्यर्थियों को सीट बेची गईं हैं, जिससे झारखंड के बाहर के अभ्यर्थियों को इस परिक्षा में सीटें मिल गई, जिसके लिए 50 लाख से 1 करोड़ रुपए तक की रकम ली गई है.

दिल्ली के जंतर मात्र से अलग प्रोटेस्ट
झारखंड के छात्रों का यह आंदोलन दिल्ली के जंतर मंतर के छात्र आंदोलन से बिल्कुल अलग है. इस आंदोलन में छात्र और अभ्यर्थी शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर सरकार से परीक्षा को रद्द करने की मांग कर रहे हैं.इस आंदोलन में बच्चे कोई हिंसक प्रदर्शन नहीं कर रहे. जिस तरह से दिल्ली में मीडिया और पुलिसकर्मियों पर छात्रों के द्वारा हमला किया गया. इस तरह की कोई तस्वीर झारखंड आंदोलन में देखने को नहीं मिली है.
जंतर मंतर के आंदोलन में छात्रों की कई सारी ऐसी वीडियो क्लिप सामने आईं, जिसमें सरकार और प्रधानमंत्री को गालियां दी जा रही थीं. लेकिन रांची के इस आंदोलन में किसी मंत्री, कोई मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री के लिए कोई भी अपशब्द नहीं कहे जा रहे हैं. छात्र शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को रख रहे हैं.

रांची छात्र आंदोलन में राजनीतिक पार्टी का झंडा बैनर नहीं
दिल्ली के आंदोलन में छात्रों के साथ कई उपद्रवी भी शामिल हो गए थे, जिन्होंने जंतर-मंतर छात्र आंदोलन के नाम पर हंगामा मचाया था. वहीं कई राजनीतिक पार्टियों के नेता भी शामिल हो रहे थे. लेकिन रांची के इस छात्र आंदोलन में छात्रों ने राजनीतिक पार्टियों को शामिल होने से मना कर दिया. प्रदर्शन की जगह पर किसी राजनीतिक पार्टी का कोई झंडा बैनर नहीं लगाया गया है.
Gen z आंदोलन से कैसे अलग हैं रांची के छात्रों का आंदोलन?
दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन नीट परीक्षा में हुए पेपर लीक को लेकर था. नीट परीक्षा 12वीं की बोर्ड के बाद दी जाती है . इसलिए इस परीक्षा में शामिल होने वाले ज्यादातर छात्र Gen z होते हैं. इस वजह से दिल्ली के जंतर-मंतर पर जो प्रदर्शन हुआ, उसे Gen z प्रोटेस्ट भी कहा गया.आंदोलन में ज्यादातर छात्र वे थे जिनकी उम्र 15 से 25 साल के बीच थी.

रांची के छात्रों का एज ग्रुप भी बड़ी वजह
Gen z छात्रों का सबसे युवा वर्ग है.इस वजह से दिल्ली के छात्र आंदोलन में युवाओं का जो गुस्सा था वह ज्यादा दिखा और हिंसक प्रदर्शन भी दिखा.लेकिन जेपीएससी परीक्षा के रिजल्ट में धांधली को लेकर जो प्रदर्शन रांची में चल रहा है उनमें ज्यादातर छात्र gen z नहीं हैं. यह सारे सीनियर छात्र हैं, जिनकी उम्र 25 साल से ज्यादा है. हालांकि कुछ युवा वर्ग के छात्र भी प्रदर्शन में शामिल हैं. इस वजह से दिल्ली के जैसा हिंसक प्रदर्शन रांची में इन छात्रों के द्वारा नहीं देखा जा रहा है.
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