नीतीश कुमार (फाइल फोटो)
पटना:
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक ट्वीट में हल्दिया से इलाहाबाद तक जलमार्ग को विकसित करने की प्रस्तावित योजना का खुलकर विरोध करते हुए कहा कि अगर केंद्र अपनी वर्तमान योजना के अनुसार नौवहन के उद्देश्य से बराजों की श्रृंखला बनाएगा तो गंगा नदी तालाबों की श्रृंखला में तब्दील हो जाएगी.
नीतीश ने इस मुद्दे को भी फरक्का बांध से जोड़ते हुए कहा कि फरक्का बांध के निर्माण के कारण बिहार विपरीत प्रभाव को झेल रहा है और इस पृष्ठभूमि में और बराजों के निर्माण के बाद न केवल गंगा नदी की अविरलता बाधित होगी बल्कि निर्मलता भी प्रभावित होगी.
यह पहली बार है कि राज्य में बाढ़ आने के बाद बिहार सरकार ने केंद्र से राहत के बजाय नदियों में बाढ़ का पानी बढ़ने की समस्या पर एक दल भेजने का पहले आग्रह किया. इसके लिए नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. केंद्र ने भी बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए केंद्रीय दल के पहले विशेषज्ञों की टीम भेजी.
इस बीच राज्य में बाढ़ से मारने वालों की संख्या 205 हो गई है और राहत कैंपों में अभी भी तीन लाख से अधिक लोग रहने को मजबूर हैं. हालांकि राज्य सरकार राहत कैंपों में सभी सुविधाएं मुहैया कराने का दावा कर रही है लेकिन कई जगह पर अव्यवस्था का यह आलम है कि महिलाओं को दोनों टाइम का भोजन भी नहीं मिल रहा.
नीतीश ने इस मुद्दे को भी फरक्का बांध से जोड़ते हुए कहा कि फरक्का बांध के निर्माण के कारण बिहार विपरीत प्रभाव को झेल रहा है और इस पृष्ठभूमि में और बराजों के निर्माण के बाद न केवल गंगा नदी की अविरलता बाधित होगी बल्कि निर्मलता भी प्रभावित होगी.
नीतीश कुमार ने इस ट्वीट में कई जल विशेषज्ञों और पूर्व में फरक्का डैम से सम्बंधित रहे इंजीनियरों के लेखों का जिक्र किया है. उन्होंने दावा किया है कि बिहार में हाल में आई बाढ़ के दौरान नदियों के ताल में गाद की समस्या पर उनके स्टैंड की पुष्टि हुई है. उन्होंने राष्ट्रीय गाद प्रबंधन नीति की मांग करते हुए उम्मीद जताई कि केंद्रीय दल जो इस हफ्ते अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को देगा वह इस समस्या के बारे में विस्तृत रूप से चर्चा करेगा. चार सदस्यीय केंद्रीय दल ने पिछले हफ्ते पटना से फरक्का तक पानी और गाद की समस्या का जायजा लिया था.विशेषज्ञों ने गंगा नदी में बाढ़ के लिए फरक्का बराज को कारक माना।गंगा नदी की निर्मलता इसके अविरलता के बिना संभव नहीं https://t.co/8c1ZX0yLqx
— Nitish Kumar (@NitishKumar) September 3, 2016
यह पहली बार है कि राज्य में बाढ़ आने के बाद बिहार सरकार ने केंद्र से राहत के बजाय नदियों में बाढ़ का पानी बढ़ने की समस्या पर एक दल भेजने का पहले आग्रह किया. इसके लिए नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. केंद्र ने भी बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए केंद्रीय दल के पहले विशेषज्ञों की टीम भेजी.
इस बीच राज्य में बाढ़ से मारने वालों की संख्या 205 हो गई है और राहत कैंपों में अभी भी तीन लाख से अधिक लोग रहने को मजबूर हैं. हालांकि राज्य सरकार राहत कैंपों में सभी सुविधाएं मुहैया कराने का दावा कर रही है लेकिन कई जगह पर अव्यवस्था का यह आलम है कि महिलाओं को दोनों टाइम का भोजन भी नहीं मिल रहा.
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