- ईंधन संकट के कारण संसदीय समितियों को दिल्ली में बैठकें आयोजित करने की अनौपचारिक हिदायत दी गई है.
- प्रधानमंत्री की ईंधन बचत अपील के बाद मंत्रियों और मंत्रालयों ने पेट्रोल-डीजल की बचत के कदम उठाए हैं.
- संसदीय समितियों के दिल्ली से बाहर स्टडी टूर पर सख्त नियम लागू और लोकसभा या राज्यसभा अध्यक्ष की अनुमति जरूरी है
मिडिल ईस्ट में युद्ध की आशंका के मद्देनज़र ऊर्जा संकट को लेकर संसदीय समितियों को भी हिदायत दी गई है. सूत्रों के अनुसार, संसदीय समितियों के अध्यक्षों से अनौपचारिक रूप से कहा गया है कि जितना अधिक संभव हो, समितियों की बैठकें दिल्ली में ही आयोजित की जाएं और स्टडी टूर से बचा जाए. गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचत की अपील के बाद कई कैबिनेट मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों और मंत्रालयों ने पेट्रोल-डीजल की बचत की दिशा में कदम उठाए हैं.
दरअसल, संसद के दो सत्रों के बीच संसदीय समितियों के दिल्ली से बाहर दौरे होते हैं. इस दौरान वे इंफ्रास्ट्रक्चर की महत्वपूर्ण परियोजनाओं और संस्थानों का दौरा करते हैं. वे अधिकारियों से मिलते हैं और हितधारकों के साथ संबंधित मंत्रालयों से जुड़े विषयों पर चर्चा कर फीडबैक लेते हैं. मंत्रालयों से संबंधित संसदीय समितियों के लिए ये यात्राएं काफी महत्वपूर्ण होती हैं, जिनके जरिए वे जमीनी हालात का जायजा लेते हैं और इससे उन्हें संबंधित विषयों पर अपनी रिपोर्ट तैयार करने में मदद मिलती है.
स्टडी टूर पर सख्त प्रावधान
नियमों के अनुसार संसदीय समितियों के इस तरह के स्टडी टूर पर सख्त प्रावधान हैं. दिल्ली से बाहर दौरा करने के लिए लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा सभापति की अनुमति आवश्यक होती है. संसद के सत्र के दौरान समिति का दिल्ली से बाहर दौरा नहीं हो सकता. कोई भी दौरा पांच से सात दिनों से अधिक नहीं हो सकता. सरकार ने खर्च पर नियंत्रण के लिए भी कड़े दिशा-निर्देश तय किए हैं. दौरे आधिकारिक और सादगीपूर्ण होने चाहिए. सलाहकार समितियों की बैठकों को लेकर भी सख्त नियम हैं—इनकी बैठक साल में केवल एक बार ही दिल्ली से बाहर हो सकती है.
अगर इस महीने की बात करें तो कई संसदीय समितियों ने दिल्ली से बाहर दौरे किए हैं. वित्त मंत्रालय से संबंधित संसदीय समिति ने मई के पहले सप्ताह में जम्मू-कश्मीर का दौरा किया, जहां वित्तीय साक्षरता, जीएसटी सुधार और एमएसएमई सेक्टर की ग्रोथ से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई. आवास और शहरी विकास से संबंधित संसदीय समिति ने भी जम्मू-कश्मीर का दौरा किया. इसके बाद गृह मंत्रालय से जुड़ी संसदीय समिति ने भी जम्मू-कश्मीर का दौरा किया.
बैठकें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित की जाएं
इस बीच यह सुझाव भी दिया गया कि ईंधन की बचत के लिए बेहतर होगा कि संसदीय समितियों की बैठकें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित की जाएं, ताकि सदस्यों के दिल्ली आने-जाने का खर्च बचाया जा सके. गौरतलब है कि कोविड महामारी के दौरान भी संसदीय समितियों की बैठकों के लिए इसी तरह के सुझाव दिए गए थे, लेकिन इसे व्यावहारिक नहीं माना गया. अधिकारियों के अनुसार, समितियों की बैठकों में कई गोपनीय जानकारियों पर चर्चा होती है और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक होने पर उनके लीक होने की आशंका बनी रहती है. इसलिए निर्णय लिया गया है कि संसदीय समितियों की बैठकें ऑफलाइन मोड में ही होंगी.
इस महीने कई महत्वपूर्ण संसदीय समितियों की बैठकें दिल्ली में ही होने जा रही हैं. इनमें एस्टीमेट, कृषि, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण, कोयला, खनन, इस्पात, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण, जल संसाधन, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, आवास एवं शहरी मामले, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस और ऊर्जा मंत्रालयों से संबंधित संसदीय समितियां शामिल हैं.
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