- बीजेपी के तीन सांसद सज्जन कुमार के घर गए थे. जिस पर विवाद जारी है.
- दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति ने बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन को पत्र लिखा है.
- इस पत्र के माध्यम से बीजेपी के तीन सांसदों पर एक्शन लेने की मांग की गई है.
बीजेपी के तीन सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी, कमलजीत सहरावत और योगेंद्र चंदोलिया हाल ही में सिख-विरोधी दंगों के दोषी सज्जन कुमार की श्रद्धांजलि सभा में पहुंचे थे. जिस पर बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने तीनों को तलब किया था. वहीं अब इस मामले में दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति ने भी नितिन नवीन को पत्र लिखा है, जिसमें सज्जन कुमार के घर जाकर शोक व्यक्त करने वाले तीनों बीजेपी सांसदों के दौरे की कड़ी निंदा की है. समिति ने भाजपा अध्यक्ष से तीनों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है. यह मामला फिलहाल गर्माता नजर आ रहा है.
दिल्ली के तीन सांसद पहुंचे थे सज्जन कुमार के घर
यह विवाद तब शुरू हुआ जब दिल्ली BJP के तीन लोकसभा सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी (दक्षिण दिल्ली), कमलजीत सहरावत (पश्चिम दिल्ली) और योगेंद्र चंदोलिया (उत्तर-पश्चिम दिल्ली) सज्जन कुमार के घर पहुंचे थे. 80 साल के सज्जन कुमार का निधन 20 अगस्त 2026 को हुआ था. जो 1984 के सिख-विरोधी दंगों के दौरान पांच लोगों की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे थे. जैसे ही यह खबर सामने आई तो बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने इन तीनों सांसदों को तलब कर उनके इस कदम के लिए कड़ी फटकार लगाई है.
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सिख कमेटी ने की कार्रवाई की मांग
दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका और महासचिव जगदीप सिंह काहलों ने कहा कि सज्जन कुमार 1984 के सिख नरसंहार के मुख्य दोषियों में से एक थे. उनके कृत्यों को किसी भी परिस्थिति में माफ नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि जिस तरह DSGMC ने कांग्रेस नेता दीपेंद्र हुड्डा की कड़ी आलोचना की थी, जब उन्होंने सज्जन कुमार को पार्टी का 'रोल मॉडल' बताया था. उसी तरह वे इन तीन बीजेपी सांसदों के उनके आवास पर जाने की भी उतनी ही सख्ती से निंदा करते हैं. इस दौरे की निंदा करते हुए DSGMC अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने कहा 'सज्जन कुमार 1984 के सिख नरसंहार के मुख्य दोषी थे. तीन सांसदों का उनके घर जाकर शोक व्यक्त करना सिख समुदाय के उन जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है जो अभी तक भरे नहीं हैं.
बीजेपी की कोशिश भूल गए तीनों सांसद
बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं से समुदाय को पहले मिले ऐतिहासिक समर्थन को याद दिलाते हुए DSGMC के महासचिव जगदीप सिंह काहलों ने कहा 'लगता है कि ये सांसद बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं की लगातार कोशिशों को भूल गए हैं. स्वर्गीय अरुण जेटली और सुषमा स्वराज ने न्याय की हमारी लड़ाई में कंधे से कंधा मिलाकर हमारा साथ दिया था. राजनाथ सिंह 'वॉल ऑफ़ ट्रुथ' के उद्घाटन के समय मजबूती से हमारे साथ खड़े थे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद पीड़ित जगदीश कौर से मिलकर उन्हें समर्थन दिया था. जबकि जगदीश टाइटलर जैसे दोषियों के खिलाफ 1984 के बंद हो चुके मामलों को फिर से खुलवाया था.
समुदाय का कहना है कि बीजेपी को अपने वरिष्ठ नेताओं के ऐतिहासिक रुख पर कायम रहना चाहिए. समिति ने इस बात पर ज़ोर दिया कि मोदी सरकार के कार्यकाल में ही 1984 की हिंसा से जुड़े बंद हो चुके मामलों को फिर से खोला गया, जिससे जगदीश टाइटलर जैसे आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई संभव हो सकी.
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