विज्ञापन
This Article is From Nov 29, 2025

दिल्ली से मुंबई अदालतों में AQI: जहरीली हवा पर जादू की छड़ी से लेकर ज्वालामुखी तक सब कुछ जानिए

शीर्ष अदालत ने साफ किया कि हवा की गुणवत्ता की समस्या गंभीर है और इसे तुरंत हल करने की दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने यह भी कहा कि प्रदूषण के मामले पर नियमित सुनवाई होनी चाहिए.

दिल्ली से मुंबई अदालतों में AQI: जहरीली हवा पर जादू की छड़ी से लेकर ज्वालामुखी तक सब कुछ जानिए
  • देश के कई शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक लगातार खराब होकर तीन सौ से ऊपर बना हुआ है
  • बॉम्बे हाईकोर्ट ने इथोपिया के ज्वालामुखी विस्फोट को वायु प्रदूषण की मुख्य वजह नहीं माना है
  • बीएमसी ने मुंबई में प्रदूषण रोकने के लिए पचास से अधिक निर्माण स्थलों पर काम रोकने के आदेश जारी किए

पूरा देश इस समय जहरीली हवा से परेशान है. आलम ये है कि देश की अदालतों में भी ये पहुंच चुका है. AQI की चिंताजनक स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट से लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट तक में सुनवाई चल रही है. 27 नवंबर को तो कोर्ट ने यहां तक कह दिया था कि अधिकारी महानगर में वायु प्रदूषण के लिए इथोपिया में ज्वालामुखी फटने से उठी राख को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते. AQI उससे बहुत पहले से ही खराब है.

बॉम्बे हाईकोर्ट ने क्या कहा

मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की पीठ से शहर में वायु प्रदूषण के मुद्दे पर वर्ष 2023 से संबंधित कई याचिकाओं पर सुनवाई करने का आग्रह किया गया था. याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील डेरियस खंबाटा और जनक द्वारकादास ने कहा कि शहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) इस महीने लगातार खराब और 300 से ऊपर रहा है. अतिरिक्त सरकारी वकील ज्योति चव्हाण ने कहा कि दो दिन पहले इथोपिया में हुए ज्वालामुखी फटने के कारण वायु प्रदूषण और बढ़ गया है. हालांकि, अदालत ने इस दलील को खारिज कर दिया और कहा कि ज्वालामुखी फटने से बहुत पहले से ही वायु प्रदूषण खराब था.

53 निर्माण स्थलों पर काम रोके

अदालत ने कहा, “इस विस्फोट से पहले भी, अगर कोई बाहर निकलता था तो 500 मीटर से आगे दृश्यता बहुत कम होती थी.” पीठ ने दिल्ली की स्थिति का जिक्र करते हुए पूछा कि इस समस्या से निपटने के लिए क्या प्रभावी उपाय किए जा सकते हैं. पीठ ने सवाल किया, 'सबसे प्रभावी उपाय क्या हो सकते हैं? हम सब देख रहे हैं कि दिल्ली में क्या हो रहा है? इसका क्या असर होगा?' अदालत ने मामले की सुनवाई शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दी. वहीं शुक्रवार को बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने कहा है कि उसने मुंबई में बिगड़ते वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) के मद्देनजर 53 निर्माण स्थलों पर काम रोकने के नोटिस जारी किए हैं. बीएमसी ने बृहस्पतिवार को यह भी निर्देश दिया कि पहले से जारी किए गए वायु प्रदूषण संबंधी दिशा निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाए. इन निर्देशों में लगातार काम करने वाले एक्यूआई निगरानी सेंसर लगाना शामिल है.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

वहीं दिल्ली-एनसीआर में बढ़ रहे प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी गंभीर चिंता व्यक्त की है. 27 नवंबर को ही सु्प्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे पास कोई जादू की छड़ी नहीं है कि इसे घुमाकर समस्या खत्म कर दें. कोर्ट ने कहा कि हमें पता है कि दिल्ली-एनसीआर के लिए खतरनाक समय है. कोर्ट ने कहा कि इस मामले का तुरंत हल निकालने की कोशिश की जाना चाहिए. इस मामले पर अब 1 दिसंबर को सुनवाई होगी. शीर्ष अदालत ने साफ किया कि हवा की गुणवत्ता की समस्या गंभीर है और इसे तुरंत हल करने की दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने यह भी कहा कि प्रदूषण के मामले पर नियमित सुनवाई होनी चाहिए. उन्होंने नोट किया कि अक्सर दीपावली के समय प्रदूषण से संबंधित मामलों पर सुनवाई होती है, लेकिन उसके बाद यह मामले की लिस्ट से गायब हो जाता है. ऐसे मामलों में निरंतर निगरानी और नियमित सुनवाई आवश्यक है ताकि ठोस और प्रभावी निर्णय लिए जा सकें. इस मामले में 1 दिसंबर को अगली सुनवाई के दौरान यह देखा जाएगा कि तत्काल और दीर्घकालिक कौन से उपाय किए जा सकते हैं.

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Air Pollution, Supreme Court, Bombay High Court, Delhi Pollution, Mumbai Pollution
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com