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This Article is From Jan 15, 2026

पर्याप्त शेल्टर न मिलना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन, यह राज्य का दायित्व: बेघर लोगों के मुद्दे पर दिल्ली HC सख्त

दिल्ली हाईकोर्ट ने शीतलहर के बीच नाइट शेल्टरों की स्थिति पर स्वतः संज्ञान लेते हुए कहा कि पर्याप्त शरण न मिलना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है. कोर्ट ने अस्पतालों के पास टेंट लगाने और सभी एजेंसियों को तात्कालिक राहत सुनिश्चित करने के निर्देश दिए.

पर्याप्त शेल्टर न मिलना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन, यह राज्य का दायित्व: बेघर लोगों के मुद्दे पर दिल्ली HC सख्त
  • दिल्ली हाईकोर्ट ने कड़ाके की ठंड में नाइट शेल्टरों की अपर्याप्तता को मौलिक अधिकारों का उल्लंघन माना है
  • कोर्ट ने सरकार और उसकी एजेंसियों को बेघर और अस्पताल मरीजों को शेल्टर उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सौंपी है
  • सरकारी दावों और वास्तविक स्थिति में अंतर को लेकर कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई और सबूत रिकॉर्ड पर लिए हैं
नई दिल्ली:

कड़ाके की ठंड और शीतलहर के बीच दिल्ली में नाइट शेल्टरों की स्थिति को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लिया है. कोर्ट ने कहा है कि पर्याप्त शेल्टर न मिलना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है और यह संविधान के Part-III के अंतर्गत आता है. मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि भारत एक वेलफेयर स्टेट है और ऐसे में सरकार तथा उसकी एजेंसियां अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकतीं.

‘शेल्टर देना राज्य का दायित्व'

हाईकोर्ट ने कहा कि पैसों या संसाधनों की कमी का हवाला देकर बेघर लोगों या सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए आए मरीजों और उनके परिजनों को शेल्टर देने से इनकार नहीं किया जा सकता.
आदेश में कहा गया कि अस्पतालों में आने वाले मरीज और उनके परिजन मजबूरी में वहां रुकते हैं और उन्हें शरण उपलब्ध कराना राज्य की जिम्मेदारी है.

ज़मीनी हालात और सरकारी दावों में अंतर

कोर्ट ने नाइट शेल्टरों को लेकर सरकारी दावों और ज़मीनी हकीकत में अंतर पर गंभीर चिंता जताई.
सुनवाई के दौरान DUSIB और अन्य एजेंसियों द्वारा पेश किए गए नोट, तस्वीरें और साइट विज़िट से जुड़ी रिपोर्ट को कोर्ट ने रिकॉर्ड पर लिया.

तात्कालिक राहत के लिए निर्देश

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने शॉर्ट-टर्म उपायों के लिए कई निर्देश जारी किए हैं.

  • कोर्ट ने कहा कि अस्पतालों के आसपास मौजूद सबवे को अस्थायी शेल्टर के रूप में इस्तेमाल किया जाए.
  • अस्पताल परिसरों के पास उपलब्ध जगहों पर टेंट या पंडाल लगाकर मरीजों और उनके परिजनों को तुरंत शरण दी जाए.
  • AIIMS, DUSIB, NDMC, MCD, DDA, DMRC, दिल्ली पुलिस, DJB और BSES समेत सभी संबंधित एजेंसियां इस व्यवस्था में सहयोग करें.
  • कोर्ट ने यह भी कहा कि सहयोग न मिलने की स्थिति में सख़्त रुख अपनाया जा सकता है और जिम्मेदारी तय की जा सकती है.
  • हाई

-लेवल बैठक का आदेश

हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि 15 जनवरी 2026 को साकेत कोर्ट परिसर में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश (दक्षिण) की अध्यक्षता में सभी संबंधित विभागों और एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों की हाई-लेवल बैठक होगी. बैठक के बाद तैयार की गई रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की जाएगी.

लंबी अवधि के समाधान पर भी ज़ोर

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह केवल तात्कालिक राहत तक सीमित नहीं रहेगा. सभी पक्षों से लॉन्ग-टर्म समाधान को लेकर सुझाव मांगे गए हैं, ताकि भविष्य में ठंड के मौसम में ऐसी स्थिति दोबारा न बने.मामले की अगली सुनवाई 16 जनवरी 2026 को होगी.

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