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द्वारका दुर्घटना मामला: दिल्ली हाईकोर्ट ने मीडिया कवरेज पर रोक की मांग ठुकराई, नाबालिग की पहचान को लेकर आदेश पारित

आरोपी के पिता ने कोर्ट में कहा कि मीडिया को मेरे बेटे का नाम और तस्वीर प्रकाशित करने से रोका जाना चाहिए. बच्चे की पहचान उजागर हो चुकी है. मीडिया चैनल, यूट्यूबर मेरे बच्चे के वीडियो दिखा रहे हैं. 24 घंटे खबरें चल रही हैं, यह मेरे बच्चे के खिलाफ जा रहा है.

द्वारका दुर्घटना मामला: दिल्ली हाईकोर्ट ने मीडिया कवरेज पर रोक की मांग ठुकराई, नाबालिग की पहचान को लेकर आदेश पारित
  • दिल्ली हाईकोर्ट ने द्वारका दुर्घटना मामले में आरोपी के पिता की मीडिया कवरेज पर प्रतिबंध की मांग खारिज कर दी
  • न्यायालय ने नाबालिग आरोपी की पहचान उजागर न करने का आदेश दिया और संबंधित पक्षों को रिकॉर्ड साझा करने से रोका
  • हाईकोर्ट ने प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और सूचना मंत्रालय को नोटिस जारी कर मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई को तय की
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नई दिल्ली:

दिल्ली हाईकोर्ट ने द्वारका दुर्घटना मामले में आरोपी के पिता की मीडिया कवरेज पर पूरी तरह से रोक की मांग वाली याचिका ठुकरा दी है. हालांकि सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नाबालिग आरोपी की पहचान उजागर करने पर रोक लगाने का आदेश पारित कर दिया. हाईकोर्ट ने प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को नोटिस भी जारी किया है.  साथ ही प्रतिवादी 1, 2, 4 और उनके अधीन आरोपियों को चरित्र प्रमाण पत्र या किसी अन्य उद्देश्य से बच्चे का कोई भी रिकॉर्ड डिस्क्लोज करने से भी प्रतिबंधित किया गया है. इस मामले की अगली सुनवाई अब 9 जुलाई को होगी.

दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस दौरान आरोपी नाबालिग के पिता से कहा कि इस मामले के कवरेज पर रोक नहीं लगाई जा सकती. नाबालिग आरोपी के पिता के वकील ने अदालत को बताया था कि मीडिया इस मामले को दिन-रात चला रहा है. उनका कहना था कि उनके परिवार के खिलाफ रोजाना मीडिया ट्रायल चल रहा है, जिससे नाबालिग की पहचान उजागर हो गई है.

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कोर्ट ने कहा कि आपकी याचिका द्वारका दुर्घटना मामले पर मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग है, इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता.

आरोपी के पिता के वकील ने कोर्ट को बताया कि उनका परिवार दबाव में है. सभी मीडिया चैनल मेरे बच्चे का चेहरा दिखा रहे हैं, उसके बारे में खबरें फैला रहे हैं, पुलिस अधिकारियों को निशाना बना रहे हैं, मेरे और मेरे परिवार के बारे में बातें कर रहे हैं.

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उन्होंने कहा कि वे निषेधाज्ञा की मांग कर रहे हैं. मीडिया को मेरे बेटे का नाम और तस्वीर प्रकाशित करने से रोका जाना चाहिए. बच्चे की पहचान उजागर हो चुकी है. मीडिया चैनल, यूट्यूबर मेरे बच्चे के वीडियो दिखा रहे हैं. 24 घंटे खबरें चल रही हैं, यह मेरे बच्चे के खिलाफ जा रहा है.

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इस पर कोर्ट ने कहा कि किस कानून के तहत उन पर रोक लगाई जा सकती है? पत्रकारिता, प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश नहीं लगाया जा सकता. ऐसा कोई कानून नहीं है जो यह कहता हो कि इस पर अंकुश लगाना आवश्यक है. यदि कोई वास्तविक शिकायत हो, तो हां, लेकिन आप जो मांग रहे हैं वह पूर्ण प्रतिबंध का आदेश है, जो जारी नहीं किया जा सकता.

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसा कोई आदेश नहीं है, जिसे कोई भी न्यायालय किसी भी मीडिया चैनल के विरुद्ध पारित कर सके. उच्च न्यायालय ने पिता के वकील से पूछा कि, प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश कैसे लगाया जा सकता है?” 

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