- केरल में स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस की बड़ी जीत ने दस साल बाद राज्य की सत्ता में वापसी के संकेत दिए
- कांग्रेस ने शशि थरूर के साथ गिले-शिकवे दूर कर उन्हें प्रचार समिति का सह संयोजक बनाया और प्रचार बढ़ाया
- टिकट बंटवारे में कांग्रेस ने युवा नेताओं को प्राथमिकता दी और किसी भी सांसद को चुनाव में नहीं उतारा
केरल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हुए स्थानीय निकाय चुनावों में बड़ी जीत से कांग्रेस को दस साल बाद राज्य की सत्ता में वापसी के संकेत मिल गए थे. इससे पार्टी में उत्साह था, लेकिन आशंका भी थी कि सत्ता आती देख पार्टी के नेता अंदरखाने आपस में ना लड़ने लगें. केरल में पांच साल पहले कांग्रेस नेताओं की इसी अंदरूनी कलह ने राहुल गांधी की मेहनत पर पूरी तरह पानी फेर दिया था. बहरहाल, इस बार कांग्रेस आलाकमान बेहद सचेत था. कांग्रेस की सबसे बड़ी जरूरत और चुनौती एकजुटता की थी.
थरूर से गिले-शिकवे किये दूर
शुरुआत हुई शशि थरूर से.. साल की शुरुआत में थरूर को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे थे. अपने बयानों से पार्टी के लिए असहज स्थिति पैदा करने वाले शशि थरूर से जनवरी के अंतिम सप्ताह में राहुल गांधी और खरगे ने करीब दो घंटे तक चर्चा की और गिले-शिकवे दूर किए. थरूर को प्रचार समिति का सह संयोजक बनाया गया. थरूर ने पूरे राज्य में पार्टी के लिए प्रचार किया.
टिकट बंटवारे के लिए भरोसेमंद को भेजा
केरल में टिकट बंटवारे के लिए कांग्रेस आलाकमान ने अपने सबसे भरोसेमंद नेता मधुसूदन मिस्त्री को केरल भेजा. गुजरात से आने वाले वरिष्ठ नेता मिस्त्री ने टिकट बंटवारे में अपना पूरा अनुभव झोंक दिया. कांग्रेस के पास फीडबैक पहुंचा कि लोग सरकार तो बदलाव चाहते हैं, लेकिन वाम मोर्चे के विधायकों के ख़िलाफ कोई खास नाराज़गी नहीं है. टिकट बंटवारे में कांग्रेस ने इस बात का खास ख्याल रखा और युवा नेताओं पर दांव लगाया.
किसी भी सांसद को चुनाव में नहीं उतारा
मधुसूदन मिस्त्री की कमिटी ने यह भी तय किया कि किसी भी सांसद को चुनाव में नहीं उतारा जाएगा. अंदरखाने इसका विरोध हुआ. केरल में नामांकन खत्म होने से ठीक पहले सांसद और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुधाकरन ने चुनाव लड़ने की मांग को लेकर पार्टी को आंखें दिखाईं. आनन-फ़ानन में एके एंटोनी को उन्हें मनाने की जिम्मेदारी दी गई. कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने सुधाकरन से बात की और बाद में राहुल गांधी उनके पूरे परिवार से मिले. इससे संदेश गया कि सुधाकरन की मेहनत का एहसास कांग्रेस आलाकमान को है.
राहुल गांधी ने संभाली प्रचार की कमान
टिकट बंटवारे के बाद बागी नेताओं को मानने की ज़िम्मेदारी केसी वेणुगोपाल ने संभाली. वेणुगोपाल को एहसास था कि केरल में सबसे ज़्यादा उनकी प्रतिष्ठा दांव पर है. ऐसे में उन्होंने ख़ुद घर जा कर बागियों को बिठाया और असंतुष्टों को मनाया. चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस अचानक एक अनुशासित टीम की तरह नज़र आने लगी. प्रभारी दीपादास मुंशी ने पर्दे के पीछे इसमें बखूबी निभाई. इसके बाद शुरू हुआ सीपीएम सरकार, सीएम पिनराई विजयन पर तीखा हमला करने और अपनी चुनावी गारंटी को लोगों तक पहुंचाने का अभियान. ख़ुद राहुल गांधी ने प्रचार की कमान संभाली और सीएम विजयन पर बीजेपी से मिलीभगत के आरोप लगाए. कांग्रेस ने पच्चीस लाख तक से स्वाथ्य बीमा के वादे का खूब प्रचार किया.
ये भी पढ़ें :- बंगाल में लेफ्ट का सियासी संकट: सात दल साथ, फिर भी रुझानों में सिर्फ एक सीट पर बढ़त
मुस्लिमों के साथ ईसाई वोटरों का भी रखा ख्याल
मुस्लिम लीग के साथ गठबंधन के कारण कांग्रेस मुस्लिम वोटों को लेकर आश्वस्त थी, लेकिन कोई कमी ना रह जाए इसके लिए शायर सांसद इमरान प्रतापगढ़ी को मोर्चे पर लगाया गया. ईसाई कांग्रेस के परंपरागत वोटर रहे हैं. कांग्रेस ने कुछ समय पहले ही ईसाई समाज के सनी जोसफ को प्रदेश अध्यक्ष बनाया था. केंद्र सरकार के प्रस्तावित एफसीआरए बिल के कारण ईसाई वोटर और गोलबंद हुए.
केरल में कांग्रेस का 10 साल का वनवास खत्म
कांग्रेस के तीनों संभावित सीएम चेहरे यानी केसी वेणुगोपाल, वीडी सतीशन और रमेश चेन्नीथला, नायर समाज से आते हैं. माना जा रहा है कि इसका भी कांग्रेस को फायदा मिला. बीजेपी इसी नायर वोटबैंक में सेंध लगाने की कोशिश में थी केरल जहां पांच साल के बाद सरकार बदलने का इतिहास रहा है, वहां 10 साल से सत्ता में बैठी पिनराई विजयन सरकार अपने ही बोझ के तले दबी हुई थी. कांग्रेस को बस कोई गलती नहीं करनी थी. कांग्रेस ने वाकई कोई गलती नहीं की. चुनावी नारा “यूडीएफ जयीकुम, एलडीएफ नईक्कुम” यानी यूडीएफ जीतेगा, एलडीएफ हटेगा पर लोगों ने मुहर लगाई. केरल में कांग्रेस का 10 साल का वनवास खत्म हुआ. करीब साठ सालों बाद पहली बार हुआ है, जब देश के किसी भी राज्य में वाम दलों की सरकार नहीं है.
ये भी पढ़ें :-पांच राज्यों के चुनाव के नतीजों से कितना बदल जाएगा विपक्ष का चेहरा, कांग्रेस को कैसे होगा फायदा
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं