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बंगाल में लेफ्ट का सियासी संकट: सात दल साथ, फिर भी रुझानों में सिर्फ एक सीट पर बढ़त

पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजों के रुझानों में एक बार फिर से लेफ्ट फ्रंट का पतन साफ दिख रहा है. सात दलों का गठबंधन होने के बावजूद ताजा रुझानों में लेफ्ट महज़ एक सीट पर ही आगे है, जबकि मुकाबला भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच सिमटता जा रहा है.

बंगाल में लेफ्ट का सियासी संकट: सात दल साथ, फिर भी रुझानों में सिर्फ एक सीट पर बढ़त
  • बंगाल में लेफ्ट फ्रंट आज के चुनाव नतीजों के रुझानों में महज एक सीट पर बढ़त हासिल कर पाया है
  • लेफ्ट फ्रंट के सात दलों के गठबंधन के बावजूद उसकी सियासी पकड़ और जनसमर्थन कमजोर साबित हो रहा है
  • बंगाल की राजनीति अब मुख्य रूप से भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच सीमित होती दिख रही है

आज पांच राज्यों बंगाल, असम, पुडुचेरी, तमिलनाडु और केरल के चुनाव नतीजे आज घोषित हो रहे हैं. इन चुनावों में बंगाल में लेफ्ट की उम्मीदों पर फिर पानी फिरता दिख रहा है. एक वक्त वो भी था जब पश्चिम बंगाल की राजनीति में लेफ्ट फ्रंट का दबदबा हुआ करता था. लगभग तीन दशकों तक सत्ता में रहा वाम मोर्चा कभी राज्य की राजनीति की धुरी माना जाता था. लेकिन साल 2026 के विधानसभा चुनावों के ताजा रुझान एक बिल्कुल अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं. सात दलों के गठबंधन के साथ मैदान में उतरा लेफ्ट फ्रंट अब शुरुआती रुझानों में महज एक सीट पर आगे चल रहा है, जो उसकी खराब सियासी हालात को बयां करता है.

रुझानों में लेफ्ट की हालत खराब

आज आ रहे चुनावी रुझानों में साफ दिख रहा है कि बंगाल में लेफ्ट का संगठनात्मक आधार और जनसमर्थन दोनों कमजोर पड़े हैं. बड़ा गठबंधन होने के बावजूद वाम मोर्चा न तो भाजपा‑टीएमसी की सीधी लड़ाई में खुद को स्थापित कर पाया है और न ही निर्णायक भूमिका में नजर आ रहा है. बंगाल में लेफ्ट की यह खराब स्थिति इसलिए भी ज्यादा मायने रखती है क्योंकि लंबे समय तक वही राज्य उसकी सबसे बड़ी राजनीतिक प्रयोगशाला रहा है. लेकिन मौजूदा रुझान संकेत देते हैं कि समय के साथ बदले राजनीतिक ध्रुवीकरण और वोटर व्यवहार ने लेफ्ट को मुख्य मुकाबले से बाहर धकेल दिया है.

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लेफ्ट सात पार्टियों का गठबंधन मगर सियासी पकड़ कमजोर

अब बंगाल की राजनीति भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच सिमटती दिख रही है, जबकि लेफ्ट, गठबंधन के बावजूद, सिर्फ दर्शक की भूमिका में नजर आ रहा है. अबकी बार लेफ्ट ने सात दलों का गठबंधन बनाकर चुनाव लड़ा. जिसमें CPI(M), CPI, फॉरवर्ड ब्लॉक, आरएसपी, CPI(ML) लिबरेशन, SUCI जैसे दल शामिल हैं, लेकिन आज के रुझान में साफ दिख रहा है कि लेफ्ट गठबंधन मतदाताओं को लुभाने में नाकाम साबित हुआ है. ताजा रुझानों में लेफ्ट का यह पूरा गठबंधन महज़ एक सीट पर बढ़त बनाए हुए है, जो उसके सियासी पतन की ओर इशारा करता है.

बंगाल में टीएमसी बनाम बीजेपी का मुकाबला

एक समय बंगाल की राजनीति की धुरी रहे लेफ्ट के लिए यह स्थिति बेहद प्रतीकात्मक मानी जा रही है. मौजूदा चुनाव में राज्य की लड़ाई पूरी तरह भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच सिमटती नजर आ रही है, हालांकि रुझानों में बीजेपी ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है. जबकि बड़ा गठबंधन होने के बावजूद लेफ्ट हाशिये पर चला गया है. रुझान बताते हैं कि बंगाल के वोटर अब लेफ्ट की पुरानी विचारधारा और संगठनात्मक अपील से दूरी बना चुके हैं, और यही वजह है कि मजबूत इतिहास और बहुदलीय मोर्चे के बावजूद लेफ्ट इस चुनाव में निर्णायक भूमिका में नजर नहीं आ रहा है.

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