Abroad Job Offer: विदेश में मोटी सैलरी वाली नौकरी का सपना दिखाकर भारतीय युवाओं को साइबर गुलामी के जाल में फंसाने वाले एक बड़े गिरोह का खुलासा हुआ है. दरअसल, CBI ने इस मामले में देशभर में कार्रवाई करते हुए 4 राज्यों के 9 ठिकानों पर छापेमारी की. इस दौरान एक आरोपी को गिरफ्तार भी किया गया.
जांच में सामने आया है कि यह गिरोह भारत के युवाओं को दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में अच्छी नौकरी का लालच देता था. उन्हें बताया जाता था कि वहां उन्हें शानदार सैलरी और बेहतर भविष्य मिलेगा. लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग निकली. जैसे ही ये लोग विदेश पहुंचते थे, तो उन्हें सीधे म्यांमार और कंबोडिया जैसे देशों में बने तथाकथित स्कैम कंपाउंड में भेज दिया जाता था, जहां उनसे जबरन ऑनलाइन ठगी करवाई जाती थी.
एक बार पहुंच गए तो लौटना मुश्किल
CBI के मुताबिक, इन ठिकानों को अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध गिरोह चलाते हैं और यहां ले जाए गए लोगों के साथ बेहद अमानवीय व्यवहार किया जाता है. वहां पहुंचते ही पीड़ितों के पासपोर्ट छीन लिए जाते हैं, उनकी आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगा दी जाती है और उन्हें दिन-रात साइबर फ्रॉड करने के लिए मजबूर किया जाता है. अगर कोई मना करता है, तो उसके साथ मारपीट और मानसिक उत्पीड़न तक किया जाता है.
बंधक बनाकर मांगी जाती थी फिरौती
इतना ही नहीं, कई मामलों में पीड़ितों को अपने परिवार से पैसे मंगवाने के लिए मजबूर किया गया, ताकि रिहाई के नाम पर फिरौती दी जा सके. यानी नौकरी का सपना दिखाकर लोगों को सीधे बंधुआ मजदूरी और साइबर अपराध के दलदल में धकेला जा रहा था.
सीबीआई के हाथ लगे अहम सबूत
इस पूरे मामले में CBI ने एक बड़े स्तर पर जांच की, जिसमें देशभर से पीड़ितों के बयान दर्ज किए गए. इसके बाद मुंबई, दिल्ली, लखनऊ, काशीपुर, गोंडा और सहारनपुर समेत कई जगहों पर एक साथ छापेमारी की गई. छापों के दौरान एजेंसी को कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और अहम सबूत मिले हैं, जो इस पूरे नेटवर्क की पोल खोलते हैं.
क्रिप्टोकरेंसी का किया जाता था इस्तेमाल
जांच एजेंसी ने इस मामले में पैसों के लेन-देन की भी गहराई से पड़ताल की. खासकर क्रिप्टोकरेंसी के जरिए हो रहे ट्रांजैक्शन को ट्रैक किया गया, जिससे यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस गिरोह में कौन-कौन शामिल हैं और पैसा कहां से आ रहा है और कहां जा रहा है. CBI ने लखनऊ से एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जिस पर आरोप है कि वह लोगों को इस गिरोह तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाता था. शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि ऐसे एजेंट्स को विदेशी स्कैम कंपाउंड चलाने वाले ऑपरेटर्स की तरफ से पैसे दिए जाते थे, बदले में वे भारत से लोगों को वहां भेजते थे.
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CBI ने आम लोगों से अपील की है कि वे विदेश में नौकरी के नाम पर मिलने वाले किसी भी ऑफर को लेकर सतर्क रहें. खासकर सोशल मीडिया, ऑनलाइन विज्ञापन या जान-पहचान के जरिए आने वाले ऑफर पर बिना जांच-पड़ताल के भरोसा न करें. क्योंकि ऐसे जाल में फंसने के बाद न सिर्फ आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि जिंदगी भी खतरे में पड़ सकती है.
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