Bombay HighCourt Decision: मुंबई के समुद्र तट के पास पिछले तीन महीनों से मौत और जिंदगी के बीच झूल रहे 50 नाविकों के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट 'मसीहा' बनकर उभरा है. मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने बेहद संवेदनशील और सख्त आदेश दिया. कोर्ट ने इस दौरान अपने आदेश से स्पष्ट कर दिया कि मानव जीवन किसी भी जांच या कानूनी पेचीदगियों से ऊपर है. कोर्ट ने न केवल इन नाविकों को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया, बल्कि उनके साथ हुए अमानवीय व्यवहार पर मालिकों को कड़ी फटकार भी लगाई.
ये नाविक पिछले 88 दिनों से समुद्र के बीचो-बीच बंधक जैसी स्थिति में थे. अदालत के सामने जो सच्चाई निकल कर आई, वह रोंगटे खड़े कर देने वाली है. दरअसल, इन नाविकों को हर दिन सिर्फ 300 मिली पानी दिया जा रहा था. जहाजों पर बिजली की कोई व्यवस्था नहीं थी और भीषण गर्मी के बीच ये नाविक केवल चावल और नमक खाकर दिन गुजारने को मजबूर थे. वहीं, अपनों से बात करने के लिए भी उन्हें 15 दिनों में सिर्फ एक बार मोबाइल चार्ज करने की अनुमति दी जाती थी.
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"पालतू जानवरों से भी बदतर बर्ताव"
जहाज मालिकों की क्रूरता पर नाराजगी जताते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने इसे "मानवीय अधिकारों का घोर उल्लंघन" करार दिया. कोर्ट ने कहा कि पोत मालिक अपने ही कर्मचारियों के साथ पालतू जानवरों से भी बुरा व्यवहार कर रहे हैं. नाविकों का आरोप है कि उन्हें मार्च महीने से कोई वेतन भी नहीं दिया गया है. इस पर कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि आप इंसानी जान के साथ इस तरह नहीं खेल सकते, यह व्यवहार पूरी तरह अमानवीय है.
क्या था पूरा मामला?
इंडियन कोस्ट गार्ड ने संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर तीन जहाजों—MT Asphalt Star, MT Stellar Ruby और MT Al Jafzia को पकड़ा था. इन पर समुद्र के बीच अवैध रूप से ईंधन और बिटुमेन के लेनदेन का संदेह था. ये जहाज यूएई स्थित मालिकों के हैं. कानूनी प्रक्रिया शुरू होते ही मालिकों ने अप्रैल महीने से नाविकों की सुध लेना बंद कर दिया और उन्हें उनके हाल पर मरने के लिए छोड़ दिया.
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कोर्ट ने दिए 15 दिनों में घर वापसी के निर्देश
मानवीय आधार पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपने निर्देश में कहा कि तत्काल इन सभी 50 नाविकों को जहाजों से मुक्त कर उनकी रिहाई सुनिश्चित की जाए. इसके साथ ही कोर्ट इन नाविकों के दस्तावेजों की वापसी के भी निर्देश दिए. कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि नाविकों के पासपोर्ट और सभी कानूनी दस्तावेज उन्हें फौरन लौटाए जाएं. इसके साथ ही कोर्ट ने इन नाविकों को राहत देते हुए घर वापसी की प्रक्रिया भी शुरू करने के लिए कहा. कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों और मालिकों को आदेश दिया कि नाविकों को उनके घर भेजने की प्रक्रिया 15 दिनों के भीतर शुरू की जाए. इसके अलावा, कोर्ट ने जहाज मालिकों को सख्त हिदायत दी गई है कि भविष्य में नाविकों की सुरक्षा और देखभाल में कोई कोताही न बरती जाए.
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