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यूपी से हरीश द्विवेदी और स्मृति ईरानी बनाए गए राष्ट्रीय महासचिव, क्या विधानसभा चुनाव पर पड़ेगा असर

नितिन नवीन की नई टीम में उत्तर प्रदेश के दो नेताओं को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है. इनके अलावा पुरानी टीम के दो महासचिवों की छुट्टी भी की गई है.

यूपी से हरीश द्विवेदी और स्मृति ईरानी बनाए गए राष्ट्रीय महासचिव, क्या विधानसभा चुनाव पर पड़ेगा असर
नई दिल्ली:

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने अपनी टीम का ऐलान कर दिया है. इसमें ज्यादातर पुराने चेहरों को जगह दी गई है. इसके साथ ही कुछ नए लोगों को भी नवीन ने अपनी टीम में शामिल किया है. इस नई टीम में जिन आठ लोगों को राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया है, उनमें दो लोग उत्तर प्रदेश से हैं. जेपी नड्डा की टीम में भी दो लोग उत्तर प्रदेश से शामिल थे, लेकिन नई टीम में उन्हें जगह नहीं मिली है. बीजेपी ने नई टीम को आने वाले चुनाव को ध्यान में रखकर तैयार किया है. 

नितिन नवीन की टीम से किसकी हुई छुट्टी

जेपी नड्डा की टीम में उत्तर प्रदेश से डॉक्टर राधा मोहन दास अग्रवाल और अरुण सिंह को शामिल किया गया था. लेकिन नितिन नवीन की टीम में इन दोनों लोगों को जगह नहीं मिली है. नई टीम में हरीश द्विवेदी और स्मृति ईरानी को जगह दी गई है. ये दोनों नेता पहली बार राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है. 

संघ की पृष्ठभूमि से आने वाले डॉक्टर राधा मोहन दास अग्रवाल पहली बार 2002 में गोरखपुर शहर सीट से हिंदू महासभा की टिकट पर विधायक चुने गए थे. उसके बाद वो बीजेपी के टिकट पर गोरखपुर शहर से विधायक चुने गए. इस सीट से वो चार बार विधायक चुने गए. लेकिन 2022 में यह सीट उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए खाली कर दी थी. इसके बाद उन्हें 2022 में उत्तर प्रदेश से राज्य सभा के लिए चुने गए. उन्हें बीजेपी की राष्ट्रीय टीम में शामिल करते हुए राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया था. वो कर्नाटक और राजस्थान के प्रभारी महासचिव थे. इसी तरह से राज्य सभा सांसद अरुण सिंह को भी नितिन नवीन की टीम में जगह नहीं मिली है.वो बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यालय के प्रभारी थे.वो राजस्थान और कर्नाटक के प्रभारी महासचिव भी रह चुके थे. लेकिन नई टीम में उन्हें जगह नहीं मिली है.

कौन हैं हरीश द्विवेदी

नितिन नवीन की टीम में उत्तर प्रदेश से हरीश द्विवेदी और स्मृति ईरानी को शामिल किया गया है. दोनों ही नेता पहली बार राष्ट्रीय महासचिव बनाए गए हैं. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से अपने राजनीतिक करियर का शुरुआत करने वाले द्विवेदी इससे पहले बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव रह चुके हैं.उन्होंने बस्ती लोकसभा सीट से 2014 और 2019 का चुनाव भी जीता था.लेकिन 2024 के चुनाव में उन्हें सपा के रामप्रसाद चौधरी के हाथों हार का सामना करना पड़ा था. संगठन का माहिर माने जाने वाले द्विवेदी ने बिहार और असम में सहप्रभारी के रूप में काम किया है. उत्तर प्रदेश में योगी सरकार से ब्राह्मणों की नाराजगी के बीच द्विवेदी को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है. 

क्या एक्टिंग का करियर फिर छोड़ेंगी स्मृति ईरानी

स्मृति ईरानी उत्तर प्रदेश की ऐसी दूसरी नेता हैं, जिन्हें नवीन की टीम में राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है. 2024 के लोकसभा चुनाव में अमेठी में मिली हार के बाद ईरान एक तरह से नेपथ्य में चली गई थीं. अमेठी में हार के बाद लोगों को उम्मीद थी कि उन्हें राज्य सभा भेजा जाएगा. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. इसका परिणाम यह हुआ कि अभिनय की दुनिया से राजनीति में आईं ईरानी एक बार फिर अभिनय की दुनिया में लौट गई थीं. इसलिए ईरानी के चुनाव को उनकी राजनीति में वापसी माना जा सकता है.  

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