हिमाचल प्रदेश में भाजपा सांसद कंगना रनौत और बीडीओ (ब्लॉक विकास अधिकारियों) के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है. मंडी में हाल ही में हुई दिशा कमेटी की बैठक के दौरान कंगना रनौत ने विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों से सवाल किए. इस दौरान लापरवारी से काम करने पर कंगना रनौत ने अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई और जमकर गुस्सा भी निकाला. अब हिमाचल प्रदेश ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर्स एसोसिएशन ने अपनी नाराजगी जताई है.
अधिकारियों की गरिमा और मनोबल का सम्मान
एसोसिएशन ने साफ कहा कि चुने हुए जनप्रतिनिधियों को विकास योजनाओं की समीक्षा करने और जवाबदेही मांगने का पूरा हक है. लेकिन सरकारी अधिकारियों की गरिमा और मनोबल का भी सम्मान होना चाहिए. दिशा बैठकें विकास योजनाओं की प्रगति देखने, कमियों को पहचानने और समाधान निकालने के लिए होती हैं. आलोचना आधिकारिक रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत पर आधारित होनी चाहिए, न कि ऐसे शब्दों पर जो अफसरों का हौसला तोड़ दें.
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एमपीलैड्स के आंकड़े
एसोसिएशन ने मंडी जिले के सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीलैड्स) के आंकड़े पेश किए. जिले में 23 एजेंसियों के जरिए 237 काम मंजूर हुए हैं, जिनकी लागत करीब 5.12 करोड़ रुपये है. इनमें 12 बीडीओ ऑफिस भी शामिल हैं. कुल 68 काम पूरे हो चुके हैं, 143 चल रहे हैं और सिर्फ 26 अभी शुरू नहीं हुए. बीडीओ ऑफिसों के हिस्से में 212 काम आए, जिनकी लागत करीब 4 करोड़ रुपये है. इनमें से 57 पूरे हो गए, 142 प्रगति पर हैं और केवल 13 बाकी हैं. यानी करीब 94 प्रतिशत कामों पर अमल शुरू हो चुका है.
कामों में देरी के कई कारण
कामों में देरी के कई कारण बताए गए. इनमें ई-साक्षी पोर्टल का नया सिस्टम, जमीन और वन संबंधी अनुमतियां, लाभार्थियों की सहमति, अनापत्ति प्रमाणपत्र, अदालती मामले और पंचायत स्तर की समस्याएं शामिल हैं. पिछले साल मंडी में आई आपदा के दौरान बीडीओ ऑफिसों ने राहत, पुनर्वास और ग्रामीण बुनियादी ढांचे की मरम्मत में भी अहम भूमिका निभाई.
अशोभनीय भाषा का विरोध
बीडीओ सिर्फ एमपीलैड्स ही नहीं देखते. वे कई ग्रामीण विकास योजनाएं चलाते हैं, शिकायतें निपटाते हैं, आरटीआई और सतर्कता मामले संभालते हैं और आपात काम भी करते हैं. एसोसिएशन ने कहा कि वे जवाबदेही के खिलाफ नहीं हैं. जहां कमी हो, वहां सही करने को तैयार हैं. लेकिन बैठक में कथित रूप से अशोभनीय भाषा और अपमानजनक टिप्पणियों का उन्होंने विरोध किया.
क्या है मामला
एसोसिएशन के अध्यक्ष गोपी चंद पाठक ने चेतावनी दी कि अगर ऐसी भाषा या रवैया दोहराया गया तो मजबूत कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. विवाद की शुरुआत कंगना रनौत के उस रुख से हुई जब उन्होंने बैठक में कहा कि सांसद निधि में करीब 11 करोड़ रुपये उपलब्ध हैं, लेकिन बहुत कम खर्च हुए हैं. उन्होंने पहले की बैठकों के आंकड़ों और मौजूदा स्थिति में अंतर पर भी सवाल उठाए.
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