- बीजेपी उत्तराखंड में तीसरी बार जीत के लिए गुटबाजी रोककर नेताओं को टीम की तरह काम करने का निर्देश दे रही है
- मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में चुनाव लड़ा जाएगा और पार्टी उनकी उपलब्धियां जनता तक पहुंचाएगी
- बीजेपी भू कानून, पलायन, महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर कांग्रेस के हमलों का सामना कर रही है
बीजेपी ने उत्तराखंड में हैट्रिक लगाने के लिए कमर कस ली है. पार्टी ने गुटबाजी पर लगाम कसने और राज्य के नेताओं को एक टीम की तरह काम करने का निर्देश दिया है. एसआईआर के कारण जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से कट गए हैं. उनके नाम दोबारा जोड़ने के लिए पार्टी राज्यव्यापी अभियान भी चलाने जा रही है. उधर, कांग्रेस भू कानून, पलायन, अग्निवीर योजना, महंगाई और बेरोजगारी को लेकर बीजेपी को घेर रही है.
तीसरी बार जीत दर्ज कर, इतिहास बनाने की कोशिश
उत्तराखंड में बीजेपी ने पिछले विधानसभा चुनाव में इतिहास रच दिया था. राज्य की स्थापना के बाद से ही ऐसा पहली बार हुआ था, जब किसी दल ने सत्ता में वापसी की हो. अब बीजेपी की कोशिश लगातार तीसरी बार चुनाव जीत कर एक नया इतिहास बनाने की है. हालांकि, बीजेपी जानती है कि यह एक बड़ी चुनौती है. इसीलिए पार्टी ने कई मोर्चों पर काम करने की रणनीति बनाई है. सत्ता विरोधी लहर का सामना करने के लिए बीजेपी अपने 47 में से करीब 10 विधायकों के टिकट भी काट सकती है. इसके अलावा बीजेपी संगठन को चाक-चौबंद करने में जुट गई है. पार्टी नेताओं से गुटबाजी पर लगाम कसने को कहा गया है. इसके लिए वरिष्ठ नेता संवाद कर रहे हैं. पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं की शिकायतों को दूर करने की कोशिश की जा रही है.
धामी के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा चुनाव
बीजेपी के वर्तमान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में ही चुनाव लड़ेगी. वे नारायण दत्त तिवारी के बाद ऐसे दूसरे मुख्यमंत्री हैं जो पांच साल तक सीएम रहे हैं. हालांकि तिवारी लगातार पांच साल सीएम रहे थे. पार्टी उनकी सरकार की उपलब्धियों को जनता के बीच लेकर जाएगी. महिला मतदाताओं को लुभाने के लिए बीजेपी सरकार कुछ नई योजनाओं का वादा भी कर सकती है. युवाओं को रोजगार को लेकर भी वादे किए जाएंगे. बीजेपी के अनुसार पलायन भी एक बड़ा मुद्दा है जिसे लेकर सरकार की ओर से उठाए गए कदमों के बारे में जनता को बताया जाएगा.
बीजेपी का मानना है कि उत्तराखंड में जेन जी की नाराजगी जैसा कोई मुद्दा नहीं है. दिल्ली में हुए कॉन्ग्रेस जनता पार्टी के आंदोलन का असर उत्तराखंड तक नहीं पहुंचा. इसी तरह इंडिया ब्लॉक की ओर से वोट चोरी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का भी बीजेपी के मुताबिक, जमीन पर असर नहीं है. पार्टी इसे ध्यान में रख कर ही अपनी जवाबी रणनीति बना रही है.
चार धाम इंफ्रास्ट्रक्चर और UCC पर दांव
उत्तर प्रदेश से सटे राज्य के तराई के इलाकों में बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है. बीजेपी का मानना है कि इस इलाके में मजबूती से चुनाव लड़ने से परिणाम पर असर होगा. पार्टी को डबल इंजन की सरकार की उपलब्धियों पर भरोसा है. चार धाम इंफ्रास्ट्रक्चर और समान नागरिक संहिता के मुद्दों पर बीजेपी जनता के बीच जाएगी. साथ ही सख्त नकल विरोधी कानून और अपने संगठन की मजबूती का भी उसे सहारा है. हालांकि, अंकिता भंडारी केस और भू कानून को लेकर स्थानीय लोगों की नाराजगी उसके लिए चुनौती है.
कांग्रेस की ये है तैयारी
कांग्रेस ने धामी सरकार के कथित भ्रष्टाचार को बड़ा मुद्दा बनाना शुरू कर दिया है. सरकारी जमीन के मनमाना आवंटन एक बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी है. कांग्रेस भू कानून, पलायन, अग्निवीर योजना, महंगाई और बेरोजगारी को लेकर बीजेपी को घेर रही है. राज्य में परंपरागत रूप से बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही मुकाबला होता आया है. बीच-बीच में आम आदमी पार्टी, बीएसपी और सपा ने इसे त्रिकोणीय बनाने का प्रयास किया लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिल सकी.
घटता वोट प्रतिशत BJP की चिंता!
2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने जीत तो हासिल की थी, लेकिन उसका वोट और सीटें दोनों कम हो गए थे. 2017 के विधानसभा चुनाव की 57 सीटें और 46.5 प्रतिशत वोटों की तुलना में बीजेपी को 2022 में दस सीटें कम मिली थीं. उसे 47 सीटों पर जीत मिली थी और उसका वोट प्रतिशत भी घट कर 44.30 प्रतिशत हो गया था. वहीं कांग्रेस को सात सीटों का फायदा हुआ था. 2017 के विधानसभा चुनाव की तुलना में उसके वोट भी करीब साढ़े चार प्रतिशत बढ़े थे.
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बीजेपी नेताओं का दावा है कि राज्य में कांग्रेस में जबरदस्त गुटबाजी है. कांग्रेस नेताओं की आपसी लड़ाई का फायदा बीजेपी को मिल सकता है. बीजेपी यह भी कहती है कि धामी के मुकाबले कांग्रेस के पास कोई मजबूत चेहरा नहीं है. हरीश रावत कांग्रेस में अलग-थलग हैं, जिसका लाभ बीजेपी को मिल सकता है. पार्टी की चेतावनी के बावजूद उन्होंने अपनी धन्यवाद और जनसंवाद यात्रा निकाली जिससे पार्टी की नाराजगी बढ़ी है. कांग्रेस राज्य में नई पीढ़ी को आगे लाना चाह रही है जो हरीश रावत जैसे पुराने नेताओं को रास नहीं आ रहा. बीजेपी ने इस बार मिशन 60 का लक्ष्य रखा है.
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