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बीजेपी-कांग्रेस से पहले UKD का दांव, उत्तराखंड चुनाव 2027 के लिए 16 उम्मीदवारों का ऐलान

UKD ने 2027 विधानसभा चुनाव के लिए 16 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर चुनावी माहौल गर्मा दिया है. भाजपा और कांग्रेस से पहले प्रत्याशी घोषित कर UKD ने राज्य में अपनी सक्रियता का संकेत दिया है.

बीजेपी-कांग्रेस से पहले UKD का दांव,  उत्तराखंड चुनाव 2027 के लिए 16 उम्मीदवारों का ऐलान
UKD ने 2027 के लिए 16 उम्मीदवार उतारे
NDTV
  • उत्तराखंड क्रांति दल ने 2027 विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा और कांग्रेस से पहले 16 प्रत्याशियों की सूची जारी की
  • यूकेडी की सूची में दो पूर्व विधायक शामिल हैं जिन्हें पुनः चुनाव लड़ने का मौका दिया गया है
  • पार्टी ने पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, टिहरी, चमोली, चंपावत और देहरादून जिलों से अपने उम्मीदवार घोषित किए हैं

2027 के विधानसभा चुनाव के लिए उत्तराखंड की क्षेत्रीय पार्टी उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) ने 16 प्रत्याशियों की सूची जारी की. राज्य में अभी चुनाव तारीखों को लेकर कोई अपडेट नहीं है. माना जा रहा है कि इसमें लगभग दो महीने लगेंगे. लेकिन उत्तराखंड क्रांति दल ने भाजपा और कांग्रेस से पहले अपने प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी है. उत्तराखंड क्रांति दल की लिस्ट में दो पूर्व विधायक भी है जिनको दोबारा से चुनाव लड़ाया जा रहा है यह दोनों पूर्व विधायक उत्तराखंड क्रांति दल से राज्य में पहले भी विधायक रह चुके हैं.

उत्तराखंड में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं भाजपा और कांग्रेस अपनी तैयारी में जुटी हुई है. वहीं राज्य की एकमात्र क्षेत्रीय पार्टी उत्तराखंड क्रांति दल ने दोनों राष्ट्रीय पार्टियों से पहले अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं. यूकेडी ने 70 विधानसभा सीटों में 16 सीटों के प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं. यूकेडी के प्रत्याशियों में दो पूर्व विधायक को भी दोबारा से टिकट दिया गया है. उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले की चार सीटों में पिथौरागढ़ विधानसभा सीट से पूर्व विधायक काशी सिंह ऐरी को उम्मीदवार बनाया गया है, अल्मोड़ा जिले की 6 सीटों में द्वाराहाट विधानसभा सीट से पूर्व विधायक पुष्पेश त्रिपाठी को दोबारा से टिकट दिया गया है, जागेश्वर से दिनेश कुजवाल, सल्ट से प्रताप सिंह अपना प्रत्याशी बनाया है.

यूकेडी ने टिहरी जिले की देवप्रयाग से पूरण सिंह कठैत और प्रतापनगर से पंकज व्यास को टिकट दिया गया है. टिहरी से डी.डी. पंत को उम्मीदवार बनाया है.चमोली जिले की तीन सीटों में से कर्णप्रयाग से आशीष नेगी और राजपुर सीट से देव चंद उत्तराखंडी चुनाव लड़ेंगे. चंपावत जिले की कपकोट से वरुण चंदोला को उम्मीदवार बनाया गया है. काशीपुर से प्रदीप चंद, नानकमत्ता से कैलाश सिंह पांगती और रामनगर से भुवन चंद्र को टिकट मिला है.

देहरादून कैंट से रिटायर कमांडेंट राजेन्द्र सिंह नेगी और खानपुर से रितु कंडियाल जुयाल को मैदान में उतारा गया है. वहीं धनोल्टी से चंदन सिंह राणा UKD के प्रत्याशी होंगे.

उत्तराखंड की राजनीति में यूकेडी का इतिहास

उत्तराखंड के गठन होने के बाद अब तक पांच बार विधानसभा के चुनाव हुए हैं. 
साल 2002 में यूकेडी ने 4 विधानसभा सीट जीती थी और 5.49 प्रतिशत वोट मिले थे.
2007 के विधानसभा चुनावों में यूकेडी 3 विधानसभा सीट जीती थी और 5.49 प्रतिशत वोट मिले थे.
2012 में यूकेडी ने एक विधानसभा सीट पर जीत हासिल की थी और 1.41% वोट मिले थे. 
2017 के चुनावों में यूकेडी कोई भी सीट जीत नहीं पाई थी और वोट प्रतिशत भी उनका घटकर 0.81% रह गया था. 
2022 के चुनाव में यूकेडी का वोट प्रतिशत 1.09% रहा और पार्टी कोई सीट नहीं जीत पाई थी.

2002 विधानसभा चुनाव में यमुनोत्री से प्रीतम सिंह पवार यूकेडी के टिकट पर चुनाव जीते थे. कनालीछीना  सीट से काशी सिंह ऐरी चुनाव जीते थे, नैनीताल सीट से नारायण सिंह जन्तवाल चुनाव जीते थे और द्वाराहाट विधानसभा सीट से बिपिन चंद्र त्रिपाठी चुनाव जीते थे. 2007 के विधानसभा चुनाव में तीन सीटों पर उत्तराखंड क्रांति दल ने जीत हासिल की थी जिसमें देवप्रयाग सीट से दिवाकर भट्ट चुनाव जीते थे और नरेंद्र नगर विधानसभा सीट से ओम गोपाल रावत चुनाव जीते थे. इसके अलावा द्वाराहाट विधानसभा सीट से पुष्पेश त्रिपाठी चुनाव जीते थे. 2012 विधानसभा चुनाव में पार्टी ने केवल एक विधानसभा सीट यमुनोत्री से जीत दर्ज थी. यहां से प्रीतम सिंह पवार चुनाव जीते थे.

उत्तराखंड क्रांति दल राज्य का सबसे पुरानी क्षेत्रीय पार्टी है. उत्तराखंड आंदोलन में भी इसकी सक्रिय भूमिका रही है. उत्तराखंड क्रांति दल का गठन 24 जुलाई 1979 में हुआ था. यूकेडी के प्रमुख संस्थापकों में डॉ देवी दत्त पंत, इंद्रमणि बडोनी, बिपिन चंद्र त्रिपाठी और काशी सिंह तेरी सहित करीब 53 लोग थे, जिन्होंने इस राजनीतिक दल का गठन किया था. उत्तराखंड क्रांति दल ने 1980 और 1990 के दशक में राज्य गठन को लेकर आंदोलन चलाए. इस पार्टी ने उत्तराखंड अलग राज्य की मांग की. 

लेकिन राज्य गठन के बाद उत्तराखंड क्रांति दल ने सत्ता में भागीदारी तो की लेकिन मूल भावनाओं को दरकिनार करते हुए वह सत्ता में शामिल रही. यही वजह है कि आंतरिक कलह, गुटबाजी, नेतृत्व के संकट पर उत्तराखंड क्रांति दल धीरे-धीरे कमजोर होता गया. यूकेडी की हालत यह हो गई कि यह दो भागों में बढ़ गया और चुनाव सिंबल के लिए भी यह पार्टी लड़ती नजर आई. उत्तराखंड क्रांति दल दो गुटों में बाटी जिसमें एक उत्तराखंड क्रांति दल डेमोक्रेटिक और उत्तराखंड क्रांति दल बना जिनके बीच पार्टी सिंबल कुर्सी को लेकर विवाद ने इस पार्टी को कांग्रेस और भाजपा जैसी राष्ट्रीय पार्टियों के सामने बेहद ही कमजोर बना दिया.

लेकिन एक बार फिर उत्तराखंड क्रांति दल एकजुट होकर 2027 के विधानसभा चुनाव में अपनी जगह बनाने में जुड़ा हुआ है. उत्तराखंड क्रांति दल ने पिछले कुछ समय से कई बड़े प्रदर्शन किए है. उत्तराखंड क्रांति दल जिस तरीके से सोशल मीडिया और सड़कों पर अपनी मौजूदगी दिख रहा है उसे उत्तराखंड में भाजपा कांग्रेस जैसे राष्ट्रीय दलों के लिए जाहिर तौर पर 2027 के चुनाव में मुश्किलें जरूर खड़ी होने वाली है.

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