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तृणमूल कांग्रेस नेताओं के लिए फिलहाल बीजेपी के दरवाजे बंद, लेकिन कब तक?

पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने अपने दरवाजे तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के लिए बंद कर रखे हैं, मगर आने वाले दिनों में उसे इसमें एक खिड़की जरूर खोलनी पड़ेगी.

तृणमूल कांग्रेस नेताओं के लिए फिलहाल बीजेपी के दरवाजे बंद, लेकिन कब तक?
  • बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा है कि पार्टी में किसी भी TMC नेता की ऐसे ही एंट्री नहीं हो सकती
  • तृणमूल कांग्रेस के कई राज्यसभा सांसदों के बीजेपी में शामिल होने की चर्चा है
  • टीएमसी में टूट की संभावना बनी हुई है, कई विधायक और नेता चुनाव हार के बाद पार्टी बैठकों में अनुपस्थित रहे हैं
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कोलकाता:

तृणमूल कांग्रेस से बीजेपी में आने की मंशा रखने वाले नेताओं का क्या करना है? यह एक ऐसा सवाल है जिससे पश्चिम बंगाल बीजेपी जूझ रही है. हालांकि बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने साफ कहा है कि बीजेपी कोई धर्मशाला नहीं है कि जो भी यहां आएगा, उसे जगह दे दी जाएगी. जिन्होंने हमारे कार्यकर्ताओं को मारा है, जिन्होंने लोगों की नौकरी छीनी है, जिन्होंने आम जनता को लूटा है, उनको हम कैसे जगह देंगे? इन्हीं लोगों के खिलाफ तो जनता ने वोट दिया है. ऐसे में हम उनको अपनी पार्टी में कैसे शामिल करेंगे?

टीएमसी के राज्यसभा सांसदों के बीजेपी में शामिल होने की चर्चा

वैसे दिल्ली और कोलकाता के राजनीतिक हलकों में इस बात की बहुत चर्चा है कि तृणमूल कांग्रेस के कई सांसद बीजेपी में शामिल होने के लिए तैयार हैं. ये बात तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसदों के बारे में कही जा रही है. टीएमसी के लोकसभा में 29 और राज्यसभा में 10 सांसद हैं. राज्यसभा के 8 सांसदों के बीजेपी में जाने की बात पिछले कई दिनों से कही जा रही है, इस बात में कितनी सच्चाई है, यह तो बाद में ही पता चलेगा. ये भी कहा जा रहा है कि जिस तरह आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद अचानक बीजेपी में चले गए, वैसा ही कुछ तृणमूल कांग्रेस के साथ भी हो सकता है.

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पश्चिम बंगाल की जो स्थिति अभी बन रही है, उसमें तृणमूल कांग्रेस में टूट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि जब भी पार्टी ने अपने विधायकों और नेताओं की बैठक बुलाई है, कई विधायक और नेता उन बैठकों से गायब रहे हैं. एक तो इन नेताओं का चुनाव में हार से मनोबल टूटा है, दूसरा ममता बनर्जी के अपनी सीट से हारने का भी बड़ा असर हुआ है. टीएमसी नेताओं में डर का माहौल है, उन्हें लगता है कि बीजेपी उन्हें छोड़ेगी नहीं और किसी भी तरह की कार्रवाई से बचने के लिए उनके पास बीजेपी में जाने के अलावा कोई विकल्प उन्हें सूझ नहीं रहा है.

बीजेपी के दरवाजे हर किसी के लिए खुले नहीं- समिक भट्टाचार्य

बीजेपी भी इस बात को जानती है, इसलिए प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य कह रहे हैं कि बीजेपी के दरवाजे हर किसी के लिए खुले नहीं हैं. मगर सबसे बड़ा सवाल है कि बीजेपी कब तक ऐसा कर पाएगी. अभी तो उन्हें प्रचंड बहुमत मिला है, लोगों ने बदलाव के नाम पर उन्हें वोट दिया है, मगर अगले साल जब पंचायत और नगर निगम के चुनाव होंगे, तब बीजेपी को नेताओं की जरूरत पड़ेगी. कोलकाता में इस बात की चर्चा है कि उस वक्त बीजेपी को अपनी पकड़ और मजबूत बनाने के लिए कई नेताओं को अपनी पार्टी में जगह देनी पड़ेगी.

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यहां यह बताना भी जरूरी है कि भले ही प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य और दिलीप घोष जैसे नेता आरएसएस पृष्ठभूमि से आते हैं, लेकिन मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी तो तृणमूल कांग्रेस से ही आए हैं. कहने का मतलब है कि फिलहाल बीजेपी ने अपने दरवाजे तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के लिए बंद कर रखे हैं, मगर आने वाले दिनों में उसे इसमें एक खिड़की जरूर खोलनी पड़ेगी.

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यह इसलिए भी जरूरी है कि तब तक बीजेपी सरकार की दिशा और दशा का भी पता चल जाएगा और तृणमूल कांग्रेस की राजनीति क्या करवट लेती है उसका भी. तृणमूल कांग्रेस के सामने भी कई बड़ी चुनौती है, एक तो पार्टी को एकजुट रखने का फिर इंडिया गठबंधन में बने रहने का, यहां पर ममता बनर्जी के राजनीतिक कौशल की परीक्षा होगी और लगता है तब तक बीजेपी इंतजार करना चाहती है.

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