- मुंबई के बांद्रा में बीएमसी की कार्रवाई के दौरान हुई पत्थरबाजी में अधिकांश आरोपी उस इलाके के निवासी नहीं थे
- पत्थरबाजी करने वाले ज्यादातर लोग बेहराम पाडा के मजदूर थे जिनका गरीब नगर से कोई सीधा संबंध नहीं था
- पुलिस को शक है कि पत्थरबाजी में शामिल कई लोग उत्तर प्रदेश से हाल ही में मुंबई आए थे और साजिश हो सकती है
Mumbai Stone Pelting: मुंबई के बांद्रा में गरीब नगर इलाके में बीएमसी की अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के दौरान हुई पत्थरबाज़ी और पुलिस पर हमले के मामले में अहम खुलासे हो रहे हैं. पुलिस की जांच में जो सबसे बड़ी बात सामने आई है, वो यह है कि हिंसा करने वाले ज्यादातर लोग उस इलाके के रहने वाले ही नहीं थे, जहां तोड़फोड़ की कार्रवाई चल रही थी. कुछ लोग तो हाल ही में मुंबई आए थे, तो क्या साजिश के तहत पत्थरबाजी की गई? मुंबई पुलिस अब इस मामले में साजिश के एंगल से जांच करते हुए सीसीटीवी फुटेज के जरिए आरोपियों पर शिकंजा कसने की कोशिश कर रही है.
कहां से आए थे पत्थरबाज़?
पुलिस सूत्रों और अदालती दस्तावेजों के मुताबिक, पत्थरबाजी करने वाले ज्यादातर लोग मुंबई के बेहराम पाडा इलाके के रहने वाले हैं. इन लोगों का गरीब नगर की उस बस्ती से कोई सीधा संबंध नहीं था, जहां BMC का दस्ता कार्रवाई करने पहुंचा था. ये सभी मुख्य रूप से बेहराम पाडा में चलने वाले कपड़ों के कारखानों/व्यवसाय में काम करने वाले मजदूर हैं.
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उत्तर प्रदेश से जुड़ा कनेक्शन!
पुलिस की जांच में सबसे चौंकानेवाली बात ये सामने आई है कि पत्थरबाजी करने वालों में ज्यादातर लोग मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं. कुछ लोग यहां कई सालों से रह रहे थे, तो कुछ ऐसे भी हैं जो महज कुछ महीने पहले ही मुंबई आए थे. इसे लेकर अब कई सवाल उठ रहे हैं. क्या लोगों को सोची-समझी के तहत मुंबई में बुलाया गया?
पुलिस को क्यों है साजिश का शक?
सरकारी वकील ने कोर्ट में दलील दी कि यह हमला अचानक भड़का हुआ गुस्सा नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक सोची-समझी साजिश थी. भीड़ को कैसे जुटाया गया? जब पत्थरबाजी करने वालों का उस बस्ती से कोई लेना-देना ही नहीं था, तो वे इतनी बड़ी संख्या में वहां कैसे और किसके कहने पर इकट्ठा हुए? पुलिस इसी मुख्य सूत्रधार की तलाश कर रही है.
सीमेंट पेवर ब्लॉक कहां से आए?
पुलिस को शक है कि इस कार्रवाई को रोकने के लिए सीमेंट के ब्लॉक पहले से ही जमा करके रखे गए थे. लेकिन सवाल है कि इन्हें किन लोगों ने लगाया. आखिर, इन लोगों का मकसद क्या था? पुलिस आरोपियों के मोबाइल फोन और सोशल मीडिया अकाउंट्स की बारीकी से जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या व्हाट्सएप या किसी अन्य प्लेटफॉर्म के ज़रिए भीड़ को इकट्ठा होने के लिए मैसेज भेजे गए थे.
20 से 25 आरोपी फरार, यूपी भागने का शक!
इस मामले में कोर्ट ने अब तक 18 आरोपियों को 26 मई तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया है, जबकि एक नाबालिग आरोपी को बाल सुधार गृह भेजा गया है. वीडियो और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पहचान तो की जा रही है, लेकिन अब भी 20 से 25 आरोपी फरार हैं. निर्मल नगर पुलिस की कई टीमें उनकी तलाश में जुटी हैं. पुलिस को अंदेशा है कि पकड़े जाने के डर से कई मजदूर अपने मूल राज्य उत्तर प्रदेश या अपने रिश्तेदारों के यहां भाग गए हैं.
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बचाव पक्ष का क्या है दावा?
मुंबई में पत्थरबाजी के आरोपियों के वकीलों का कहना है कि यह कोई साजिश नहीं थी. मदरसा और मस्जिद को कोई अग्रिम नोटिस नहीं दिया गया था, जिससे लोगों की धार्मिक भावनाएं अचानक आहत हुईं और यह एक तात्कालिक अकस्मात प्रतिक्रिया थी. वकीलों ने यह भी दलील दी कि केवल धुंधली तस्वीरों या वीडियो के आधार पर पुलिस किसी को भी आरोपी नहीं बना सकती.
फिलहाल, पुलिस इस पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी है कि आखिर बेहराम पाडा के इन मजदूरों को गरीब नगर में पथराव करने के लिए किसने उकसाया और इसके पीछे का असली मास्टरमाइंड कौन है.
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