- अधीर रंजन चौधरी ने कांग्रेस का अकेले चुनाव लड़ना रणनीतिक फैसला बताया और गठबंधन प्रयासों का जिक्र किया
- उन्होंने कहा कि कांग्रेस को किसी की मदद नहीं चाहिए और अपनी पार्टी को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित है
- ध्रुवीकरण के लिए उन्होंने बीजेपी और टीएमसी दोनों को जिम्मेदार ठहराया और कांग्रेस को विकल्प बताया
पश्चिम बंगाल में सियारी सरगर्मी तेज हैं. सभी पार्टियां चुनाव प्रचार में लगी हुई हैं. इस चुनाव में कांग्रेस ने बहरामपुर से पूर्व सांसद अधीर रंजन चौधरी को उम्मीदवार बनाया है. पश्चिम बंगाल की राजनीति में अधीर रंजन चौधरी एक ऐसा नाम हैं जो अपनी बेबाकी और जमीनी नेता की छवि के लिए जाने जाते हैं. उनकी गिनती कांग्रेस के बड़े नेताओं में होती है. विधानसभा चुनाव के प्रचार के बीच अधीर रंजन चौधरी से NDTV की टीम ने बातचीत की. इस दौरान उन्होंने कांग्रेस की रणनीति, ममता बनर्जी के साथ समीकरण और बंगाल में बढ़ते ध्रुवीकरण पर खुलकर अपनी राय रखी है. पढ़िए अधीर रंजन चौधरी का इंटरव्यू..
अकेले चुनाव लड़ने का फैसला
अधीर रंजन चौधरी ने साफ किया कि अकेले चुनाव लड़ना कांग्रेस का एक सोचा-समझा फैसला है. उन्होंने बताया कि पहले लेफ्ट के साथ गठबंधन की कोशिश की गई थी, लेकिन CPM के कभी हां, कभी ना के कारण कांग्रेस ने अकेले मैदान में उतरने का रास्ता चुना. उन्होंने कहा कि हमें किसी की बैसाखी नहीं बनना है. हम अपनी पार्टी को मजबूत करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.
'एंटी-ममता' और मुस्लिम वोटों का गणित
जब चौधरी से पूछा गया कि क्या कांग्रेस के अलग लड़ने से टीएमसी विरोधी वोट बंट जाएंगे, तो उन्होंने इसे बेकार की बात" करार देते हुए कहा कि मतदाता रणनीति के तहत वोट देता है. जहां कांग्रेस मजबूत है, वहां भाजपा विरोधी और ममता विरोधी दोनों वोट कांग्रेस के पास ही आएंगे. ममता बनर्जी के नुकसान के सवाल पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस का लक्ष्य किसी का नुकसान करना नहीं, बल्कि खुद को मजबूत करना है.
ध्रुवीकरण की राजनीति
अधीर रंजन ने बंगाल की राजनीतिक स्थिति के लिए बीजेपी और टीएमसी दोनों को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली से मोदी और बंगाल से दीदी के बीच 'बड़ा हिंदू' बनने की होड़ लगी है. उन्होंने कहा कि यह ध्रुवीकरण धर्मनिरपेक्षता को कमजोर करता है और इसे बचाने का एकमात्र रास्ता कांग्रेस को वोट देना है.
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हुमांयू कबीर और ओवैसी को बताया 'वोट कटवा'
अधीर रंजन ने असदुद्दीन ओवैसी और हुमायूं कबीर को 'वोट कटवा' बताया. हुमांयू कबीर को लेकर उन्होंने कहा कि वो स्टिंग के खिलाफ कोर्ट क्यों नहीं गए. उन्होंने जनता को उनके चंगुल में न फंसने की सलाह दी.
अपनी पिछली लोकसभा हार के सवाल पर चौधरी ने कहा कि वो ध्रुवीकरण के कारण हार गए थे. उन्होंने कहा, 'मैं सही से न हिंदू बन पाया और न ही मुसलमान, बीच में रह गया और खाई में गिर गया.'
ममता बनर्जी को समर्थन?
जब उनसे पूछा गया कि क्या चुनाव बाद जरूरत पड़ने पर कांग्रेस ममता बनर्जी को समर्थन देगी, तो उन्होंने इसे काल्पनिक सवाल बताकर टाल दिया और फिलहाल किसी भी गठबंधन की संभावना पर पत्ता नहीं खोला.
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