'अयोध्या विवाद की SRK से मध्यस्थता कराना चाहते थे CJI बोबडे, पर...' : SC बार एसोसिएशन अध्यक्ष

रामजन्मभूमि- बाबरी मस्जिद विवाद में जस्टिस बोबडे (Justice SA Bobde) पांच जजों की बेंच का हिस्सा थे. बेंच ने 9 नवंबर 2018 को फैसला सुनाया था. इसके बाद वो सीजेआई रंजन गोगोई के रिटायर होने पर देश के मुख्य न्यायाधीश बने.

'अयोध्या विवाद की SRK से मध्यस्थता कराना चाहते थे  CJI बोबडे, पर...' : SC बार एसोसिएशन अध्यक्ष

Chief Justice of India Justice SA Bobde शुक्रवार को सेवानिवृत्त हो गए

नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त हो रहे प्रधान न्यायाधीश जस्टिस एसए बोबडे (Chief Justice of India Justice SA Bobde) अयोध्या विवाद में अभिनेता शाहरुख खान से मध्यस्थता करना चाहते थे. सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह  ने CJI एस ए बोबडे के विदाई समारोह में शुक्रवार को यह खुलासा किया. उन्होंने कहा कि सीजेआई बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान की सेवाएं अयोध्या विवाद (Ayodhya Dispute) में लेना चाहते थे.विकास सिंह ने कहा कि जस्टिस बोबडे ने उनसे पूछा था कि क्या शाहरुख खान मध्यस्थता के लिए तैयार हैं? 

इस पर उन्होंने शाहरुख खान के साथ बात की और वह मध्यस्थता करने के लिए खुश थे लेकिन दुर्भाग्य से मध्यस्थता नहीं हुई. गौरतलब है कि रामजन्मभूमि- बाबरी मस्जिद विवाद (Ramjanmabhoomi-Babri Masjid dispute) में जस्टिस बोबडे पांच जजों की बेंच का हिस्सा थे. बेंच ने 9 नवंबर 2018 को फैसला सुनाया था. इसके बाद वो सीजेआई रंजन गोगोई के रिटायर होने पर देश के मुख्य न्यायाधीश बने.

विकास सिंह ने बताया, उनके पास हार्ले डेविसन थी और वो उसने बेचना चाहते थे. इस पर CJI बोबडे ने कहा कि बेच क्यों रहे हो. मुझे भेज दो. उन्होंने बताया था कि ये बड़ी भारी है. वहीं  सीजेआई ने कहा कि वो बचपन से चलाते हैं. बाद में इसी बाइक से उनको फ्रेक्चर हो गया था. न्यायिक क्षेत्र में 43 साल की सेवाएं देने के बाद जस्टिस बोबडे सेवानिवृत्त हो रहे हैं.

बोबडे ने कहा, हम COVID लहर से जूझ रहे हैं और इम्तेहान की घड़ी से गुजर रहे हैं. कई जजों के स्टाफ वायरस के कारण प्रभावित हैं. कोरोना वायरस की शृंखला को तोड़ने के लिए कुछ कठिन उपाय आवश्यक हो सकते हैं. हम समर्पण के साथ महामारी को हरा सकते हैं. जस्टिस बोबडे ने कहा, मेरा दिल उन सभी के साथ है जिन्होंने अपनी जान गंवाई है.

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जस्टिस बोबडे ने कहा कि शुरुआत में कैमरे के सामने देखकर सुनवाई करना कठिन लग रहा था, लेकिन धीरे- धीरे अभ्यस्त हो गए. कुछ मामलों के लिए ये अब रहने वाला है. न्याय तक पहुंच अब तभी होगी जब तकनीक तक पहुंच होगी.