
बीएसपी प्रमुख मायावती (फाइल फोटो)
नई दिल्ली:
बहुजन समाज पार्टी ने बीजेपी के पूर्व नेता दयाशंकर सिंह की अभद्र टिप्पणियों के खिलाफ धरना 36 घंटों के लिए टाल दिया है। बुधवार को राज्यसभा में जमकर हंगामा करने के बाद बीएसपी गुरुवार को इस मुद्दे पर संसद में ख़ामोश रही। सूत्रों की मानें तो बुधवार देर रात दयाशंकर सिंह को बीजेपी से निकालने की कार्रवाई से मायावती संतुष्ट हुईं और यही वजह है कि गुरुवार को राज्यसभा की कार्यवाही में कोई दखल नहीं दिया गया।
सूत्रों के अनुसार बुधवार दोपहर में दयाशंकर सिंह को बीजेपी के सभी पदों से हटाने की जानकारी सरकार की ओर से मायावती को दी गई थी। संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी बीएसपी सुप्रीमो के संपर्क में थे। उनसे कहा गया कि इस कार्रवाई के बाद बीएसपी सांसदों को सदन की कार्यवाही में बाधा नहीं पहुंचानी चाहिए। लेकिन मायावती इसके लिए तैयार नहीं थीं। उनका कहना था कि बीजेपी को दयाशंकर सिंह के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए पार्टी से निकालना चाहिए।
बीजेपी सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत अन्य वरिष्ठ नेता दयाशंकर सिंह के खिलाफ सख्त कार्रवाई के पक्ष में थे। हालांकि यूपी चुनावों के मद्देनज़र राज्य बीजेपी के कई नेता ऐसी कठोर कार्रवाई के पक्ष में नहीं थे। उनकी दलील थी कि दयाशंकर सिंह के खिलाफ कार्रवाई से अगड़ी जाति के मतदाताओं ख़ासतौर से राजपूतों में गलत संदेश जाएगा।
देर रात वित्त मंत्री अरुण जेटली, संसदीय मंत्री अनंत कुमार और राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी पार्टी अध्यक्ष अमित शाह से मिले। इस बैठक में दयाशंकर सिंह के खिलाफ सख्त कार्रवाई पर चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक वहां दयाशंकर सिंह को पार्टी से निकालने का फैसला हुआ।
बीएसपी सुप्रीमो मायावती को भी इसकी जानकारी दे दी गई। उनसे कहा गया कि अब बीएसपी को ये मुद्दा समाप्त कर देना चाहिए।
उधर बीएसपी नेताओं के मुताबिक गुरुवार के धरने की सूचना सबको दे दी गई थी लिहाजा इसे टालना मुश्किल था। मगर बीजेपी की देर रात की कार्रवाई के मद्देनज़र ये तय हुआ कि बीएसपी राज्यसभा में इस मुद्दे को अब नहीं उठाएगी। बीएसपी का साफ कहना है कि धरना 36 घंटे के लिए इसलिए टाला गया क्योंकि राज्य प्रशासन ने गिरफ़्तारी के लिए इतने ही समय की बात कही है।
गुरुवार को सदन की कार्यवाही शुरू होने पर मायावती सदन में नहीं थीं। पार्टी की ओर से सतीश चंद्र मिश्र और अन्य सांसद मौजूद रहे। दोपहर में दलितों के उत्पीड़न की घटनाओं पर चर्चा में मायावती ने हिस्सा लिया जिसमें बीजेपी के साथ कांग्रेस पर भी निशाना साधा।
हालांकि सरकार के प्रबंधकों को राज्यसभा में उस समय जरूर हैरानी हुई जब एआईएडीएमके के सांसदों ने इस मसले को उठाने की कोशिश की। तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता बुधवार को ही इस मुद्दे पर बयान दे चुकी थीं।
बीजेपी नेताओं के अनुसार दयाशंकर सिंह की गिरफ़्तारी की मुद्दा अब क़ानून व्यवस्था का सवाल है जो समाजवादी पार्टी सरकार के कार्य क्षेत्र का मामला है। यही वजह है कि बीजेपी अब इस मामले से दूर है। अगर बीएसपी इसे लेकर आगे बढ़ना चाहती है को जाहिर है उसके निशाने पर सपा सरकार होगी।
सूत्रों के अनुसार बुधवार दोपहर में दयाशंकर सिंह को बीजेपी के सभी पदों से हटाने की जानकारी सरकार की ओर से मायावती को दी गई थी। संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी बीएसपी सुप्रीमो के संपर्क में थे। उनसे कहा गया कि इस कार्रवाई के बाद बीएसपी सांसदों को सदन की कार्यवाही में बाधा नहीं पहुंचानी चाहिए। लेकिन मायावती इसके लिए तैयार नहीं थीं। उनका कहना था कि बीजेपी को दयाशंकर सिंह के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए पार्टी से निकालना चाहिए।
बीजेपी सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत अन्य वरिष्ठ नेता दयाशंकर सिंह के खिलाफ सख्त कार्रवाई के पक्ष में थे। हालांकि यूपी चुनावों के मद्देनज़र राज्य बीजेपी के कई नेता ऐसी कठोर कार्रवाई के पक्ष में नहीं थे। उनकी दलील थी कि दयाशंकर सिंह के खिलाफ कार्रवाई से अगड़ी जाति के मतदाताओं ख़ासतौर से राजपूतों में गलत संदेश जाएगा।
देर रात वित्त मंत्री अरुण जेटली, संसदीय मंत्री अनंत कुमार और राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी पार्टी अध्यक्ष अमित शाह से मिले। इस बैठक में दयाशंकर सिंह के खिलाफ सख्त कार्रवाई पर चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक वहां दयाशंकर सिंह को पार्टी से निकालने का फैसला हुआ।
बीएसपी सुप्रीमो मायावती को भी इसकी जानकारी दे दी गई। उनसे कहा गया कि अब बीएसपी को ये मुद्दा समाप्त कर देना चाहिए।
उधर बीएसपी नेताओं के मुताबिक गुरुवार के धरने की सूचना सबको दे दी गई थी लिहाजा इसे टालना मुश्किल था। मगर बीजेपी की देर रात की कार्रवाई के मद्देनज़र ये तय हुआ कि बीएसपी राज्यसभा में इस मुद्दे को अब नहीं उठाएगी। बीएसपी का साफ कहना है कि धरना 36 घंटे के लिए इसलिए टाला गया क्योंकि राज्य प्रशासन ने गिरफ़्तारी के लिए इतने ही समय की बात कही है।
गुरुवार को सदन की कार्यवाही शुरू होने पर मायावती सदन में नहीं थीं। पार्टी की ओर से सतीश चंद्र मिश्र और अन्य सांसद मौजूद रहे। दोपहर में दलितों के उत्पीड़न की घटनाओं पर चर्चा में मायावती ने हिस्सा लिया जिसमें बीजेपी के साथ कांग्रेस पर भी निशाना साधा।
हालांकि सरकार के प्रबंधकों को राज्यसभा में उस समय जरूर हैरानी हुई जब एआईएडीएमके के सांसदों ने इस मसले को उठाने की कोशिश की। तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता बुधवार को ही इस मुद्दे पर बयान दे चुकी थीं।
बीजेपी नेताओं के अनुसार दयाशंकर सिंह की गिरफ़्तारी की मुद्दा अब क़ानून व्यवस्था का सवाल है जो समाजवादी पार्टी सरकार के कार्य क्षेत्र का मामला है। यही वजह है कि बीजेपी अब इस मामले से दूर है। अगर बीएसपी इसे लेकर आगे बढ़ना चाहती है को जाहिर है उसके निशाने पर सपा सरकार होगी।
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