World Hypertension Day 2026: आज के समय में 'हाई ब्लड प्रेशर' या हाइपरटेंशन एक बेहद आम लेकिन गंभीर बीमारी बन चुका है. डॉक्टरों द्वारा इसे अक्सर 'साइलेंट किलर' यानी कि छुपकर वार करने वाला कहा जाता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि शुरुआत में इसके कोई साफ लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन अंदर ही अंदर यह हमारे पूरे शरीर को खोखला करने लगता है. जब भी हाई बीपी की बात होती है, तो लोगों का ध्यान सबसे पहले दिल की बीमारियों पर जाता है.
Dr. T. S. Kler बताते हैं कि लगातार ब्लड प्रेशर बढ़ने से हमारे दिल को खून पंप करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे दिल की मांसपेशियां मोटी हो जाती हैं और हार्ट फेलियर या हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि अनियंत्रित ब्लड प्रेशर सिर्फ आपके दिल को ही नहीं, बल्कि आपके दिमाग को भी बहुत बुरी तरह नुकसान पहुंचाता है? जी हां आपने बिल्कुल सही सुना.
दिमाग पर कैसे असर डालता है हाई बीपी?
डॉक्टर के अनुसार हमारा दिमाग पूरे शरीर के वजन का सिर्फ 2% हिस्सा होता है, लेकिन इसे जिंदा रहने और ठीक से काम करने के लिए पूरे शरीर के खून की सप्लाई का लगभग 20% हिस्सा अकेले चाहिए होता है. यही वजह है कि जब ब्लड वेसल्स (खून की नसें) में कोई दिक्कत आती है, तो हमारा दिमाग सबसे पहले इसकी चपेट में आता है.
हाई ब्लड प्रेशर के नुकसान-
1. स्ट्रोक-
हाई ब्लड प्रेशर की वजह से खून की नसें धीरे-धीरे सख्त और संकरी (Atherosclerosis) होने लगती हैं. इससे दिमाग तक पहुंचने वाले खून की मात्रा कम हो जाती है. अगर इन संकरी नसों में खून का कोई थक्का (Blood Clot) फंस जाए या ज्यादा प्रेशर के कारण दिमाग की कोई नस फट जाए, तो इंसान को स्ट्रोक आ जाता है. स्ट्रोक के कारण दिमाग हमेशा के लिए डैमेज हो सकता है, शरीर में लकवा (पैरालिसिस) मार सकता है.

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2. याददाश्त-
कई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि अगर अधेड़ उम्र (Midlife) में हाई बीपी है तो आगे चलकर डिमेंशिया का खतरा कई गुना बढ़ सकता है. इसे 'वैस्कुलर डिमेंशिया' कहते हैं. इसमें मरीज की सोचने-समझने की ताकत कम होने लगती है, वह छोटी-छोटी बातें भूलने लगता है.
3. मिनी स्ट्रोक या TIA-
यह एक तरह का छोटा स्ट्रोक होता है, जो तब आता है जब दिमाग के किसी हिस्से में खून की सप्लाई कुछ देर के लिए रुक जाती है. हालांकि यह अटैक कुछ ही मिनटों या एक घंटे से कम समय में ठीक हो जाता है.
4. किडनी-
हाई बीपी किडनी की नसों को नुकसान पहुंचाता है, जिससे वे खून को ठीक से साफ नहीं कर पातीं. आगे चलकर यह किडनी फेलियर का कारण बन सकता है, जिसके बाद डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट ही एकमात्र रास्ता बचता है.
बीपी कंट्रोल में रखने के आसान उपाय-
- सही डाइट- अपने खाने में फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और कम वसा वाला प्रोटीन शामिल करें. 'DASH' डाइट का पालन करें, जिसमें नमक (सोडियम) का सेवन बहुत कम कर दिया जाता है. डिब्बाबंद और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाएं.
- रोजाना एक्सरसाइज- हफ्ते में कम से कम 150 मिनट हल्की-फुल्की एक्सरसाइज जैसे- तेज चलना (Waking), तैरना (Swimming) या साइकिल चलाना बेहद जरूरी है.
- शराब से दूरी- अगर आप शराब पीते हैं, तो इसे बेहद सीमित करें.
- तनाव- लगातार स्ट्रेस में रहने से बीपी बढ़ता है. इसके लिए रोज गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज, मेडिटेशन या योग का सहारा लें.
- नियमित चेकअप- समय-समय पर घर पर या डॉक्टर के पास जाकर अपना ब्लड प्रेशर चेक करते रहें ताकि आपको अपनी सेहत का हाल पता रहे.
- दवाइयां- अगर डॉक्टर ने आपको बीपी की कोई दवा लिखी है, तो उसे बिना चूके रोज समय पर लें. कोई भी दिक्कत होने पर डॉक्टर से बात करें, खुद से दवा बंद न करें.
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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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