Why are heart attacks increasing among young people : हमें लगता कि सभी के शरीर में धड़कने वाला दिल एक जैसा होता है लेकिन यह सच नहीं है. कार्डियक एक्सपर्ट्स डॉ. नरेश त्रेहान ने NDTV से बातचीत के दौरान बताया कि किसी में हार्ट की आर्टरीज में ब्लॉकेज होती है, तो किसी में इलेक्ट्रिकल सिस्टम या हार्ट मसल की समस्या होती है. कई बच्चे जन्म से ही मेटाबॉलिक या लिपिड डिसऑर्डर के साथ पैदा होते हैं, जिससे उनकी आर्टरीज में बहुत कम उम्र में ब्लॉकेज बनने लगती है. ऐसे मामलों में 9 से 17 साल के बच्चों को भी हार्ट अटैक या गंभीर हार्ट प्रॉब्लम हो सकती है.
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गलत खानपान भी बन सकता है कारण
डॉ. नरेश त्रेहान बताते हैं कि जरूरत से ज्यादा घी, तेल और फैट लेने से शरीर उसे मेटाबोलाइज्ड नहीं कर पाता. खासतौर पर बचपन से ही अगर रोज ज्यादा फैट दिया जाए, तो वही फैट आर्टरीज में जमने लगता है. ग्रामीण इलाकों में सर्दियों में बनने वाले घी से भरे लड्डू कभी-कभी खाना ठीक है, लेकिन रोजाना ऐसा करना दिल के लिए खतरनाक हो सकता है.
उम्र के साथ बदलता है शरीर का मेटाबॉलिज्म
20–25 साल की उम्र में शरीर ज्यादा फूड आसानी से पचा लेता है, लेकिन 30 के बाद मेटाबॉलिक रेट धीरे-धीरे कम होने लगता है. 40 के बाद वजन बढ़ना और थकान महसूस होना आम हो जाता है. इसलिए उम्र के साथ खानपान और एक्सरसाइज में बदलाव जरूरी है.
हार्ट डिजीज एक साइलेंट किलर क्यों है?
अक्सर हार्ट की बीमारी के साफ लक्षण नहीं दिखते. न दर्द होता है, न बाहर से कोई निशान. तभी इसे साइलेंट किलर कहा जाता है. अगर परिवार में हार्ट डिजीज या डायबिटीज की हिस्ट्री है, तो बच्चों में इसका खतरा डबल या ट्रिपल तक हो सकता है.
कब कराएं हार्ट चेकअप?
डॉक्टर सलाह देते हैं कि अगर फैमिली हिस्ट्री है, तो 25 साल से पहले एक बार पूरा हार्ट चेकअप जरूर कराना चाहिए. जिन लोगों की फैमिली हिस्ट्री नहीं है, उन्हें भी 30 साल की उम्र तक स्क्रीनिंग करानी चाहिए. इससे रिस्क फैक्टर्स समय रहते कंट्रोल किए जा सकते हैं.
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हार्ट को हेल्दी रखने के आसान उपाय
योग, प्राणायाम और रेगुलर एक्सरसाइज दिल और दिमाग दोनों के लिए फायदेमंद हैं. सही डाइट, स्ट्रेस मैनेजमेंट और समय पर जांच से हार्ट अटैक का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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