कई बार ऐसा होता है कि मैं आराम से बैठकर खाना खा रही होती हूं या किसी से मजे में बात कर रही होती हूं, तो मुझे अचानक से हिचकी आनी शुरू हो जाती है. एक-दो बार आए तो हंसी आती है, लेकिन जब यह रुकने का नाम नहीं लेती, तो बड़ी खीझ होने लगती है. ऑफिस की मीटिंग हो, पढ़ाई का टाइम हो या कोई गंभीर बात चल रही हो, हिचकी किसी भी वक्त बिन बुलाए मेहमान की तरह टपक पड़ती है.
पुराने जमाने में दादी-नानी कहा करती थीं कि जब कोई आपको दिल से याद करता है, तब हिचकी आती है. यह सुनने में तो बड़ा अच्छा लगता है और हम सोचने भी लगते हैं कि पता नहीं कौन याद कर रहा होगा, लेकिन अगर साइंस की नजर से देखें, तो मामला कुछ और ही होता है.
हिचकी आने के पीछे की असली कहानी
हमारे पेट और छाती के बीच में एक बहुत पतली और चौड़ी मांसपेशी होती है, जिसे डायाफ्राम कहा जाता है. जब हम सांस अंदर खींचते हैं, तो यह नीचे की तरफ जाती है ताकि फेफड़ों में हवा भर सके. जब हम सांस छोड़ते हैं, तो यह वापस अपनी जगह आ जाती है.
सब कुछ बड़े हिसाब से चलता रहता है. लेकिन कभी-कभी इस डायाफ्राम में अचानक से झटका या अकड़न आ जाती है. इस झटके की वजह से हवा बहुत तेजी से हमारे गले के अंदर खींचती है. जैसे ही हवा तेजी से अंदर जाती है, हमारे गले में मौजूद वोकल कॉर्ड अचानक से बंद हो जाता है. इसी बंद होने के झटके से वो खास 'हिच' की आवाज निकलती है जिसे हम हिचकी कहते हैं.
आखिर क्यों होती है डायाफ्राम में यह हलचल?
रोजमर्रा की जिंदगी में हम कई ऐसी अनजानी चीजें कर बैठते हैं, जिससे हमारे पेट को झटका लगता है और हिचकी शुरू हो जाती है,
- बहुत जल्दी-जल्दी खाना: जब हम बहुत हड़बड़ी में खाना खाते हैं, तो खाने के साथ-साथ बहुत सारी हवा भी पेट के अंदर चली जाती है. पेट अचानक से फूल जाता है और नीचे मौजूद डायाफ्राम पर दबाव पड़ता है, जिससे हिचकी चालू हो जाती है.
- ज्यादा तीखा या मसालेदार खाना: चटपटा और बहुत तीखा खाना किसे पसंद नहीं होता? लेकिन ज्यादा मिर्च-मसाला खाने से पेट में गैस और जलन बनने लगती है. यह जलन डायाफ्राम को परेशान करती है और वह अचानक से सिकुड़ने लगता है.
- कोल्ड ड्रिंक या सोडा पीना: कोल्ड ड्रिंक्स में बहुत सारी गैस होती है. जब हम एक ही सांस में ठंडी बोतल खाली कर देते हैं, तो पेट में अचानक बहुत सारी गैस जमा हो जाती है जो डायाफ्राम को झटका देती है.
- ज्यादा ठंडे के बाद तुरंत गर्म खा लेना: अचानक से शरीर का तापमान बदलना भी इसका एक बड़ा कारण है. जैसे बहुत तेज धूप से आकर तुरंत बर्फ का पानी पी लेना या एकदम गर्म चाय के बाद ठंडा पानी पी लेना.
- बहुत ज्यादा हंसना या तनाव लेना: जब हम बिना रुके बहुत जोर-जोर से हंसते हैं या फिर बहुत ज्यादा टेंशन में होते हैं, तो हमारी सांस लेने की गति बिगड़ जाती है. सांस ऊपर-नीचे होने से भी हिचकी आने लगती है.
हिचकी रोकने के घरेलू तरीके:
- सांस रोककर रखें: यह सबसे पुराना और पक्का तरीका है. एक लंबी सांस अंदर खींचें और जितनी देर हो सके उसे रोककर रखें. फिर धीरे-धीरे सांस छोड़ें. इससे फेफड़ों में कार्बन डाइऑक्साइड का लेवल थोड़ा बढ़ता है और डायाफ्राम शांत हो जाता है.
- एक गिलास ठंडा पानी पिएं: जैसे ही हिचकी आए, धीरे-धीरे करके एक-दो घूंट ठंडा पानी पिएं. पानी निगलते वक्त गले की नसें सक्रिय होती हैं और हिचकी का चक्र टूट जाता है.
- चीनी या मिश्री का एक चम्मच: जीभ पर एक चम्मच चीनी रखें और उसे तुरंत चबाने के बजाय धीरे-धीरे गलने दें. चीनी का मीठा स्वाद दिमाग का ध्यान भटका देता है और हिचकी रुक जाती है.
- नीबू और चाट मसाला: अगर आपके पास नीबू है, तो उसकी एक फांक पर थोड़ा सा काला नमक या चाट मसाला लगाकर चूसें. इसका खट्टा-नमकीन स्वाद तुरंत असर दिखाता है.
- कान बंद करना: अपनी दोनों उंगलियों से कानों को कुछ सेकेंड के लिए कसकर बंद कर लें और फिर पानी की एक-दो घूंट पिएं. इससे भी गले की नसों को आराम मिलता है.
- ध्यान भटकाना: अगर आपके घर में किसी को हिचकी आ रही है, तो उससे कोई अचानक ऐसा सवाल पूछ लें जिसका जवाब देने के लिए उसे बहुत सोचना पड़े. जब दिमाग का ध्यान भटकता है तो डायाफ्राम की अकड़न अपने आप ढीली पड़ जाती है.
इसे भी पढ़ें: क्या मूंगफली कोलेस्ट्रॉल के लिए अच्छी है या बुरी?
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं