मेनोपॉज एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जो महिलाओं के शरीर में काफी तेजी से हार्मोनल परिवर्तन के कारण होता है. यह एक महिला के जीवन का महत्वपूर्ण समय होता है जिसमें उनके मासिक धर्म की समाप्ति होती है. यह समय आमतौर पर महिलाओं में 45-55 वर्ष की उम्र के बीच में होता है, लेकिन भारत में अब 30 की उम्र पार करते ही कई महिलाओं में हार्मोनल बदलाव होने के कारण वह प्री-मेनोपॉज का शिकार बन रही हैं. आइए जानते है क्या है प्री-मेनोपॉज का कारण, लक्षण और बचाव के लिए क्या उपाय कर सकते हैं.
प्री-मेनोपॉज क्या है कारण और लक्षण?
कारण-
महिलाओं के शरीर में दो प्रकार के प्रमुख हार्मोन, एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन होते है, इन दोनो हार्मोन के स्तर में उतार-चढ़ाव के कारण महिलाएं प्री-मेनोपॉज के लक्षणों से जूझ सकती हैं. जिसकी वजह से प्रजनन क्षमता कम हो जाती है. कुछ महिलाओं में इसका असर थोडे़ समय तक ही रहता है जबकि, कुछ महिलाएं कई वर्षों तक इसके लक्षणों से जूझते हैं.
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Photo Credit: AI Generated Image
लक्षण-
मेनोपॉज में कभी-कभार आपको शारीरिक बदलाव नजर नहीं आते हैं और कभी अलग-अलग लक्षण दिखाई देते हैं जैसे, अनियमित मासिक चक्र, हॉट फ्लैश या नींद की समस्या. प्री-मेनोपॉज के समय ओव्यूलेशन में मदद करने वाले हार्मोन कम मात्रा में बनने के कारण महिलाओं में मासिक चक्र अनियमित हो जाता है. कभी तो यह समय से लंबा चल सकता है और तो कभी समय से पहले ही खत्म हो सकता है.
कैसे करें बचाव?
मेनोपॉज कोई बीमारी नहीं होती है जिसका इलाज करना पड़े. लेकिन आप प्री-मेनोपॉज से जूझ रहे है तो उसके लिए उपचार हैं जो लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं. इसके लिए आपको जीवनशैली में बदलाव की जरूरत होती है जिसमें आप अपने खान-पान में बदलाव करके कैल्शियम, विटामिन D, ओमेगा-3 और फाइटोएस्ट्रोजेन्स से भरपूर आहार लें और नियमित व्यायाम करने से भी फायदा हो सकता है. अगर आप धूम्रपान करते हैं तो छोड़ दें, इसके अलावा आप हार्मोनल थेरेपी, हॉट फ्लैश के इलाज के लिए प्रिस्क्रिप्शन दवाइयां ले सकते हैं.
प्रस्तुती- Bobby Raj
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