बारिश का मौसम देखने में जितना अच्छा लगता है, यह मौसम संक्रमण और पाचन संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ा देता है. हवा में ज्यादा नमी होने के कारण बैक्टीरिया, फंगस और कीड़े-मकोड़े तेजी से पनपते हैं. यही वजह है कि मानसून में खानपान को लेकर थोड़ी सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है.
अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल्स ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर कुछ ऐसी चीजों के बारे में बताया है, जिनका सेवन बारिश के मौसम में सावधानी के साथ करना चाहिए. इनमें पालक, फूलगोभी और मशरूम जैसी चीजें शामिल हैं, क्योंकि इनमें नमी के कारण बैक्टीरिया, फंगस या कीड़ों के पनपने की संभावना बढ़ सकती है. वहीं दूसरी ओर लौकी, कद्दू, कॉर्न, दाल और चना जैसी चीजें इस मौसम में बेहतर विकल्प माने जाते हैं. ये न केवल शरीर को जरूरी पोषण प्रदान करते हैं, बल्कि पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में भी मदद कर सकते हैं.
मानसून में पालक क्यों नहीं खाना चाहिए?
पालक आयरन और विटामिन से भरपूर होती है, लेकिन बारिश के मौसम में इसकी पत्तियों पर मिट्टी और कीड़े आसानी से चिपक जाते हैं. नमी के कारण इनमें बैक्टीरिया बढ़ने का खतरा भी ज्यादा रहता है. अगर पालक अच्छी तरह साफ न की जाए तो पेट खराब होने, गैस और संक्रमण जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
फूलगोभी से क्यों बचना चाहिए?
फूलगोभी की बनावट ऐसी होती है जिसमें छोटे-छोटे कीड़े और गंदगी आसानी से छिप सकती है. बारिश के मौसम में इनमें कीड़ों की संख्या बढ़ जाती है, इसके अलावा फूलगोभी कुछ लोगों में गैस और ब्लोटिंग की समस्या भी बढ़ा सकती है.
मशरूम कैसे बन सकती है परेशानी का कारण?
मानसून के दौरान अगर मशरूम की क्वालिटी अच्छी न हो या उसे सही तरीके से स्टोर न किया गया हो तो उसमें फफूंद और बैक्टीरिया विकसित हो सकते हैं, जिससे पेट संबंधी दिक्कतें होने का जोखिम बढ़ सकता है.
लौकी क्यों है मानसून की सुपरफूड?
लौकी में पानी की मात्रा अधिक होती है और यह बहुत हल्की सब्जी मानी जाती है. यह आसानी से पच जाती है और पेट पर ज्यादा दबाव नहीं डालती.
कद्दू खाने के फायदे
कद्दू विटामिन ए, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स का अच्छा स्रोत है. यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद कर सकता है. इतना ही नहीं, कद्दू पेट को भारी नहीं करता और लंबे समय तक एनर्जी बनाए रखने में मदद करता है.
कॉर्न क्यों है मानसून की पहचान?
कॉर्न में फाइबर, कार्बोहाइड्रेट और कई जरूरी पोषक तत्व होते हैं, जो पेट को भरा रखते हैं और शरीर को एनर्जेटिक बबनाए रखने में मदद करते हैं.
दाल और चना क्यों हैं जरूरी?
दाल और चना प्रोटीन के बेहतरीन स्रोत हैं. मानसून में जब संक्रमण का खतरा बढ़ता है, तब शरीर को मजबूत रखने के लिए पर्याप्त प्रोटीन जरूरी होता है. ऐसे में दालें आसानी से पच जाती हैं. वहीं, चना फाइबर और पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जो लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करता है.
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