दूध से चमकते हुए बच्चों छोटे-छोटे दांत देखकर ही मन खुश हो जाता है. लेकिन आज के समय में छोटे-छोटे बच्चों के दांतों में कीड़ा लगना यानी कैविटी होना आम बात हो गई है. कम उम्र में ही दांतों में काले-काले धब्बे होना और दर्द उठना एक बड़ी समस्या बन गई है. अगर आप भी या आपके बच्चे इस समस्या से परेशान हैं, तो सीताराम भारतीया इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड रिसर्च की सीनियर कंसल्टेंट और चाइल्ड एंड अडोएलेसेंट पीडियाट्रिशियन डॉ. नेहा जोशी कुछ जरूर जानकारी बताई है. डॉक्टर जोशी का कहना है कि बच्चों की ओरल हेल्थ यानी मुंह और दांतों की सफाई पर शुरुआत से ध्यान देना बेहद जरूरी है.
दांतों में कैविटी क्यों होती है?
1. चीनी और मीठी चीजें-
चॉकलेट, टॉफी, चिप्स, और मीठे बिस्कुट बच्चों के सबसे बड़े दुश्मन हैं. जब बच्चा मीठा खाता है, तो मुंह में मौजूद बैक्टीरिया उस शुगर से मिलकर एसिड बनाते हैं. यह एसिड धीरे-धीरे दांतों की ऊपरी मजबूत परत को कमजोर कर देता है.

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2. बोतल मुंह में लेकर सोना-
अक्सर माता-पिता बच्चों को रात को दूध की बोतल या जूस पिलाते-पिलाते सुला देते हैं. दूध या मीठे ड्रिंक लंबे समय तक दांतों के संपर्क में रहते हैं, जिससे बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं.
3. ब्रशिंग की सही आदत न होना-
छोटे बच्चे खुद से ठीक से ब्रश नहीं करते. अगर पैरेंट्स उनके दांतों की सफाई का ध्यान न रखें, तो खाने के कण दांतों में फंसे रह जाते हैं और वहां कैविटी बन जाती है.
कैविटी से बच्चों को कैसे बचाएं?
- बच्चे के पहले दूध के दांत आने के साथ ही उसकी सफाई शुरू कर दें. बड़े होने पर उसे सुबह और रात को सोने से पहले दिन में दो बार ब्रश करने की अच्छी आदत डालें.
- बच्चे को चॉकलेट या चिप्स खाने से पूरी तरह रोकना तो मुश्किल है, लेकिन यह जरूर सिखाएं कि कुछ भी मीठा या चिपचिपा खाने के बाद तुरंत मुंह में पानी भरकर अच्छे से कुल्ला कर लें.
- रात को सोते समय बच्चे के मुंह में दूध की बोतल न छोड़ें. अगर दूध पिलाना ही है, तो पिलाने के बाद हल्के गीले कपड़े या सूती सूती कपड़े से उसके दांतों को पोंछ दें.
- खाने में हरी सब्जियां, फल और कैल्शियम से भरपूर चीजें शामिल करें. ये दांतों को मजबूत बनाने का काम करती हैं.
- साल में कम से कम दो बार किसी अच्छे बाल दंत विशेषज्ञ (पीडियाट्रिक डेंटिस्ट) के पास जाकर बच्चों के दांतों की जांच जरूर करवाएं.
एक्सपर्ट के बारे मेंः डॉ. नेहा जोशी बच्चों और किशोरों की स्वास्थ्य विशेषज्ञ (Child & Adolescent Paediatrician) हैं और वर्तमान में सीताराम भारतीया इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड रिसर्च में सीनियर कंसल्टेंट एवं डिपार्टमेंटल एडमिनिस्ट्रेटिव लीड के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें नवजात शिशुओं, बच्चों और किशोरों की देखभाल के क्षेत्र में 18 वर्षों से अधिक का अनुभव है
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