रूस के साइबेरियाई इलाके से एक खौफनाक मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य महकमे के हाथ-पांव फुला दिए हैं. एक प्रमुख प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट में काम करने वाली महिला कर्मचारी की एक 'अज्ञात' निमोनिया के चलते मौत हो गई. इसके तुरंत बाद प्रशासन ने एहतियातन पूरे अस्पताल को क्वारंटीन कर दिया है और मृतका के संपर्क में आए तमाम लोगों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है.
स्थानीय सरकारी टीवी के मुताबिक महिला ने पिछले हफ्ते दम तोड़ा था. हालांकि रूसी एजेंसियों का दावा है कि महिला की मौत उन रोगाणुओं (Pathogens) से नहीं हुई है जिन पर वह लैब में रिसर्च कर रही थी. इसके बावजूद पूरे देश में दहशत का माहौल है, क्योंकि कुछ स्थानीय और अपुष्ट मीडिया रिपोर्ट्स में यह आशंका जताई गई है कि उसकी जान न्यूमोनिक प्लेग (Pneumonic Plague) की वजह से गई हो सकती है.जो प्लेग का सबसे घातक और इंसानों से इंसानों में तेजी से फैलने वाला रूप है.
अस्पताल पूरी तरह सील, रूटीन टेस्ट भी रोके गए
मृतक महिला दक्षिण-पूर्वी साइबेरिया के इरकुत्स्क में स्थित 'एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ साइबेरिया एंड द फार ईस्ट' में कार्यरत थी. बीमारी बिगड़ने पर उसे पास के शहर शेलेखोव के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसने अंतिम सांस ली.
शेलेखोव के मेयर मैक्सिम मोदिन ने बताया कि खतरे को देखते हुए अस्पताल को पूरी तरह क्वारंटीन कर दिया गया है.
- न तो किसी नए मरीज को भर्ती किया जा रहा है और न ही पुराने मरीजों को छुट्टी दी जा रही है.
- लैब में होने वाले सामान्य टेस्ट भी रोक दिए गए हैं.
- हालांकि, राहत की बात यह है कि अस्पताल का ओपीडी (आउटपेशेंट) विभाग चालू रखा गया है.
'बेहद खतरनाक संक्रमण' का अंदेशा, एक्शन में रूस का शीर्ष तंत्र
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रूस की कंज्यूमर हेल्थ वॉचडॉग एजेंसी 'रोस्पोट्रेबनादजोर' (Rospotrebnadzor) की प्रमुख अन्ना पोपोवा खुद फौरन इरकुत्स्क पहुंचीं और गवर्नर इगोर कोबजेव समेत आला अधिकारियों के साथ आपात बैठक की.
गवर्नर कोबजेव ने इसे सीधे-सीधे किसी बीमारी का नाम न देते हुए "अत्यधिक खतरनाक संक्रमण का संदिग्ध मामला" बताया. उन्होंने साफ किया कि महिला के संपर्क में आए हर शख्स को डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है और पूरे इलाके में सख्त एंटी-एपिडेमिक प्रोटोकॉल लागू किए जा रहे हैं.
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दूसरी ओर, रोस्पोट्रेबनादजोर ने रविवार को कहा कि जांच में किसी ऐसे बैक्टीरिया या वायरस का कोई सबूत नहीं मिला है जो महिला के लैब के काम से जुड़ा हो. एजेंसी के मुताबिक संपर्क में आए लोगों की जांच में दो लोग सामान्य सर्दी-जुकाम और दो लोग कोविड-19 पॉजिटिव पाए गए, जबकि बाकी सभी की रिपोर्ट नेगेटिव आई है.
ट्रंप ने कहा - 'खतरनाक बीमारी, रोगाणु फौज की तरह मजबूत हो गए हैं'
यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है. वाशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वह इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं और जरूरत पड़ने पर अमेरिका मदद को तैयार है.
ट्रंप ने कहा:
वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि फिलहाल घबराने की कोई ठोस वजह नहीं है, लेकिन अमेरिका स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है क्योंकि क्वारंटीन नियमों के बावजूद ऐसे संक्रमणों के तेजी से फैलने का अंदेशा बना रहता है.
अफवाहों पर ध्यान न दें: क्रेमलिन
स्थानीय स्वतंत्र मीडिया आउटलेट 'ल्यूदी बैकाला' (Lyudi Baikala) ने अज्ञात सूत्रों के हवाले से दावा किया था कि जान गंवाने वाली 28 वर्षीय लैब टेक्नीशियन न्यूमोनिक प्लेग का शिकार हुई थी और कई अस्पतालों को सील किया गया है.
इस पर क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने साफ कहा कि लोग और मीडिया अफवाहों और अटकलों पर यकीन करने के बजाय सरकारी एजेंसियों के आधिकारिक बयानों पर भरोसा रखें.
एहतियात के तौर पर शेलेखोव स्थित 'इरकुत्स्क एल्युमिनियम प्लांट' ने अपने सभी कर्मचारियों के लिए मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया है. प्लांट के डायरेक्टर आर्ट्योम फोमिनिख ने कहा, "पैनिक होने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी बरतने में ही समझदारी है."
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क्या है न्यूमोनिक प्लेग और यह कितना जानलेवा है?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, न्यूमोनिक प्लेग मुख्य रूप से यर्सिनिया पेस्टिस(Yersinia pestis) बैक्टीरिया से फैलता है, जो आमतौर पर छोटे जंगली स्तनधारी जीवों और उनके पिस्सुओं (fleas) में पाया जाता है.
यह प्लेग का सबसे दुर्लभ लेकिन सबसे खतरनाक रूप है.
ब्यूबोनिक प्लेग के उलट, न्यूमोनिक प्लेग खांसने या छींकने पर हवा की बूंदों (Droplets) के जरिए सीधे एक इंसान से दूसरे इंसान में फैल सकता है.
समय पर इलाज न मिलने पर यह फेफड़ों को बुरी तरह जकड़ लेता है और चंद घंटों में जानलेवा साबित हो सकता है.
लंदन के इंपीरियल कॉलेज के विशेषज्ञ डॉ. मलिक गिबानी का कहना है कि किसी लैब में ऐसे एक्सपोजर के शक मात्र पर भी संपर्क में आए लोगों को तुरंत ट्रेस कर निगरानी में रखना सामान्य प्रक्रिया है. वहीं, रीडिंग यूनिवर्सिटी के वायरोलॉजिस्ट प्रोफेसर इयान जोन्स के मुताबिक, प्लेग का इतिहास भले ही खौफनाक रहा हो और यह आज भी दुनिया के कई हिस्सों में मौजूद हो, लेकिन आधुनिक एंटीबायोटिक्स और बेहतर जीवनशैली की वजह से अब इसके बेकाबू महामारी बनने की गुंजाइश काफी कम रहती है.
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं