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रूस में फैल रही है कोरोना जैसी बीमारी? लैब में हादसे से मौत तक का पूरा घटनाक्रम और 'प्लेग' के दावों की हकीकत

रूस की एक लैब में 28 वर्षीय महिला कर्मचारी की मौत के बाद सोशल मीडिया पर प्लेग और नई महामारी को लेकर दावे किए जा रहे हैं. लेकिन क्या वाकई दुनिया किसी नए स्वास्थ्य संकट की ओर बढ़ रही है? एक्सपर्ट्स और आधिकारिक रिपोर्ट्स क्या कहती हैं, जानिए.

रूस में फैल रही है कोरोना जैसी बीमारी? लैब में हादसे से मौत तक का पूरा घटनाक्रम और 'प्लेग' के दावों की हकीकत
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सोशल मीडिया पर एक बार फिर 'लैब लीक' और 'नई महामारी' को लेकर दहशत का माहौल बनाया जा रहा है. एक्स (Twitter) पर कई पोस्ट्स में दावा किया जा रहा है कि रूस में कोरोना से भी घातक बीमारी फैल रही है. खासकर सोशल मीड‍िया पर इस खबर ने तूल पकड़ लिया. कई जगह इस घटना को कोरोना से बड़ी चूक और बेहद खतरनाक बताया गया, वहीं कई जगह इस दावे को गलत करार द‍िया जा रहा है और कहा जा रहा है कि यह सामान्‍य न‍िमोन‍िया का मामला है. 

कुल म‍िलाकर रूस की लैब में 28 वर्षीय कर्मचारी की मौत के बाद प्लेग आउटब्रेक की चर्चा काफी तेज है. तो चल‍िए जानते हैं क्या यह नई महामारी का खतरा है या सोशल मीडिया अफवाह भर - 

लेकिन इस दावे में कितनी सच्चाई है? क्या वाकई दुनिया के सिर पर किसी नए 'प्लेग आउटब्रेक' का खतरा मंडरा रहा है, या यह एक स्थानीय लैब हादसा है जिसे सोशल मीडिया पर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है?

साइबेरिया की लैब में असल में हुआ क्या था?

पूरा घटनाक्रम समझने के लिए हमने रूस की एक समाचार वेबसाइट से जानकारी हांस‍िल की. द मोस्‍को टाइम्‍स और रूस के साइबेरियाई क्षेत्र (इरकुत्स्क / शेलेखोव) से सामने आई आधिकारिक और स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार घटनाक्रम कुछ ऐसा रहा. 

> एक रिसर्च लैब में सैंपल इकट्ठा करने के दौरान 28 वर्षीय महिला लैब वर्कर से जीवित बैक्टीरिया वाली टेस्ट-ट्यूब गलती से टूट गई.
> उसने इस बात की जानकारी मेड‍िकल स्‍टाफ को दी कि टेस्‍ट के ल‍िए सेंपल कलेक्‍ट करते हुए उससे गलती से टेस्‍ट ट्यूब टूट गई है.
> उसे मंगलवार को अस्‍पताल में भर्ती कराया गया. इसके बाद उसमें न‍िमोनिया जैसे लक्षण दिखे. 
> हालत बिगड़ने पर उसे वेंटिलेटर पर रखा गया, जहां इलाज के दौरान और गुरुवार को उसकी मौत हो गई.   
> ऐहतियात के तौर पर संबंधित अस्पताल और लैब से जुड़े करीब 197 से 200 लोगों को मेडिकल ऑब्जर्वेशन और क्वारंटीन में रखा गया.
> इरकुत्स्क के गवर्नर इगोर कोबजेव के अनुसार, निगरानी में रखे गए सभी संपर्कों (Contacts) के टेस्ट अब तक निगेटिव आए हैं और किसी में भी बीमारी के लक्षण नहीं पाए गए हैं.

पूरी खबर आप यहां पढ़ सकते हैं.

The Anti-Plague Research Institute in Shelekhov was founded in 1934 as a scientific operative body for controlling plague

ये है वो लैब जहां हादसा हुआ. Photo Credit: Picture quality enhanced through AI

सोशल मीडिया के दावों की पड़ताल

सोशल मीडिया हेंडल एक्‍स पर एक बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन एक्सपर्ट, लेखक टॉड हागोपियन ने ट्वीट किया और इसे 'कोरोना से भी खतरनाक' बताया. 

यह गौर करें कि टॉड हागोपियन बेशक एक बड़ा चेहरा हैं, लेक‍िन वे कोई वायरोलॉजिस्ट, डॉक्टर या मेडिकल साइंटिस्ट नहीं हैं. फ‍िर भी एक बड़े नाम की तरफ से ऐसे पोस्‍ट करना लोगों में डर और शक पैदा कर रहा है. 

इस मामले में सोशल म‍ीड‍िया पर फैली खबरों को व‍िश्‍लेषण करते हुए डॉ. कृतिका कुप्पल्ली (संक्रामक रोग विशेषज्ञ, वैश्विक स्वास्थ्य एवं उभरते संक्रमणों की विशेषज्ञ) एक्‍स पर ल‍िखती हैं - 

"प्लेग एक गंभीर संक्रामक बीमारी है और अगर किसी हाई-कंटेनमेंट लैब से जुड़ी घटना की बात सामने आती है, तो उसकी गहन और वैज्ञानिक जांच होना बेहद जरूरी है. लेकिन फिलहाल रूस से आई रिपोर्टों में केवल निमोनिया से हुई एक अस्पष्ट मौत की जानकारी है. अभी तक न तो प्लेग संक्रमण की पुष्टि हुई है और न ही किसी प्लेग प्रकोप के सबूत सामने आए हैं.

ऐसे मामलों में सतर्क रहना और आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना बेहद अहम है. अधूरी जानकारी के आधार पर अटकलें लगाना या सनसनी फैलाना लोगों में अनावश्यक डर पैदा कर सकता है.

किसी भी संभावित प्रकोप की जांच और उससे निपटने का सबसे अच्छा तरीका वही है जो सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ हमेशा अपनाते हैं, यानी तथ्यों और वैज्ञानिक साक्ष्यों का पालन करना. जब तक ठोस प्रमाण न हों, तब तक अफवाहों के बजाय प्रमाण-आधारित जानकारी पर भरोसा करना चाहिए."

यह प्लेग है या नहीं? और यह इतना खतरनाक क्यों माना जा रहा है?

यह कह पाना अभी संभव नहीं है कि यह प्लेग ही है. डॉ. संदीप नायर कहते हैं कि‍ जब तक आध‍िकार‍िक तौर पर पुष्‍ट‍ि न हो कि‍सी भी तरह का क्‍लेम करना ही नहीं. वहीं इस बात पर भी गौर किया जाना चाह‍िए कि लैब वर्कर जिस बैक्टीरिया के संपर्क में आई थी, वह 'यर्सिनिया पेस्टिस' (Yersinia pestis) था. वही जीवाणु जो ऐतिहासिक 'ब्लैक डेथ' (Black Death) के लिए जिम्मेदार रहा है.

मेडिकल साइंस के नजरिए से इस मामले में सबसे बड़ी चिंता का कारण इसका रूप था:

प्‍लेग कई तरह का होता है. इस मामले को गंभीर बनाने के पीछे प्‍लेग का प्रकार है. असल में मह‍िला प्‍लेग के ज‍िस रूप से संक्रम‍ि त हुई थी वह ग्रंथियों को प्रभावित करता है और सबसे जानलेवा प्रकार में से एक है. यह मामला ब्यूबोनिक प्लेग का था.

यह बैक्टीरिया सीधे सांस के जरिए फेफड़ों में पहुंचता है, तो इसे 'न्यूमोनिक प्लेग' (Pneumonic Plague) कहा जाता है.

न्यूमोनिक प्लेग, प्लेग का सबसे घातक और संक्रामक रूप है, क्योंकि यह मरीज के खांसने या छींकने से हवा (ड्रॉपलेट्स) के जरिए एक इंसान से दूसरे में फैल सकता है. यही वजह है कि इसे लेकर स्वास्थ्य एजेंसियां तुरंत हरकत में आईं और 200 लोगों को क्वारंटीन किया गया.

प्लेग के 3 प्रमुख प्रकार

  • ब्यूबोनिक प्लेग
  • सेप्टीसीमिक प्लेग
  • न्यूमोनिक प्लेग

क्या यह कोरोना जैसा नया आउटब्रेक बन सकता है?

इस मामले को और अच्‍छी तरह समझने के लिए एनडीटीवी ने बात की BLK-Max अस्पताल, दिल्ली के प्रिंसिपल डायरेक्टर और पल्मोनोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. संदीप नायर से. वे संक्रामक रोग विशेषज्ञ (Epidemiologists) हैं. उनका कहना है कि इस घटना की तुलना कोरोना वायरस (COVID-19) से करना वैज्ञानिक रूप सही नहीं है. इसके पीछे कई वजहें हैं, जैसे- 

बैक्टीरिया है वायरस नहीं: कोरोना एक वायरस का नया वेर‍िएंट था, जिसके खिलाफ इंसानी शरीर में कोई इम्यूनिटी नहीं थी और न ही शुरुआत में कोई दवा मौजूद थी. प्लेग कोई नया वायरस नहीं, बल्कि एक ज्ञात बैक्टीरिया है, ज‍िसके ल‍िए दवाएं भी मौजूद हैं.
इलाज है : प्लेग का इलाज आधुनिक ब्रॉड-स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक्स से पूरी तरह संभव है. अगर लक्षण दिखने के शुरुआती 24 घंटों के भीतर मरीज या उसके संपर्कों को एंटीबायोटिक दे दी जाए, तो यह जानलेवा नहीं रहता और आगे फैलने की चेन टूट जाती है.
फैलाव की ल‍िम‍िट है: सबसे बड़ी बात यह है कि प्‍लेग अब कोई रहस्यमयी अज्ञात वायरस नहीं है, जो हवा में चुपचाप हफ्तों तक फैलता रहे. साइबेरियाई क्षेत्र में स्वास्थ्य एजेंसियों ने तुरंत 'कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग' और 'आइसोलेशन' लागू कर दिया है. इसे कंट्रोल किया जा सकता है. 

विशेषज्ञों का कहना है कि लैब सुरक्षा में चूक यकीनन एक गंभीर जांच का विषय है, लेकिन इसे वैश्विक महामारी का रूप देना गैर-जिम्मेदाराना है.

रूस में घटी यह घटना एक दुखद और गंभीर लैब दुर्घटना है, जिसने एक स्वास्थ्य कर्मी की जान ले ली और सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े किए हैं. चूंकि इसमें 'न्यूमोनिक प्लेग' का बैक्टीरिया शामिल था, इसलिए प्रशासन ने बेहत सतर्कता बरतते हुए व्यापक क्वारंटीन कदम उठाए. जोक‍ि सराहनीय हैं और हमें डरने या अफवाह फैलाने की बजाए इस कदम की सराहना करनी चाह‍िए. 

डॉक्‍टर संदीप नायर ने कहा कि अभी इसे 'नया कोरोना' या 'वैश्विक प्लेग महामारी' कहना बेहद जल्‍दबाजी है और मेडिकल फैक्ट्स से परे स‍िर्फ सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा डर कहा जा सकता है. जब तक मरीज के संपर्कों में संक्रमण की पुष्टि नहीं होती और चेन बाहर नहीं निकलती, तब तक इसे एक कंट्रोल्‍ड स्थानीय सुरक्षा चूक ही माना जाना चाहिए.

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