चीन की वेस्टलेक यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक वेन लियाओयोंग की टीम ने ऐसी नई तकनीक विकसित की है, जिससे खून की सिर्फ एक बूंद से शुरुआती स्टेज के कैंसर की जांच हो सकेगी. टीम ने पहले फ्रिज जितनी बड़ी डिटेक्शन मशीन को छोटा करके हाथ में आने वाले डिवाइस में बदल दिया है. दावा है कि यह तकनीक पारंपरिक तरीकों के मुकाबले करीब 10,000 गुना ज्यादा सटीक है और इसकी स्टडी जर्नल नेचर फोटोनिक्स में प्रकाशित हुई है.
कैंसर जांच में आ सकती है बड़ी क्रांति
कैंसर दुनिया की सबसे गंभीर बीमारियों में गिना जाता है. खासतौर पर फेफड़ों का कैंसर अक्सर तब पता चलता है, जब बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है. ऐसे में अगर शुरुआती स्टेज में ही कैंसर का पता चल जाए, तो इलाज आसान और ज्यादा प्रभावी हो सकता है. अब चीन के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी नई तकनीक विकसित की है, जो भविष्य में कैंसर जांच का तरीका पूरी तरह बदल सकती है. यह छोटा-सा डिवाइस सिर्फ खून की एक बूंद से कैंसर के बायोमार्कर पहचान सकता है. सबसे खास बात यह है कि यह तकनीक पारंपरिक जांच तरीकों से करीब 10,000 गुना ज्यादा संवेदनशील बताई जा रही है. वैज्ञानिकों का मानना है कि इससे शुरुआती स्टेज के फेफड़ों के कैंसर का पता लगाना काफी आसान हो सकता है.
फ्रिज जितनी मशीन अब हथेली में
चीन की वेस्टलेक विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक वेन लियाओयोंग और उनकी टीम ने इस नई तकनीक को विकसित किया है. उन्होंने एक ऐसे बड़े सिस्टम को जो पहले फ्रिज जितना बड़ा हुआ करता था, अब हथेली में आने वाले छोटे डिवाइस में बदल दिया है. यह डिवाइस बेहद कम मात्रा में मौजूद कैंसर बायोमार्कर को भी पहचान सकता है.
कैसे काम करती है यह तकनीक?
वैज्ञानिकों के अनुसार, कैंसर शरीर में कुछ खास प्रकार के बायोमार्कर छोड़ता है. ये बायोमार्कर बीमारी के शुरुआती संकेत हो सकते हैं, लेकिन सामान्य जांच तकनीकों से इन्हें शुरुआती लेवल पर पकड़ना आसान नहीं होता. नई तकनीक नैनोफोटोनिक बायोसेंसिंग पर बेस्ड है, जो बहुत छोटे स्तर पर मौजूद संकेतों को भी तेजी और सटीकता से पहचान सकती है.

10,000 गुना ज्यादा सेंसिटिव
रिसर्च टीम का दावा है कि यह नई तकनीक पारंपरिक तरीकों की तुलना में करीब 10,000 गुना ज्यादा सेंसिटिव है. इसका मतलब है कि शुरुआती स्टेज में भी कैंसर के संकेतों को आसानी से पहचाना जा सकेगा. इससे मरीजों का इलाज समय रहते शुरू किया जा सकता है, जिससे बीमारी को गंभीर होने से रोका जा सकता है.
घर बैठे भी हो सकेगी जांच
इस रिसर्च के नतीजे 13 मई को प्रसिद्ध वैज्ञानिक जर्नल नेचर फोटोनिक्स में प्रकाशित किए गए. शोधकर्ताओं का कहना है कि यह तकनीक भविष्य में अस्पतालों के अलावा दूरदराज के इलाकों और घरों में भी इस्तेमाल की जा सकती है. यानी आने वाले समय में लोगों को शुरुआती कैंसर जांच के लिए बड़े लैब सिस्टम पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा.
कौन हैं वेन लियाओयोंग?
वेन लियाओयोंग पहले कनेक्टिकट विश्वविद्यालय में रिसर्चर रह चुके हैं. साल 2019 में वे वेस्टलेक यूनिवर्सिटी से जुड़े और अब इंजीनियरिंग स्कूल में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में काम कर रहे हैं. उनका शोध मुख्य रूप से नैनोस्ट्रक्चर्ड मटेरियल और उनके मॉडर्न उपयोगों पर केंद्रित है.
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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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