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ब्रेस्ट कैंसर की पहचान में AI बना मददगार, दुनिया का पहला ट्रायल सफल

AI डॉक्टरों को अधिक संख्या में ब्रेस्ट कैंसर का पता लगाने में मदद करता है. दुनिया में ऐसे पहले ट्रायल में यह पता चला है. स्वीडेन के प्रमुख रिसर्चर्स ने कहा कि नतीजे बताते हैं कि देशों को कम कर्मचारियों वाले रेडियोलॉजिस्ट के बोझ को कम करने के लिए AI की स्कैनिंग पावर का लाभ उठाते हुए प्रोग्राम शुरू करना चाहिए.

ब्रेस्ट कैंसर की पहचान में AI बना मददगार, दुनिया का पहला ट्रायल सफल
AI की मदद से डॉक्टर ब्रेस्ट कैंसर जल्दी पकड़ पा रहे हैं.

Breast Cancer: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की मदद से डॉक्टर अब ब्रेस्ट कैंसर के ज्यादा मामलों का पता लगा पा रहे हैं. दुनिया में पहली बार हुए एक बड़े ट्रायल में यह बात सामने आई है. स्वीडन के प्रमुख रिसर्चर्स ने कहा है कि इस स्टडी के नतीजे बताते हैं कि अलग-अलग देशों को ऐसे प्रोग्राम शुरू करने चाहिए, जिनमें AI की स्कैनिंग क्षमता का इस्तेमाल हो. इससे रेडियोलॉजिस्ट पर काम का बोझ कम किया जा सकता है, क्योंकि इस क्षेत्र में स्टाफ की पहले ही कमी है.

ChatGPT के साल 2022 में आने से बहुत पहले ही वैज्ञानिक मेडिकल स्कैन पढ़ने में AI की क्षमता को परख रहे थे. लेकिन मेडिकल जर्नल The Lancet में प्रकाशित यह नई स्टडी इस तरह का पहला पूरा रैंडमाइज़्ड कंट्रोल ट्रायल है, जिसे रिसर्च का सबसे भरोसेमंद तरीका माना जाता है. इस ट्रायल में 2021 और 2022 के दौरान स्वीडन की 1 लाख से ज्यादा महिलाओं को शामिल किया गया, जिन्हें रूटीन ब्रेस्ट कैंसर स्कैन कराया गया था.

महिलाओं को दो ग्रुप में बांटा गया-

    •    पहले ग्रुप में स्कैन को एक रेडियोलॉजिस्ट ने AI सिस्टम की मदद से देखा.
    •    दूसरे ग्रुप में यूरोप में अपनाए जाने वाले पुराने तरीके का इस्तेमाल हुआ, जिसमें दो रेडियोलॉजिस्ट मिलकर स्कैन देखते हैं.

नतीजे चौंकाने वाले थे. AI की मदद वाले ग्रुप में 9 फीसदी ज्यादा ब्रेस्ट कैंसर के मामले पकड़े गए.

इतना ही नहीं, अगले दो सालों में AI ग्रुप की महिलाओं में रूटीन जांच के बीच कैंसर पकड़े जाने की दर भी 12 फीसदी कम रही. ऐसे मामलों को “इंटरवल कैंसर” कहा जाता है, जो ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं. यह सुधार हर उम्र की महिलाओं और अलग-अलग ब्रेस्ट डेंसिटी वाली महिलाओं में देखा गया. वहीं, गलत रिपोर्ट यानी फॉल्स पॉजिटिव की दर दोनों ग्रुप में लगभग समान रही.

स्टडी की सीनियर लेखक और स्वीडन की लुंड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर क्रिस्टिना लैंग ने कहा कि AI की मदद से मैमोग्राफी को बड़े पैमाने पर अपनाने से रेडियोलॉजिस्ट का काम आसान हो सकता है और कैंसर को शुरुआती स्टेज में पकड़ा जा सकता है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा करते समय सावधानी और लगातार निगरानी जरूरी है. फ्रांस के रेडियोलॉजिस्ट संघ के प्रमुख ज्यां-फिलिप मैसन ने कहा कि AI के साथ-साथ डॉक्टर का अनुभव भी जरूरी है. कई बार AI ऐसी बदलावों को कैंसर समझ लेता है, जो असल में कैंसर नहीं होते.

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वहीं, लंदन की क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर स्टीफन डफी ने कहा कि यह स्टडी दिखाती है कि AI की मदद से कैंसर स्क्रीनिंग सुरक्षित है. लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि इंटरवल कैंसर में आई कमी अभी पूरी तरह निर्णायक नहीं है और आगे फॉलो-अप की जरूरत है. 2023 में आए शुरुआती नतीजों में यह भी सामने आया था कि AI की मदद से रेडियोलॉजिस्ट का स्कैन देखने का समय लगभग आधा हो गया. इस ट्रायल में इस्तेमाल किया गया AI मॉडल Transpara है, जिसे 10 देशों के 2 लाख से ज्यादा पुराने स्कैन पर ट्रेन किया गया था.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, साल 2022 में दुनिया भर में 23 लाख से ज्यादा महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर हुआ, और करीब 6.7 लाख महिलाओं की मौत इस बीमारी से हुई.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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