मरीजों को अट्रैक्ट करने के लिए सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ते मेडिकल प्रचार के बीच नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने डॉक्टर्स और हेल्थ इंस्टीट्यूट्स के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं. इन नियमों को लागू करने का उद्देश्य मेडिकल पेशे में पारदर्शिता बनाए रखना और मरीजों को भ्रामक दावों से बचाना है. नई गाइडलाइंस के तहत डॉक्टर्स और हॉस्पिटल को विज्ञापन, सोशल मीडिया कंटेंट और मरीजों के साथ कम्युनिकेशन करते समय कुछ विशेष सावधानियां बरतने की जरूरत है. यहां जानते हैं इस खबर को विस्तार से-
AI से बनाए गए रिव्यू पर रोक
NMC के नए नियमों के मुताबिक, डॉक्टर और हॉस्पिटल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके फर्जी मरीज रिव्यू, टेस्टीमोनियल्स या एडवरजाइजमेंट सामग्री तैयार नहीं कर सकेंगे. आयोग का मानना है कि ऐसे रिव्यू मरीजों को गुमराह कर सकते हैं और किसी डॉक्टर या हॉस्पिटल की वास्तविक सेवाओं की गलत तस्वीर पेश कर सकते हैं.
Before-After तस्वीरें शेयर करने पर भी सख्ती
कॉस्मेटिक सर्जरी, हेयर ट्रांसप्लांट और अन्य प्रोसेस के प्रचार में अक्सर 'पहले और बाद' की तस्वीरों का इस्तेमाल किया जाता है. NMC का कहना है कि ऐसी तस्वीरें कई बार न होने वाली उम्मीदों को पैदा करती हैं. इसलिए डॉक्टर्स और मेडिकल इंस्टीट्यूट को भ्रामक Before-After फोटो या वीडियो साझा करने से बचने के निर्देश दिए गए हैं.
100 प्रतिशत इलाज जैसे दावों से बचना होगा
नई गाइडलाइंस के तहत डॉक्टर किसी भी बीमारी के इलाज को गारंटीड, 100 प्रतिशत सफल या चमत्कारी बताकर प्रचार नहीं कर सकेंगे. मेडिकल साइंस में हर मरीज की स्थिति अलग होती है, इसलिए ऐसे दावे अनैतिक माने जाएंगे.
सोशल मीडिया पर भी लागू होंगे नियम
NMC ने स्पष्ट किया है कि ये नियम सिर्फ पारंपरिक विज्ञापनों तक सीमित नहीं हैं. इंस्टाग्राम, फेसबुक, यूट्यूब और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर साझा की जाने वाली सामग्री भी इन दिशानिर्देशों के दायरे में आएगी. डॉक्टरों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी ऑनलाइन मौजूदगी पेशेवर और तथ्यपरक हो.
मरीजों को क्या फायदा होगा?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि नई गाइडलाइंस मरीजों को सही और निष्पक्ष जानकारी उपलब्ध कराने में मदद करेंगी. इससे लोग चमकदार विज्ञापनों या फर्जी रिव्यू के बजाय योग्य डॉक्टरों और प्रमाणित चिकित्सा सलाह के आधार पर उपचार का फैसला कर सकेंगे. NMC की यह पहल चिकित्सा क्षेत्र में पेशेवर नैतिकता को मजबूत करने और मरीजों के हितों की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.
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