क्या सरसों के तेल में लहसुन पकाकर मालिश करने से जोड़ों के दर्द, सर्दी-जुकाम और शरीर की जकड़न में राहत मिल सकती है? यह नुस्खा वर्षों से भारतीय घरों में इस्तेमाल होता रहा है. लेकिन इसके फायदे क्या हैं. इसे बनाने का सही तरीका क्या है और किन लोगों को इससे बचना चाहिए? आइए जानते हैं. प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. राम अवतार की राय.
सर्दियों का मौसम हो या शरीर में जकड़न और दर्द, हमारे घरों में दादी-नानी के नुस्खे सबसे पहले याद आते हैं. इनमें सबसे असरदार और आजमाया हुआ नुस्खा है सरसों के तेल में लहसुन पकाकर उससे मालिश करनाबचपन में हल्की सी ठंड लगते ही या छाती जाम होते ही मां इसी तेल से सीने और तलवों की मालिश कर देती थी और अगली सुबह तक सब ठीक हो जाता था.
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह नुस्खा सिर्फ एक घरेलू टोटका है या इसके पीछे कोई गहरा वैज्ञानिक और पारंपरिक आधार भी है? इसी बात को गहराई से समझने के लिए हमने खास बातचीत की डॉ राम अवतार से.
डॉ राम अवतार दिल्ली सरकार के योग विभाग के सेवानिवृत्त प्रोजेक्ट ऑफिसर हैं. और उनके पास योग, ध्यान, नाड़ी विज्ञान, प्राकृतिक चिकित्सा (Naturopathy) और आयुर्वेद के क्षेत्र में 38 से भी ज्यादा सालों का गहरा अनुभव है. उन्होंने हमें बताया कि यह तेल कैसे काम करता है, इसे बनाने का सही तरीका क्या है और किन लोगों को इससे पूरी तरह परहेज करना चाहिए.
सरसों के तेल और लहसुन का मेल: कहां से आया यह चलन?
डॉ राम अवतार बताते हैं कि भारतीय चिकित्सा पद्धति और आयुर्वेद में शरीर के दोषों यानी वात, पित्त और कफ के संतुलन पर सारा जोर दिया गया है हमारे पूर्वजों को जड़ी-बूटियों और रसोई में मौजूद मसालों के तासीर की गहरी समझ थी.
सरसों का तेल अपने आप में तासीर में गर्म होता है और इसमें गहराई तक समाने की जबर्दस्त क्षमता होती हैवहीं लहसुन को आयुर्वेद में महा-औषधि माना गया है, जिसमें तीक्ष्ण और गर्म गुण होते हैं. पुराने जमाने में जब आज जैसी दर्द निवारक दवाइयां नहीं थीं, तब हमारे बुजुर्गों ने देखा कि जब लहसुन को सरसों के तेल में पकाया जाता है, तो लहसुन के सारे औषधीय तत्व तेल में घुल जाते हैं. यह तेल वात दोष यानी वायु से होने वाले दर्दों को खींचने में रामबाण साबित हुआ. वहीं से यह चलन पीढ़ी-दर-पीढ़ी हमारे घरों का अहम हिस्सा बन गया.
सरसों और लहसुन के तेल से मालिश के 5 बड़े फायदे
डॉ राम अवतार के अनुसार जब इस तेल से सही तरीके से मालिश की जाती है, तो शरीर को कई तरह के फायदे मिलते हैं. :
जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द से तुरंत राहत: बढ़ती उम्र में घुटनों का दर्द, कमर दर्द, साइटिका या मांसपेशियों में खिंचाव की समस्या आम हो जाती है. लहसुन में भरपूर मात्रा में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण और एलिसिन नाम का तत्व पाया जाता है. जब सरसों के गर्म तेल से जोड़ों की मालिश की जाती है, तो यह सूजन को कम करता है और अकड़न को खत्म करके खून के दौरे को तेज करता है.
सर्दी, जुकाम और कफ से छुटकारा: सर्दियों के दिनों में या मौसम बदलते ही सीने में कफ जमा हो जाना, पसली चलना या नाक बंद होना परेशान करता है. इस तेल को हल्का गुनगुना करके छाती, पीठ और पैरों के तलवों पर मलने से फेफड़ों में जमी कफ पिघलने लगती है और सांस लेना आसान हो जाता है.
नसों की कमजोरी और सुन्नपन दूर करना: नाड़ी विज्ञान के अनुसार अगर शरीर के किसी हिस्से में खून की सप्लाई धीमी हो जाए, तो वहां सुन्नपन या झनझनाहट होने लगती है. सरसों और लहसुन का तेल नसों को उत्तेजित करता है और उनमें नई जान फूंक देता है.
स्किन इंफेक्शन और फंगल की समस्या: लहसुन में कुदरती एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण होते हैं. अगर पैरों की उंगलियों के बीच फंगस लग जाए या हल्की खुजली हो, तो यह तेल लगाने से आराम मिलता है.
गहरी नींद और तनाव से मुक्ति: रात को सोने से पहले अगर इस गुनगुने तेल से पैरों के तलवों की 10 मिनट मालिश कर ली जाए, तो पूरे दिन की थकान मिट जाती है. यह दिमाग की नसों को शांत करता है जिससे अनिद्रा की समस्या दूर होती है और गहरी नींद आती है.
घर पर कैसे तैयार करें यह खास तेल?
डॉ राम अवतार ने इस तेल को पकाने का सबसे सटीक और असरदार तरीका साझा किया है:
सामग्री:
- 100 मिली शुद्ध कच्ची घानी सरसों का तेल
- 8 से 10 कलियां ताजा लहसुन (हल्का कुचला हुआ)
- 1 छोटा चम्मच मेथी दाना या अजवाइन (अगर उपलब्ध हो)
बनाने की आसान विधि:
- सबसे पहले एक लोहे या पीतल की कड़ाही में सरसों का तेल डालकर धीमी आंच पर हल्का गर्म करें.
- अब इसमें कुचली हुई लहसुन की कलियां डाल देंअगर आप चाहें तो साथ में आधा चम्मच अजवाइन भी डाल सकते हैं. .
- गैस की आंच बिल्कुल धीमी रखें ताकि लहसुन धीरे-धीरे पके और उसके सारे पोषक तत्व तेल में उतर आएंलहसुन को तेज आंच पर जलाना नहीं है.
- जब लहसुन की कलियां सुनहरी-भूरी या हल्की काली होने लगें, तो गैस बंद कर दें.
- तेल को पूरी तरह ठंडा होने दें, फिर इसे छानकर किसी साफ कांच की शीशी में भरकर रख लें.
किन लोगों को इस तेल से मालिश बिल्कुल नहीं करनी चाहिए?
डॉ राम अवतार एक बहुत जरूरी बात पर ध्यान दिलाते हैं. वे कहते हैं. कि हर घरेलू नुस्खा हर किसी के शरीर के लिए मुफीद नहीं होताइस तेल का इस्तेमाल करते वक्त कुछ सावधानियां बरतनी जरूरी हैं.
पित्त प्रकृति वाले लोग: जिन लोगों के शरीर में गर्मी बहुत ज्यादा बनती है, जिन्हें बहुत ज्यादा पसीना आता है, खट्टी डकारें आती हैं. या पेट में हमेशा जलन रहती है, उन्हें इस तेल का ज्यादा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए क्योंकि इसकी तासीर बेहद गर्म होती है.
सेंसिटिव स्किन या एलर्जी की समस्या: जिन लोगों की त्वचा बहुत नाजुक होती है, उन्हें लहसुन के तीखेपन से त्वचा पर लाल चकत्ते, जलन या दाने निकल सकते हैं. इसलिए पूरे शरीर पर लगाने से पहले हाथ के छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट जरूर करें.
कटे-फटे घाव या ताजी चोट पर: अगर त्वचा कहीं से कटी हुई है, छिल गई है या घाव से खून बह रहा है, तो वहां भूलकर भी यह तेल न लगाएंइससे भयंकर जलन और इंफेक्शन हो सकता है.
नवजात और बहुत छोटे बच्चे: नवजात शिशुओं की त्वचा बेहद कोमल होती है. लहसुन का अर्क उनकी नाजुक स्किन को नुकसान पहुंचा सकता है. छोटे बच्चों के लिए केवल सादा सरसों का तेल या नारियल तेल ही ज्यादा सुरक्षित रहता है.
मालिश करते वक्त इन बातों का रखें खास ख्याल
डॉ राम अवतार सलाह देते हैं कि मालिश हमेशा हल्के हाथों से और दिल की दिशा में (नीचे से ऊपर की ओर) करनी चाहिए. मालिश करने के तुरंत बाद ठंडे पानी से न नहाएं और न ही सीधे एसी या पंखे की तेज हवा में बैठें. कम से कम आधे घंटे तक शरीर को ढककर रखें ताकि तेल की गर्माहट नसों के अंदर तक समा सके.
हमारी पुरानी परंपराओं और रसोई में मौजूद साधारण चीजों में सेहत का बहुत बड़ा खजाना छुपा हैबस जरूरत है तो इस बात की कि हम सही जानकारी और सही तरीके के साथ इनका फायदा उठाएं.
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