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सुबह उठते ही शरीर में रहती है अकड़न? विटामिन की कमी से लेकर गठिया तक हो सकते हैं ये कारण

सुबह उठते ही शरीर में अकड़न महसूस होती है? जानिए इसके कारण, विटामिन D-B12 की कमी, गठिया और कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.

सुबह उठते ही शरीर में रहती है अकड़न? विटामिन की कमी से लेकर गठिया तक हो सकते हैं ये कारण
सुबह उठते ही शरीर में अकड़न क्यों होती है?
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क्या आपकी सुबह भी शरीर में अकड़न के साथ शुरू होती है? बिस्तर से उठते ही कमर सीधी करने में दिक्कत होती है या हाथ-पैर कुछ देर तक जकड़े हुए लगते हैं? अगर ऐसा कभी-कभार होता है, तो यह सामान्य हो सकता है.  कई लोग सुबह की अकड़न को उम्र बढ़ने का सामान्य असर मान लेते हैं, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार यह कई बार विटामिन की कमी, गठिया या दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं का शुरुआती संकेत भी हो सकता है.

दरअसल, नींद के दौरान शरीर और जोड़ों की गतिविधि काफी कम हो जाती है. इसलिए सुबह उठने पर कुछ लोगों को कुछ मिनट तक हल्की अकड़न महसूस हो सकती है, जो चलने-फिरने के बाद कम हो जाती है. बीते दिन अगर फिजिकल एक्जरशन, नई या सख्त एक्सरसाइज, गलत स्लीप पोजिशन या ठीक सपोर्ट न देने वाला गद्दा और तकिया भी इसकी वजह बन सकते हैं. लेकिन अगर यह अकड़न रोज होने लगे, लंबे समय तक बनी रहे या लगातार बढ़ती जाए, तो इसकी वजह पता करना जरूरी हो जाता है.

सुबह उठते ही शरीर में अकड़न क्यों होती है?

सुबह की अकड़न का संबंध सिर्फ बढ़ती उम्र से नहीं होता. कई बार विटामिन D या विटामिन B12 की कमी, गठिया, थायरॉयड की गड़बड़ी, मांसपेशियों की कमजोरी या ऑटोइम्यून बीमारियां भी इसकी वजह बन सकती हैं. कुछ लोगों में लंबे समय तक शारीरिक गतिविधि कम रहने या गलत गद्दे और तकिए के इस्तेमाल से भी यह परेशानी शुरू हो जाती है. इसलिए सिर्फ दर्द निवारक दवा लेकर बार-बार इस समस्या को दबाना सही तरीका नहीं है.

सुबह की अकड़न कुछ खास बीमारियों का शुरुआती संकेत भी हो सकती है. उदाहरण के लिए, रूमेटॉइड आर्थराइटिस (Rheumatoid Arthritis) एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली ही जोड़ों पर हमला करने लगती है. इसके कारण सुबह लंबे समय तक जोड़ों में दर्द और अकड़न बनी रह सकती है. वहीं ऑस्टियोआर्थराइटिस (Osteoarthritis) में जोड़ों की घिसावट के कारण उठने-बैठने में जकड़न और दर्द महसूस हो सकता है.

इसके अलावा फाइब्रोमायल्जिया (Fibromyalgia) जैसी स्थिति में शरीर की मांसपेशियों और नरम ऊतकों में दर्द के साथ सुबह उठने पर थकान और अकड़न महसूस हो सकती है. महिलाओं में मेनोपॉज (Menopause) के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव भी जोड़ों और मांसपेशियों में जकड़न की वजह बन सकते हैं. बढ़ती उम्र के साथ मांसपेशियों की ताकत और लचीलापन कम होने लगता है, जिससे भी कुछ लोगों को सुबह उठने पर शरीर अकड़ा हुआ महसूस हो सकता है.

किन संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें?

अगर सुबह की अकड़न आधे घंटे या उससे ज्यादा समय तक बनी रहती है, जोड़ों में सूजन या तेज दर्द रहता है, हाथ-पैर सुन्न पड़ने लगते हैं, पकड़ कमजोर महसूस होती है या इसके साथ बुखार और बिना वजह वजन कम होने जैसे लक्षण भी दिखाई दें, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होगा. ऐसे संकेत किसी ऐसी बीमारी की ओर इशारा कर सकते हैं, जिसके लिए समय पर इलाज जरूरी होता है.

सुबह की अकड़न किन बीमारियों का संकेत हो सकती है?

अगर सुबह उठने के बाद शरीर या जोड़ों में होने वाली अकड़न कुछ मिनटों में ठीक हो जाए, तो यह आमतौर पर चिंता की बात नहीं होती. लेकिन अगर यह परेशानी रोज होने लगे, लंबे समय तक बनी रहे या दर्द और सूजन के साथ दिखाई दे, तो यह कुछ स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकती है.

रूमेटॉइड आर्थराइटिस (Rheumatoid Arthritis) ऐसी ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली ही जोड़ों पर हमला करने लगती है. इसके कारण हाथ, कलाई, घुटनों और अन्य जोड़ों में दर्द, सूजन और सुबह लंबे समय तक अकड़न महसूस हो सकती है.

ऑस्टियोआर्थराइटिस (Osteoarthritis) में जोड़ों की ऊपरी परत धीरे-धीरे घिसने लगती है. यह समस्या उम्र बढ़ने के साथ अधिक देखी जाती है और इसके कारण सुबह उठते समय जोड़ों में जकड़न और चलने-फिरने में परेशानी हो सकती है.

फाइब्रोमायल्जिया (Fibromyalgia) से पीड़ित लोगों को पूरे शरीर में दर्द, थकान और सुबह उठने पर मांसपेशियों में अकड़न महसूस हो सकती है. कई बार पर्याप्त नींद लेने के बावजूद शरीर थका हुआ महसूस होता है.

इसके अलावा थायरॉयड की गड़बड़ी, विटामिन D और विटामिन B12 की कमी, मांसपेशियों की कमजोरी और अन्य ऑटोइम्यून बीमारियां भी सुबह की जकड़न की वजह बन सकती हैं. महिलाओं में मेनोपॉज (Menopause) के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव भी जोड़ों और मांसपेशियों में अकड़न बढ़ा सकते हैं.

बढ़ती उम्र के साथ मांसपेशियों की ताकत और लचीलापन कम होने लगता है. ऐसे में कुछ लोगों को सुबह उठते ही शरीर अकड़ा हुआ महसूस हो सकता है. हालांकि, अगर अकड़न लगातार बढ़ रही है या रोजमर्रा के कामों को प्रभावित कर रही है, तो इसकी सही वजह जानने के लिए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.

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कुछ आसान बदलाव राहत दे सकते हैं

अगर अकड़न के पीछे कोई गंभीर बीमारी नहीं है, तो रोज सुबह हल्की स्ट्रेचिंग, थोड़ी देर टहलना, गुनगुने पानी से नहाना और लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहने से बचना मददगार हो सकता है. संतुलित आहार, पर्याप्त पानी और अच्छी नींद भी मांसपेशियों और जोड़ों को स्वस्थ रखने में भूमिका निभाते हैं. अगर जांच में किसी विटामिन की कमी सामने आती है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार उसका इलाज कराना चाहिए.

डॉक्टर को दिखाना कब जरूरी है?

अगर कई हफ्तों से रोज सुबह शरीर में अकड़न बनी हुई है, परेशानी लगातार बढ़ रही है या इसका असर आपके रोजमर्रा के काम पर पड़ने लगा है, तो मेडिकल जांच कराना बेहतर रहेगा. डॉक्टर जरूरत के अनुसार ब्लड टेस्ट, विटामिन की जांच या दूसरी जांच की सलाह दे सकते हैं. सही वजह का पता चल जाए, तो कई मामलों में समय रहते इलाज शुरू किया जा सकता है और आगे होने वाली परेशानी से भी बचा जा सकता है.

अगर सुबह की अकड़न कभी-कभार होती है और थोड़ी देर में ठीक हो जाती है, तो आमतौर पर चिंता की बात नहीं होती. लेकिन, अगर यह परेशानी बार-बार हो रही है, तो सिर्फ उम्र का असर मानकर टालने के बजाय इसकी वजह पता करना ज्यादा समझदारी होगी.

सुबह की अकड़न कम करने के आसान उपाय

अगर सुबह शरीर में अकड़न किसी गंभीर बीमारी की वजह से नहीं है, तो कुछ सरल आदतें इसे कम करने में मदद कर सकती हैं. रोज सुबह उठने के बाद हल्की स्ट्रेचिंग और कुछ मिनट टहलने से मांसपेशियों और जोड़ों में रक्त संचार बेहतर होता है, जिससे जकड़न कम महसूस हो सकती है. गुनगुने पानी से नहाना या गर्म सिकाई भी शरीर को आराम देने में मदद कर सकती है.

दिनभर पर्याप्त शारीरिक गतिविधि बनाए रखना, लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने से बचना और नियमित व्यायाम करना भी फायदेमंद हो सकता है. साथ ही, संतुलित आहार, पर्याप्त पानी पीना और अच्छी नींद मांसपेशियों और जोड़ों को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

अगर जांच में विटामिन D या विटामिन B12 की कमी सामने आती है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार उसका उपचार कराना चाहिए. इसके अलावा, सही सपोर्ट वाला गद्दा और तकिया चुनने से भी सुबह होने वाली अकड़न को कम करने में मदद मिल सकती है.

लेखक के बारे में : डॉ. ईश्वर बोहरा देश के प्रतिष्ठित जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जनों में से एक हैं और उन्हें इस क्षेत्र में 23 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह BLK-Max सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नई दिल्ली में सीनियर डायरेक्टर, जॉइंट रिप्लेसमेंट प्रोग्राम के रूप में कार्यरत हैं. घुटने (Knee) और कूल्हे (Hip) के प्रत्यारोपण, स्पोर्ट्स इंजरी, आर्थ्रोस्कोपी और रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी में उनकी विशेष विशेषज्ञता है.

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