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पानी से 98% माइक्रोप्लास्टिक्स हटाते हैं सहजन के बीज, वैज्ञानिकों ने ढूंढ निकाला नेचुरल वाटर फिल्टर

Moringa For Water Purification: यह पेड़ अपने मेडिसिनल प्रोपर्टीज के लिए जाना जाता है. नई रिसर्च के मुताबिक, इसका एक और बड़ा फायदा है, यह पानी से माइक्रोप्लास्टिक हटाने में कारगर है.

पानी से 98% माइक्रोप्लास्टिक्स हटाते हैं सहजन के बीज, वैज्ञानिकों ने ढूंढ निकाला नेचुरल वाटर फिल्टर
वैज्ञानिकों की टीम करीब दस साल से इस पेड़ के बीजों की स्टडी कर रही है. (AI Image)

How Moringa Seeds Clean Water: अक्सर शहरों से इस तरह की खबरें आती हैं कि पीने के पानी से लोग बीमार पड़ गए. कई जगह पीने के पानी में बैक्टीरिया और दूसरे सूक्ष्म कण मिले होते हैं जो शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं. वहीं पानी में माइक्रोप्लास्टिक मिलने की खबरें भी आती हैं. पानी में घुला ये माइक्रोप्लास्टिक शरीर में जाकर कैंसर और दिल की बीमारियों का जोखिम पैदा करता है. लेकिन अब वैज्ञानिकों ने पानी से माइक्रोप्लास्टिक के कणों को हटाने के एक असरदार और किफायती तरीका खोज निकाला है. मोरिंगा का पेड़, जिसे चमत्कारी पेड़ के नाम से भी जाना जाता है, दुनिया के सबसे ज्यादा पोषक तत्वों से भरपूर पौधों में से एक है. ये अपने मेडिसिनल प्रोपर्टीज के लिए जाना जाता है. नई रिसर्च के मुताबिक, इसका एक और बड़ा फायदा भी है, यह पानी से माइक्रोप्लास्टिक हटाने में कारगर है.

ब्राजील और यूनाइटेड किंगडम के साइंटिस्ट्स की एक टीम ने पाया कि मोरिंगा यानी सहजन के पेड़ों के बीजों का अर्क पीने के पानी से माइक्रोप्लास्टिक हटाने में उतना ही असरदार है जितना कि आम तौर पर इस्तेमाल होने वाले केमिकल. यह बात अप्रैल में पब्लिश हुई उनकी रिसर्च से पता चली है.

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सालों पहले से हो रहा इस्तेमाल

साओ पाउलो स्टेट यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में स्टडी के लेखक और प्रोफेसर एड्रियानो गोंसाल्वेस डॉस रीस ने कहा कि मोरिंगा के पेड़ों का इस्तेमाल हजारों सालों से पानी को साफ करने के लिए किया जाता रहा है और पुराने यूनानियों, रोमनों और मिस्र के लोगों द्वारा इसके इस्तेमाल के सबूत मिले हैं.

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कैसे पानी को साफ करता है मोरिंगा?

वैज्ञानिकों की टीम करीब दस साल से इस पेड़ के बीजों की स्टडी कर रही है. मोरिंगा में ऐसे तत्व होते हैं जो पानी में छोटे-छोटे पार्टिकल्स को एक साथ चिपका देता है ताकि उन्हें फिल्टर किया जा सके. मोरिंगा के बीजों में नेचुरल प्रोटीन होते हैं, जिनमें पॉजिटिव चार्ज होता है. जब इन्हें पानी में मिला दिया जाता है, तो ये निगेटिव चार्ज वाले माइक्रोप्लास्टिक कणों से चिपक जाते हैं. इस तरह से ये छोटे कण आपस में जुड़कर बड़े गुच्छों में बदल जाते हैं, जिन्हें आसानी से फिल्टर किया जा सकता है. आम भाषा में समझे तो ये पौधा पानी में छिपे प्लास्टिक के छोटे कणों को सोख कर साफ कर देता है.

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माइक्रोप्लास्टिक्स क्या होते हैं?

माइक्रोप्लास्टिक्स छोटे टुकड़े होते हैं, जो 1/25,000 इंच (1 माइक्रोमीटर) जितने छोटे हो सकते हैं. वे हर जगह पाए गए हैं, गहरे समुद्रों से लेकर ऊंचे पहाड़ों तक. वे हमारे खाने और पानी को खराब करते हैं. 2024 की एक स्टडी में पाया गया कि दुनिया भर में टेस्ट किए गए 83% नल के पानी में माइक्रोप्लास्टिक थे और हमारे शरीर में पहुंच गए हैं, जिसमें हमारा दिमाग, प्रजनन और कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम शामिल हैं.

साइंटिस्ट अभी भी इंसानी सेहत पर उनके असर का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जानवरों पर हुई रिसर्च ने उन्हें प्रजनन समस्याओं और हार्मोन में गड़बड़ी से जोड़ा है. अपनी स्टडी के लिए, रिसर्चर्स ने खासतौर पर PVC माइक्रोप्लास्टिक पर फोकस किया, क्योंकि ये सबसे खतरनाक हैं और पीने के पानी में आम हैं.

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Photo Credit: Canva

रिसर्च में क्या आया सामने

वैज्ञानिकों ने 18.8 माइक्रोमीटर के औसत साइज वाले माइक्रोप्लास्टिक का टेस्ट किया, जो औसत इंसानी बाल की मोटाई का लगभग एक चौथाई है और पाया कि फिल्ट्रेशन सिस्टम में इस्तेमाल होने पर बीज का अर्क नल के पानी से उन्हें हटाने में 98.5% असरदार था.

यह एफिशिएंसी लगभग एक आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले केमिकल कोएगुलेंट एल्युमिनियम सल्फेट (फिटकरी) के बराबर है. साइंटिस्ट्स ने पाया कि ज्यादा एल्कलाइन पानी में मोरिंगा के बीजों ने फिटकरी से भी बेहतर काम किया.

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गोंजाल्वेस डॉस रीस ने कहा कि फिटकरी की तुलना में बीजों का इस्तेमाल करने का एक बड़ा फायदा यह है कि वे रिन्यूएबल, बायोडिग्रेडेबल हैं, ज्यादा मात्रा में कीचड़ नहीं बनाते हैं और उनमें टॉक्सिसिटी की चिंता कम होती है. एल्युमिनियम ज्यादा लेवल पर टॉक्सिक हो सकता है और इसे न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों से जोड़ा गया है.

वैज्ञानिकों ने आगे कहा कि अब देखना है कि क्या मोरिंगा के बीज माइक्रोप्लास्टिक के साथ-साथ नैनो प्लास्टिक को भी हटा सकते हैं. नैनो प्लास्टिक सबसे छोटे कण होते हैं, जो इंसान के बाल की औसत चौड़ाई का लगभग 1,000वां हिस्सा होते हैं.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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