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तनाव, चिंता... जैसे मानसिक समस्याएं बढ़ा सकती है डायबिटीज, डॉक्टर से समझें कैसे करें कंट्रोल

डायबिटीज न सिर्फ ब्लड शुगर पर असर डालता है, बल्कि मेंटल हेल्थ पर भी असर डाल सकता है. यहां जानते हैं इस विषय को विस्तार से-

तनाव, चिंता... जैसे मानसिक समस्याएं बढ़ा सकती है डायबिटीज, डॉक्टर से समझें कैसे करें कंट्रोल
Diabetes and Mental health : डायबिटीज मेंटल हेल्थ पर डालता है असर

डायबिटीज के इलाज में अब सिर्फ ब्लड शुगर, दवाओं और डाइट पर ध्यान देना काफी नहीं माना जा रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि मरीजों की मानसिक स्थिति की नियमित जांच भी उतनी ही जरूरी है, क्योंकि तनाव, चिंता और भावनात्मक थकान डायबिटीज को नियंत्रित करना मुश्किल बना सकते हैं.

डायबिटीज को आमतौर पर ब्लड शुगर से जुड़ी बीमारी माना जाता है, लेकिन डॉक्टर अब इसके एक और महत्वपूर्ण पहलू की ओर ध्यान दिला रहे हैं, और वह है मानसिक स्वास्थ्य. विशेषज्ञों का मानना है कि डायबिटीज के मरीजों के लिए नियमित मानसिक स्वास्थ्य जांच भी इलाज का हिस्सा बननी चाहिए.

सीके बिड़ला हॉस्पिटल, दिल्ली के न्यूरोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. के.के. जिंदल के अनुसार, डायबिटीज के साथ जीना आसान नहीं होता. मरीजों को हर दिन खानपान पर निगरानी रखनी पड़ती है, दवाएं समय पर लेनी होती हैं और ब्लड शुगर को लगातार मॉनिटर करना होता है. ऐसे में कई लोग मानसिक रूप से थकान, तनाव और निराशा महसूस करने लगते हैं.

क्या है डायबिटीज डिस्ट्रेस?

डॉक्टर जिंदल का कहना है कि कई मरीज डायबिटीज डिस्ट्रेस का सामना करते हैं. ये एक ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति बीमारी के लगातार दबाव से भावनात्मक रूप से परेशान रहने लगता है. ये सामान्य तनाव से अलग होता है और समय के साथ मरीज के इलाज पर भी असर डाल सकता है.

एक्सपर्ट का कहना है कि डायबिटीज को सही तरीके से मैनेज न कर पाने को अक्सर इच्छाशक्ति की कमी समझ लेते हैं, लेकिन वास्तव में इसका कारण मेंटल प्रेशर भी हो सकता है. लगातार तनाव और चिंता की वजह से मरीज दवाएं लेना भूल सकते हैं, डॉक्टर की सलाह का सही पालन नहीं कर पाते और स्वस्थ जीवनशैली बनाए रखना उनके लिए कठिन हो जाता है.

नियमित चेकअप करना है जरूरी

डॉक्टर अक्सर इस स्थिति में नियमित रूप से चेपअक करने की सलाह देते हैं. इसके लिए लंबी काउंसलिंग की जरूरत नहीं होती. कुछ आसान सवालों या छोटे स्क्रीनिंग टेस्ट की मदद से एंग्जायटी, डिप्रेशन और इमोशनल परेशानी का समय रहते पता लगाया जा सकता है.

एक्सपर्ट का मानना है कि जब मरीज को शारीरिक और मानसिक दोनों तरह का सहयोग मिलता है, तो वह अपने उपचार को बेहतर तरीके से फॉलो कर पाता है. इससे ब्लड शुगर नियंत्रण में रखने में भी मदद मिल सकती है.

डॉ. जिंदल कहते हैं कि डायबिटीज का इलाज सिर्फ बीमारी का नहीं, बल्कि उस व्यक्ति का होना चाहिए जो हर दिन इसके साथ जी रहा है. इसलिए अब समय आ गया है कि मानसिक स्वास्थ्य जांच को भी डायबिटीज देखभाल का एक नियमित हिस्सा बनाया जाए.

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